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मोदी को अंदेशा हो गया था-
वैसे भाजपा की 2024 में कमजोर स्थिति का अंदेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले ही हो गया था। और इसीलिए इस लोकसभा चुनाव में मोदी लगातार कुछ बदले-बदले नजर आते रहे। भाजपा नेताओं के प्रति उनके व्यवहार में प्रीतिकर बदलाव नजर आया, तो मीडिया को दिए इंटरव्यू की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी भी यही संकेत देती नजर आई। दरअसल इस चुनाव में अंदेशा होने के बाद मोदी अपने मूल स्वभाव से अलग हटकर व्यवहार करते नजर आए। इसने कहीं न कहीं मोदी की छवि पर समझौतावादी होने का टैग लगाया। और उन्हें हर चरण में मुद्दा बदलना भी उनकी मजबूरी हो गई थी।
यह योगी-संघ बनाम मोदी उत्तर प्रदेश तो नहीं है-
उत्तर प्रदेश में राम मंदिर के बाद भी भाजपा की सीटों में बहुत ज्यादा कमी होना कहीं इस बात का संकेत तो नहीं है कि भाजपा के भीतर भी बहुत उथल-पुथल का दौर जारी है। योगी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मिलकर कहीं उत्तर प्रदेश में मोदी की परीक्षा तो नहीं ली है? या यह जताने और अहसास कराने का प्रयास तो नहीं किया है कि भाजपा में व्यक्ति कभी भी पार्टी से ऊपर नहीं है और बिना संघ के भाजपा की नैया कभी भी पार नहीं हो सकती। यह तो बस कयास है, बाकी सच क्या है यह तो योगी-संघ और मोदी ही समझ सकते हैं।
मध्यप्रदेश में विष्णु-मोहन कसौटी पर खरे उतरे –
मध्यप्रदेश ने सभी 29 सीटें जीतकर प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का वह संकल्प सच कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश से सभी 29 स्वर्ण कमल पुष्प मोदी को समर्पित करेंगे। उन्होंने हर बूथ पर दस फीसदी मत बढ़ाने का संकल्प भी लिया था। और उनकी यह दोनों बातें सही साबित हो गई हैं। इससे यह भी साबित हो गया है कि मध्यप्रदेश का संगठन देश में सबसे ज्यादा मजबूत है। और यह बात भी सही साबित हो रही है कि विष्णु दत्त शुभंकर अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश भाजपा ने वह सभी मुकाम हासिल किए, जिनकी पार्टी ने कल्पना की। तो संगठन और सरकार के पारस्परिक ताकत को नकारा नहीं जा सकता। मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सोच और मेहनत के बिना भी इन 29 सीटों पर जीत की कल्पना अधूरी है। मोहन यादव ने साबित कर दिया है कि पहली बार के मुख्यमंत्री होने पर भी वह लक्ष्य को हासिल करने में पूरी तरह से सक्षम हैं। और उन्होंने लोकसभा चुनाव में संगठन के तालमेल से यह कर दिखाया है। बात जब सफलता की होगी, तब प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की कुशलता को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। दायित्व मिलने के बाद संगठन को और अधिक ताकतवर बनाकर हितानंद पार्टी की हर चुनौती पर खरा साबित हुए हैं। इक्कीसवीं सदी में मध्यप्रदेश भाजपा का यह रिकार्ड अनूठा है…इसकी पुनरावृत्ति शायद फिर आसानी से संभव न हो।
अंतत: यही कहा जा सकता है कि ‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ यानि जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा। तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ावे। तो राम ने यही रचा था, जिसे मोदी ने भी माथे से लगा लिया है, भाजपा ने भी अंतर्मन से स्वीकार कर लिया है और एनडीए की सरकार बनने के साथ मोदी के लगातार तीसरी बार गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बनकर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के रिकार्ड की बराबरी करने की राह साफ है। राम किसी के साथ अन्याय नहीं करते और यह बात भी काम की है कि जो होता है वह अच्छे के लिए ही होता है…।