सोपा ने कृषि प्रोत्साहन का स्वागत किया, सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र पर अधिक फोकस की जरूरत बताई

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सोपा ने कृषि प्रोत्साहन का स्वागत किया, सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र पर अधिक फोकस की जरूरत बताई

इंदौर: सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के चेयरमैन डॉ. दविश जैन ने केंद्रीय बजट 2026–27 में कृषि क्षेत्र को दिए गए मजबूत प्रोत्साहन का स्वागत करते हुए कहा है कि यह बजट कृषि विकास और तिलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र के लिए अधिक लक्षित और स्पष्ट नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. जैन ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक है, तथा तिलहन उत्पादकता बढ़ाने और किस्मों के प्रतिस्थापन पर सरकार का फोकस सराहनीय कदम हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सोयाबीन जैसे रणनीतिक महत्व के फसल के लिए बजट में ठोस और विशिष्ट उपायों की घोषणा से इसका प्रभाव और अधिक मजबूत हो सकता था।

उन्होंने कहा, “भारत आज भी अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकता का 55 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है और देश के तिलहन किसानों व प्रोसेसर्स को नुकसान होता है। सोयाबीन में यह क्षमता है कि वह इस चुनौती का समाधान बने, विशेषकर वर्षा आधारित क्षेत्रों में।”

डॉ. जैन ने बताया कि बजट से पूर्व SOPA द्वारा रखे गए कई सुझावों पर आगामी नीतिगत निर्णयों में विचार किया जाना आवश्यक है। इनमें खाद्य तेलों के आयात शुल्क का युक्तिकरण एवं वृद्धि कर सस्ते आयात से किसानों की रक्षा करना, सोयाबीन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित खरीद, तथा नॉन-GMO सोयाबीन जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात को प्रोत्साहन देना शामिल है।

उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में उच्च उत्पादकता और जलवायु-अनुकूल सोयाबीन बीज किस्मों—जैसे NRC-165, JS-22-12 और JS-21-72—की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उत्पादकता बढ़े और किसानों की आय में सुधार हो सके।

डॉ. जैन के अनुसार, सोयाबीन भारत की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के लिए अत्यंत उपयुक्त फसल है और यह मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि तथा खाद्य तेल सुरक्षा को मजबूती प्रदान कर सकती है।

उन्होंने कहा, “SOPA का मानना है कि पूरक उपायों और भविष्य की नीतिगत घोषणाओं के माध्यम से आवश्यक सुधार संभव हैं। यदि वर्ष 2026 को ‘सोयाबीन वर्ष’ घोषित किया जाता है, तो इससे उत्पादकता, किसान जागरूकता, मूल्य संवर्धन और निर्यात को नई गति मिल सकती है।”

सरकार के साथ रचनात्मक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए डॉ. जैन ने कहा कि SOPA एक आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ खाद्य तेल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए सरकार और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करती रहेगी, जिससे किसानों, प्रोसेसर्स और उपभोक्ताओं—सभी को लाभ हो।