Wednesday, December 11, 2019
आजादी के इतने साल बाद भी राजधानी के पास सड़क के लाले, कपड़े की झोली में लेटाकर पैदल मुख्य मार्ग तक लाई गई प्रसूता

आजादी के इतने साल बाद भी राजधानी के पास सड़क के लाले, कपड़े की झोली में लेटाकर पैदल मुख्य मार्ग तक लाई गई प्रसूता

मीडियावाला.इन। आजादी के इतने साल बाद भी आज राजधानी भोपाल के निकट सीहोर जिले में सड़क नहीं होने से एक प्रसूता को बमुश्किल मुख्य मार्ग तक कपड़े की झोली में लेटा कर लाने के लिए विवश होना पड़ा। 

 कपड़े की झोली में लेटाकर 3 किमी दूर मुख्य सड़क तक लाये परिजन तब एंबुलेंस से उसे अस्पताल पहुंचाया गया।सिद्धीकगंज ग्राम पंचायत के ग्राम पगारा का पहुंच मार्ग खराब होने के कारण मंगलवार को एक प्रसूता को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए उसके परिजनों को काफी मशक्कत करना पड़ी।पगारा निवासी अजब सिंह के मुताबिक उसकी पत्नी ऊषाबाई(21) को सुबह प्रसव पीड़ा हो रही थी। सुबह करीब 8.40 बजे 108 एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस ग्राम पीथापुरा के पास आकर खड़ी हो गई। वहां से पगारा तक की सड़क पर भारी कीचड़ के कारण चालक ने एंबुलेंस घर तक लाने में असमर्थता जताई। जिस पर परिजन ने लकड़ी पर कपड़ा बांधकर झोली बनाई। उसमें ऊषाबाई को लेटाया। फिर उस झोली को कंधे पर रखकर करीब 3 किमी पैदल चलकर एंबुलेंस तक आए।तब ऊषाबाई को सिद्धीकगंज अस्पताल पहुंचाया जा सका। जहां उसे भर्ती कर लिया गया। दोपहर करीब 1 बजे उसने बच्चे को जन्म दिया। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर ने उसे आष्टा रेफर कर दिया। परिजन ने दोपहर 1.30 बजे फिर 108 एंबुलेंस को फोन किया। करीब तीन घंटे बाद एंबुलेंस आई। तब बच्चे को आष्टा अस्पताल पहुंचाया जा सका। 

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