दशहरे पर नए शहर पहुंची महाकाल की सवारी, भक्‍तों ने बरसाए फूल

दशहरे पर नए शहर पहुंची महाकाल की सवारी, भक्‍तों ने बरसाए फूल

मीडियावाला.इन। उज्जैन। राजाधिराज महाकाल की परंपरागत सवारी दशहरे पर गुस्र्वार शाम नए शहर में आई। सवारी का तकरीबन 150 मंचों से हजारों लोगों ने फूलों से स्वागत किया। आरती उतार प्रसाद बांटा। सवारी में शामिल पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में विराजित बाबा महाकाल का पूजन कलेक्टर मनीष सिंह ने किया।

इसके बाद सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, सराफा, सतीगेट, नईसड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुंडा माता चौराहा, टाचर चौक, शहीद पार्क, सांदीपनि चौराहा, पुलिस कंट्रोल रूम होकर दशहरा मैदान पहुंची थी। यहां जया, विजया, अपराजिता देवी और शमी का पूजन किया गया। इसके बाद सवारी पुन: इसी मार्ग से मंदिर रात सवा 8 बजे लौटी। मालूम हो कि कई सालों से यह परंपरा है कि साल में एक दिन दशहरे पर भगवान महाकाल सवारी के रूप में नए शहर में श्रद्धालुओं को दर्शन देने आते हैं।


शहर की सीमा से संबंध रहा है सवारी का

वरिष्ठ ज्योतिषविद् पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया, महाकाल की सवारी का संबंध शहर की सीमा से है। कालांतर से परंपरा रही है कि वर्षाकाल खत्म होने पर राजा मां शक्ति की उपासना करते हैं। शस्त्र पूजन करते हैं। राजा राज्य की रक्षा के लिए सक्षम है, यह बताने को बलि देते हैं। शहर की सीमा तक सवारी के रूप में जाते हैं। उज्जैन के राजा महाकाल का हैं। इसलिए इसी परंपरा में उनकी सवारी भी निकलती है। वैसे ही धर्मप्रिय जनता उत्सव मनाती है। पहले शहर की सीमा देवासगेट पर खत्म हो जाती थी तो वहीं तक सवारी निकलती थी। उसके बाद सीमा माधवनगर तक हुई और फिर दशहरा मैदान तक। अब शहर की सीमा कई आगे बढ़ गई है।

 

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