अतिवृष्टि के बाद सब्जियों के गिरते भावों ने फिर किसान की कमर तोड़ी

अतिवृष्टि के बाद सब्जियों के गिरते भावों ने फिर किसान की कमर तोड़ी

मीडियावाला.इन।                                                           किसानों ने जंहा लॉक डाउन का दंश झेला, अतिवृष्टि झेली, वही अब सब्जियों के गिरते भावों ने फिर किसान की कमर तोड़ी है, गिल्की के नही मिल रहे भाव, पशुओं को खिलाने को मजबूर हुए किसान*

*बड़वानी से सचिन राठौर की रिपोर्ट*

बड़वानी-ये वर्ष किसानो के लिए पूरी तरह परेशानी का बिता है। पहले लॉक डाउन फिर अतिवृष्टि और अब लगी हुई सब्जियां के भाव नही मिलने से किसान फिर परेशान हो रहा है।
बड़वानी जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर ग्राम सजवानी में किसानों के खेतों में लगी गिल्की की सब्जियों की फसल पककर तैयार हो चुकी है मगर अब गिल्की का भाव किसानों को नही मिल पा रहा है
किसान इस पूरे वर्ष किसी न किसी कारण से परेशान रहा है। पहले कोरोना लॉक डाउन तो फिर अतिवृष्टि और अब भाव। इस समय गिलकी की फसल तैयार है और किसान उसे खेत से निकालने में लगे है लेकिन जब सब्जी निकाल कर बेचने की बारी आई तो कोई लेने को तैयार नही। ट्रांसपोर्टिंग के जरिये बाहर भी भेजना चाहो तो लेने वाला नही।
ऐसे में अब किसान खेत से निकाली हुई गिल्की पशुओं को खिला रहे है। किसान विनोद सेप्टा कहते है लागत तो दूर मजदूरी नही निकली।
मजदूर की ऐसे में खेती कैसे करें, इसलिए सरकार को अब  गिल्की का भी दाम तय करना चाहिए ताकि किसान को कम से कम लागत मिल सके।
वही किसान ने कहा कि 20 किलो का एक बॉक्स बनता है ऐसे गिल्की के 66 बॉक्स बनाकर हमने इंदौर बेचे।
एक बॉक्स 30 रुपए में बिका 66 बॉक्स के टोटल 1980 रुपए मिले है अब इन 66 बॉक्स को इंदौर लाने का खर्च 2850 रुपए भाड़ा लग गया। गिल्की भी गई और उल्टे जेब से भी 800 रुपए लग गए।
ऐसे में किसान क्या करे?
  जिससे किसान अब पूरी तरह से टूट गया है और पकी फसल खेत से फेंकने और पशुओं को खिलाने को मजबूर हो गया

*देखिए वीडियो क्या कह रहे हैं- विनोद सेप्टा(किसान)*.           

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