केरवा और कलियासोत डैम के आसपास पर्यावरण और जलस्त्रोत को भू माफियाओं से बचाने कड़ा रूख

- राजधानी के जलाशय बचाने NGT हुआ सख्त, वेटलैंड प्राधिकरण को सीमांकन के लिए दो महीने का समय

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केरवा और कलियासोत डैम के आसपास पर्यावरण और जलस्त्रोत को भू माफियाओं से बचाने कड़ा रूख

भोपाल।  राजधानी के बड़े जलस्त्रोत बड़े तालाब, शाहपुरा, केरवा, कलियासोत सहित अन्य स्थानों पर लगातार भूमाफियाओं के कब्जे होते जा रहे हैं। ऐसे में लगातार जलस्त्रोतों को बचाने के लिए पर्यावरणविद् राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की शरण में पहुंच रहे हैं। लगातार शिकायतों के बाद हाल ही में कलियासोत डैम और नदी को संरक्षित करने के लिए एनजीटी ने बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सरकार के सीएस को भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें कलियासोत नदी और भोज वेटलैंड क्षेत्र में 97 अवैध निर्माणों को नहीं हटाने पर फटकार लगाई। इसी तरह, अब केरवा डैम के जलग्रहण क्षेत्र में मिट्टी भराव और ठोस अपशिष्ट फेंकने पर नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त आदेश दिए गए हैं।

निजी भूमि भी है, लेकिन पर्यावरण को नहीं पहुंचा सकते हैं नुकसान

केरवा और कलियासोत डैम क्षेत्र में भू-माफियाओं द्वारा किए जा रहे सुनियोजित अतिक्रमण पर NGT ने कड़ा प्रहार किया है।

NGT ने स्पष्ट कर दिया है कि वहां की भूमि भले ही निजी हो, लेकिन यदि उस पर होने वाली गतिविधियां जलाशय, वेटलैंड या जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र को नुकसान पहुंचाती हैं, तो उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। एनजीटी ने यह रुख पर्यावरण कार्यकर्ता रशीद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपनाया। इस याचिका के जरिए एनजीटी को बताया गया था कि महुआखेड़ा क्षेत्र में केरवा डैम के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) के भीतर 2000 से अधिक डंपरों के माध्यम से अवैध मिट्टी, कोपरा और मुरम डाली गई है। इस भराव का मुख्य उद्देश्य जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र को समतल कर भविष्य में कॉलोनी काटना और अवैध निर्माण करना था।

जल पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा

मामला सामने आने के बाद एनजीटी ने अधिकारियों की एक संयुक्त समिति को जांच सौंपी थी। इस संयुक्त समिति की जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर 10 फीट ऊंची मिट्टी की परत बिछाकर जलाशय की जल भंडारण क्षमता और जल पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा पैदा किया गया है। इस समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद एनजीटी की भोपाल बेंच ने सख्ती का आदेश जारी किया है। एनजीटी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पेट्रोलिंग और सीमांकन अनिवार्य

एनजीटी ने कहा है कि जल संसाधन विभाग को महीने में कम से कम दो बार क्षेत्र में गश्त करनी होगी, ताकि भविष्य में डंपिंग रुक सके। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को केरवा डैम के आसपास के प्रभाव क्षेत्र की पहचान और सीमांकन का कार्य दो महीने में पूरा करना होगा। एनजीटी ने साफ किया कि 33 मीटर के बफर जोन का उल्लंघन करने वाले भू-स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई विधिसम्मत है और उन्हें अवैध मलबा हटाना ही होगा।

कलेक्टर को सौंपा पेड़ लगवाने का काम

एनजीटी ने कलेक्टर और पंचायत अधिकारियों को कैचमेंट क्षेत्र से अवैध कब्जे हटाने के लिए कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा है कि वे इस क्षेत्र में पेड़ लगाने और मिट्टी बचाने का भी काम करें, ताकि डैम लंबे समय तक सुरक्षित रहे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सतत निगरानी के लिए निर्देशित किया गया है।