ऐतिहासिक और पौराणिक महत्त्व का प्रसिद्ध गांव राजघाट   बना टापू, कई परिवार मुसीबत में, मेघा पाटकर का अनशन जारी

ऐतिहासिक और पौराणिक महत्त्व का प्रसिद्ध गांव राजघाट बना टापू, कई परिवार मुसीबत में, मेघा पाटकर का अनशन जारी

मीडियावाला.इन।

बड़वानी से सचिन राठौर की खास खबर

बड़वानी- तस्वीर में दिखाई दे रहा कुकरा गांव जो राजघाट के नाम से भी प्रसिद्ध रहा है, अब टापू बन चुका है। सरदार सरोवर बांध की डूब में आए मप्र के 193 गांवों में से एक राजघाट कभी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का भी गांव रहा है। इस टापू में 40 परिवार अब भी 40 परिवार फंसे हुए है, जिन्हें सरदार सरोवर बांध की डूब में नहीं माना गया। राजघाट पहुंच मार्ग से दो किमी दूरी तक पानी आ गया था। राजघाट पहुंच मार्ग की दूसरी पुलिया भी पूरी तरह से पानी में डूब गई है! राजघाट पर नर्मदा का जलस्तर 134.250 मीटर तक पहुंच गया है

 

यहां राजघाट में 40 परिवार अभी भी अपने विस्थापन की राह देख रहे है। इन परिवारों ने बिना पुनर्वास के राजघाट को छोडऩे से इंकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि डूब प्रभावितों के हक में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर डूब ग्राम छोटा बड़दा में अनिश्चितकालीन अमरण अनशन पर बैठीं हुईं हैं। आज   उनके आमरण अनशन का आठवा दिन है। प्रशासन द्वारा उन्हें मनाने की कोशिश भी की गई, लेकिन उन्होंने पहले सरदार सरोवर बांध के गेट खोलने की मांग रखी। उल्लेखनीय है कि राजघाट पर ऐतिहासिक गांधी समाधि थी जिसे वर्ष 2017 में विस्थापित कर कुकरा बसावट में बनाया गया है। ये देश की एकमात्र ऐसी गांधी समाधि थी जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ उनकी पत्नी कस्तुरबा और उनके सहायक महादेवभाई देसाई की अस्थियां थी। यहां 105 साल पुराना ऐतिहासिक दत्तात्रेय मंदिर के साथ ही कई आश्रम भी थे जो अब डूब चुके है। नर्मदा की दूसरी ओर धार जिला लगता है। जिसके तट पर बसा चिखल्दा भी डूब की कगार पर है।

 

टापू में फंसी जिंदगियां, सुध लेने वाला कोई नहीं...

 

नर्मदा के लगातार बढ़ते जलस्तर से टापू बने राजघाट पर फंसे लोगों का जीवन अब संकटमय होने लगा है। टापू में फंसी जिंदगियों की कोई सुध लेने वाला नहीं। यहां 12 अगस्त को नाव से टापू पर जाते समय दो लोगों की मौत होने के बाद जमकर हंगामा भी हुआ था। जिसके बाद प्रशासन ने यहां के लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए 14 अगस्त को शिविर भी लगाया था। अब शिविर के 17 दिन गुजर जाने के बाद भी इन डूब प्रभावितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

जीव जंतुओं के खतरे के बीच परिवार

चारों ओर पानी से घिरे राजघाट टापू पर इस समय न तो बिजली है, न पेयजल की कोई व्यवस्था। बढ़ते जलस्तर से डूब रहे आसपास के खेत, मैदानों से निकलकर सांप, बिच्छु टापू पर आने लगे है। घुप अंधेरे में इन जीव जंतुओं के खतरे के बीच 40 परिवार अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन के राहुल यादव ने बताया कि शिविर में राजघाट टापू पर बसे परिवारों ने अपनी समस्याएं बताई थी। जिन पर प्रशासन को ठोस निर्णय लेना था, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकाला गया है।

 

 

गुजरात में दे दी जमीन, कैसे जाए वहां पर...

