पुस्तक का लोकार्पण;हॉस्टल जीवन का ऐसा पड़ाव है जो ताउम्र जीवन को स्पन्दित करता है

इंदौर लेखिका संघ के मंच पर डॉ क्षिप्रा नत्थानी की पुस्तक" हॉस्टल डायरी"का लोकार्पण "
पुस्तक का लोकार्पण;हॉस्टल जीवन का ऐसा पड़ाव है जो ताउम्र जीवन को स्पन्दित करता है

मीडियावाला.इन।

डायरी लेखन व्यक्ति के द्वारा लिखा गया व्यक्तिगत अनुभव सोच और भावनाओं को लिखित रूप में अंकित एक संग्रह है।इंदौर लेखिका संघ के मंच पर 1 जुलाई "डॉ दिवस" के दिन आयुर्वेदिक ,पंचकर्म डॉ क्षिप्रा नत्थानीकी "हॉस्टल डायरी काऑनलाइन लोकार्पण  इन्दौर लेखिका संघ की संस्थापक अध्यक्ष डा.स्वाति तिवारी ,विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं डायरी विधा विशेषज्ञ शरद कोकास जी और  कार्यक्रम की मुख्य अतिथि  वरिष्ठ साहित्यिकार श्रीमती संतोष श्रीवास्तव के कर कमलों से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए चेतना भाटी जी ने स्वागत  उद्बोधन में  डॉ. क्षिप्रा नत्थानी को शुभकामना देते हुए कहा  "डायरी साहित्य की श्रेष्ठ विधा है । आज बच्चों को डायरी लेखन  प्रेरणा की विशेष आवश्यकता  है। आज बच्चे ऑनलाइन क्लासेज के कारण हस्त लेखन में बड़े कमजोर होते जा रहे हैं उनकी उंगलियां "की बोर्ड" पर तो खूब चलती हैं  लेकिन लिखने की आदत  छूटती  जा रही है।"
 ।युवावस्था में विद्यार्थी जीवन की यादें बड़ी रोचक होती है । छात्र जीवन  में लिखी डायरी एक ऐसा दस्तावेज होता है जो आगे के जीवन की नींव रखता है।  

कार्यक्रम का शुभारम्भ  संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ स्वाति तिवारी माँ सरस्वती को माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलित करके किया .

  वरिष्ठ साहित्यकार  डा. स्वाति तिवारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि "साहित्यिक डायरी में डायरी लेखन संबंध सीधे- सीधे लेखक के हृदय से होता है। उसके अपने व्यक्तिगत अनुभव ,विचारधारा,
समाज की वर्तमान परिस्थितियों का आकलन आदि  का  जो वर्णन होता है। उसका सार ही डायरी में संग्रहित है। यह डायरी  लेखन की विधा को पुनर्जीवित करती है .हॉस्टल जीवन का ऐसा पड़ाव है जो ताउम्र जीवन को स्पन्दित करता है। ऐसा ही दस्तावेज डॉ.क्षिप्रा नत्थानी द्वारा "हॉस्टल डायरी "में संग्रहित है।
   

   वरिष्ठ साहित्यकार श्री शरद कोकास जी ने कहा " डायरी में अकेलापन है फिर भी है उदासी भी है बर्थडे भी है किसी की शादी भी है कहीं शोर है तो कहीं सन्नाटा भी है । क्षिप्रा की डायरी वह है जिस के पन्नों पर कलम से अपनी वर्तमान जिंदगी का अक्स उतारा गया है ।शिप्रा की डायरी में दो संप्रत्यय हैं कि हॉस्टल और दूसरा डायरी अक्सर ये दोनों शब्द किसी के जीवन में आते ही नहीं है ।
     आयुर्वेदिक चिकित्सक डा.क्षिप्रा नत्थानी ने कहा "परिवार के सुरक्षित एवं अपनत्व से पूर्ण परिवेश से बाहर निकलकर हॉस्टल में कदम रखने पर हर समय होने वाली असुरक्षा खुद के बनाए पूर्वाग्रहों से बाहर निकलने की छटपटाहट और उसका नतीजा है "हॉस्टल डायरी "जिसे मेरी सहेलियों परिजनों ने मेरे सोचने समझने की संकुचित दायरे को विस्तार किया और माता-पिता सभी ने डायरी लिखने को मुझे प्रेरित किया। जीवन में एक बार हॉस्टल में रह कर वहाँ  के कटु अनुभवों का अवश्य अहसास करना चाहिए।

