मप्र में फिर बाहर आने को है 'व्यापम'घोटाला

मप्र में फिर बाहर आने को है 'व्यापम'घोटाला

मीडियावाला.इन।

भोपाल, 23 जुलाई | मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आने को है।

इस घोटाले का खुलासा करने वाली 'गुमनाम चिट्ठी' के गायब होने के मामले ने सियासत तो गरमा ही दी है, उन लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है जो अपरोक्ष रूप से इस घोटाले से जुड़े हुए हैं और उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पूर्ववर्ती सरकार लगातार इस बात का जिक्र करती रही है कि वर्ष 2013 में एक गुमनाम पत्र से मिली जानकारी के बाद ही सरकार के निर्देश पर पुलिस ने इस मामले का खुलासा किया। मगर मौजूदा सरकार के गृहमंत्री बाला बच्चन ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि विभाग के पास व्यापम मामले को लेकर कोई गुमनाम चिट्ठी है ही नहीं। उस चिट्ठी को विभागीय स्तर पर खोजा गया, मगर नहीं मिली। जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 21 जुलाई, 2014 को विधानसभा में गुमनाम चिट्ठी के आधार पर कार्रवाई की बात कही थी।

संवाददाताओं ने मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज से जब गुमनाम चिट्ठी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि वह पहले कई बार यह बात कह चुके हैं कि गुमनाम चिट्ठी मिली थी, जिसमें फर्जी छात्रों के परीक्षा में बैठने की बात कही गई थी और उसी के आधार पर यह मामला खुला था।

उन्होंने पूछे गए सवाल का जवाब न देते हुए कहा, "वर्तमान सरकार को जो करना है करे, यह सरकार जनता के काम तो कर नहीं रही है, बल्कि लूट में सब लगे हैं।"

व्यापम में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा 7 जुलाई, 2013 को पहली बार पीएमटी परीक्षा के दौरान तब हुआ था, जब एक गिरोह इंदौर की अपराध जांच शाखा की गिरफ्त में आया। यह गिरोह पीएमटी परीक्षा में फर्जी विद्याíथयों को बैठाने का काम करता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज ने इस मामले को अगस्त, 2013 में एसटीएफ को सौंप दिया था।

इस मामले पर बाद में उच्च न्यायालय संज्ञान लिया और उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूíत चंद्रेश भूषण की अध्यक्षता में अप्रैल, 2014 में एसआईटी गठित की गई थी, जिसकी देखरेख में एसटीएफ जांच करता रहा। 9 जुलाई, 2015 को मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला हुआ और 15 जुलाई, 2015 से सीबीआई ने जांच शुरू की। सीबीआई जांच अब भी जारी है।

व्यापम ऐसा मामला है, जिससे जुड़े लगभग 50 लोगों की मौत हो चुकी है। इन मौतों के रहस्य का पता लगाने दिल्ली से आए एक न्यूज चैनल के खोजी पत्रकार अक्षय सिंह की भी मौत हो गई। इस मसले को कांग्रेस ने विधानसभा में बड़ा मुद्दा बनाया था। साथ ही सत्ता में आने पर दोषियों पर कार्रवाई का वाद किया था।

व्यापम द्वारा आयोजित की जाने वाली पीएमटी प्रवेश परीक्षा के घोटाले में 1450 छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए और परिजनों को भी आरोपी बनाया गया। लगभग 3000 लोगों को आरोपी बनाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर कहा था कि यह घोटाला पीएमटी परीक्षा तक सीमित नहीं है, जबकि नौकारी में भर्ती के लिए व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षाओं में भी घोटाला हुआ। वर्तमान में फर्जी तरीके से चयनित लोग नौकारी कर रहे हैं। अभ्यर्थियों को आरोपी नहीं, बल्कि सरकारी गवाह बनाया जाना चाहिए।

व्यापम के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कांग्रेस नेता और प्रवक्ता के.के. मिश्रा के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने मानहानि का मामला दर्ज कराया गया था, जिस पर उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी। मिश्रा बाद में सर्वोच्च न्यायालय से बरी हुए।

मिश्रा का आरोप है कि व्यापम घोटाले से जुड़े दस्तावेज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज और उनसे जुड़े लोगों ने गायब कराए हैं। इतना ही नहीं, सीएम हाउस से अधिकारियों को किए गए फोन की कॉल डिटेल रिपोर्ट भी गायब है, जिसमें तत्कालीन डीजीपी की भूमिका संदिग्ध है।

जानकारों का कहना है कि व्यापम घोटाले से राजनीतिक रसूखदार हस्तियों का नाता रहा है। यह बात अलग है कि इस मामले में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, सुधीर शर्मा, तत्कालीन राज्यपाल के पुत्र धनंजय यादव, व्यापम के नियंत्रक रहे पंकज त्रिवेदी, कंप्यूटर एनालिस्ट नितिन मोहिद्रा जेल जा चुके हैं। अगर इस मामले की नए सिरे से जांच होती है तो कई और लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। कांग्रेस के भीतर से इस मामले की नए सिरे से जांच कराए जाने की मांग उठ रही है। यह बात अलग है कि कांग्रेस के कई नेता भी इस घोटाले से जुड़े हुए हैं।

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