 

राहुल यादव ने बताया कि यहां के विस्थापितों को 60 लाख और 15 लाख की पात्रता के मुद्दे पर कोई जवाब नहीं मिला है। 23 परिवारों को गुजरात के मियगांव जिला बड़ौदा, 16 परिवारों को केसोरोल जिला भरूच और 10 परिवारों को मनाड जिला भरूच में जमीन दी गई है। वहां के घर प्लाट अब मप्र राज्य में दिए जाए, केसोरोल की जमीन निरस्त कर मप्र में दी जाए। इस मुद्दे पर शिकायत निवारण प्राधिकरण में गुजरात से स्थानांतरण कराया जाए। व्यस्क पुत्र-पुत्रियों को भी घर प्लाट और 5.80 लाख का लाभ दिया जाए। अंजड़ के पास डूब ग्राम छोटा बड़दा में नबआं नेत्री मेधा पाटकर रविवार से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठीं हुई है। वहीं, उनके साथ प्रतिदिन चार महिलाएं क्रमिक अनशन कर रही हैं। कल एक बार फिर प्रशासन का अमला मेधा पाटकर को मनाने पहुंचा, लेकिन नाकाम रहा।

 नबआं नेत्री मेधा पाटकर ने कहा हमारी मांग है कि सरदार सरोवर बांध के संपूर्ण गेट खुले रखना चाहिए। गुजरात के सारे जलाशय लबालब भरे है उसे पानी की आवश्यकता नहीं है और नहीं मध्यप्रदेश को बिजली की जरुरत है। फिर प्रदेश वासियों को क्यो डुबोया जा रहा है। जब तक पुनर्वासनीति को पूरा नही किया जाता, तब तक बांध में पानी भरना न्यायीक नहीं है। इस दौरान कई समर्थक बांध विरोधी नारे लगाते हुए डटे हुए है। वहीं, नर्मदा का जल स्तर बढऩे से छोटा बड़दा के अग्नेश्वर घाट पर अनशन स्थल से कुछ दूरी तक पानी पहुंच गया है।

 

नहीं कराया मेधा ने स्वास्थ्य परीक्षण...

 

कल दोपहर 2 बजे सत्याग्रह पर बैठी पाटकर के हाल चाल जानने के लिए अपर कलेक्टर अमित तोमर पुलिस अधीक्षक डी आर तेनिवाल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत, दल बल सहित पहुंचे थे। उन्होंने एनबीए नेत्री पाटकर से नर्मदा चुनौती सत्याग्रह समाप्त करने का आग्रह किया। आंदोलन नेत्री थकी थकी नजर आ रही थी, लेकिन तीसरे दिन भी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करने दिया। 

टेस्टिंग के नाम पर डुबोया जा रहा...

 

एनबीए नेत्री मेधा पाटकर ने बताया कि आंदोलन राजनीति से प्रेरित नहीं होकर विकासनीति की बात पर आधारित है। विकास के नाम पर इन बड़े बांधों के जरिए बड़ा विनाश किया जा रहा है। गुजरात एवं दिल्ली की हठधर्मिता के चलते टेस्टिंग के नाम पर 139 मीटर तक जल भरकर नागरिकों को डुबोया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात राज्य का भी ये कर्तव्य है कि संपूर्ण पुनर्वास होने तक सरदार सरोवर बांध को पूरा नहीं भरा जाना चाहिए था। आपने प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में जो नहीं हुआ वह पिछले 10 माह में प्रदेश की सरकार जवाबदारी नही ले पाई व संपूर्ण पुनर्वास की मांग को सशक्त ढंग से नहीं उठाया गया!

बांध के कारण आ रहे भूकंप के झटके...

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। वर्ष 2008 से 10 तक 16 हजार परिवारों को डूब क्षेत्र से बाहर करने की साजिश रची गई। जबकि यह परिवार डूब प्रभावित है। पाटकर ने आरोप लगाया कि सरदार सरोवर बांध का पानी रोकने के कारण राजपुर ब्लॉक के कई गावो में भूकंप के झटके कई दिनों से महसूस किए जा रहे जिससे ग्रामीणों में दहशत है। आपने बताया कि प्रदेश सरकार के सचिव से मिले पत्र के अनुसार मध्यप्रदेश ने गुजरात से 1857 करोड़ रुपए की मांग की जो नहीं दिए जा रहे है। इससे पुनर्वास नीति प्रभावित हो रही है।

 

 

 

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