साहित्यिकार श्रीमती संतोष श्रीवास्तव ने कहा"डायरी लेखन एक खूबसूरत विधा है जिसको लिखकर हमारे मन का बोझ हल्का हो जाता है और खुद का मूल्यांकन भी कर सकते हैं। वर्तमान की डायरी हमारे भविष्य का साहित्य बन जाती है।"उन्होने डायरी लेखन की लुप्त होती हुई विधा पर भी प्रकाश डाला और डायरी के कुछ अंशों का भी  वाचन किया। 
जयपुर से बोधि प्रकाशन के संस्थापक एवं  प्रसिद्ध कवि श्री मृग माया ,उरई से समाजसेवी कवयित्री ,लेखिका एवं चिकित्सक डॉक्टर रेनू चंद्रा, सेवानिवृत्त जनसंपर्क अधिकारी श्री सुभाष चन्द्र अरोड़ा ,लेखिका सोनू यशराज एवं  बरखा ठाकुर की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम को शोभायमान  बनाया। इस आयोजन में  लोक कलाकार वन्दिता श्रीवास्तव द्वारा निर्मित चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया .कार्यक्रम में संस्था के सदस्यों ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों का भी उल्लेख किया .

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए सुषमा व्यास ने लेखिका  क्षिप्रा  नत्थानी का परिचय देते हुए कहा पुस्तक एक बैठक में  पढ़ी जाने का आनंद देती है .और उन्होंने  संस्था  इंदौर लेखिका संघ की जानकारी भी  दी .
बोधि प्रकाशन जयपुर के संस्थापक श्री माया मृग ने कहा "यह हॉस्टल में घटित घटनाओं का केवल ब्यौरा नहीं है बल्कि यह  संस्मरण की  वह पुस्तक है जो किसी स्त्री के मन में सवाल उठते रहते हैं  ,उम्र के हर पड़ाव पर स्त्री चरित्र को  या भेदभाव को  लेकर ।पुस्तक की सार्थकता है कि पाठक अपने बचपन के जीवन में लौटता है उन  स्वर्णिम स्मृतियों में जिन्हें पीछे  छोड़ आये हैं उसके पुराने दिन आने वाले जीवन का आधार बनते हैं '"
पुस्तक का आवरण डॉ क्षिप्रा नत्थानी के पिता मूर्तिकार श्री सुभाष अरोड़ा ने कलात्मकता से सजाया और अंदर के पृष्ठ पर मांँ राजबाला ने हॉस्टल का चित्र रेखांकन किया।
कार्यक्रम में इंदौर लेखिका संघ की सदस्य डॉ. अंजुल कंसल, शोभा रानी तिवारी ,नीति अग्निहोत्री ,वंदना पुणतांबेकर ,आशा जाकड़ ,डॉ सुधा चौहान ,मंजुला भूतड़ा , मुन्नी गर्ग , शारदा मिश्रा ,मीना गोदरे , दविंदर कौर ,वंदिता श्रीवास्तव ,संध्या राय चौधरी ,रानी नारंग, हेमलता शर्मा ,
डॉ पुष्पा रानी गर्ग एवं सुनीता श्रीवास्तव आदि ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। सुषमा व्यास ने अपने मधुर व कुशल संचालन से सभी साहित्यकारों को बाँध कर रखा और आभार लेखिका संघ की सचिव  श्रीमती विनीता तिवारी ने माना।

0 comments      

Add Comment