Suicide or conspiracy? रोशनी के मोबाइल से मिला सुसाइड नोट जैसा मैसेज, लेकिन अंतिम सच बताएगी FSL रिपोर्ट

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Suicide or conspiracy? रोशनी के मोबाइल से मिला सुसाइड नोट जैसा मैसेज, लेकिन अंतिम सच बताएगी FSL रिपोर्ट

भोपाल: भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज में MBBS 1st Year की छात्रा रोशनी कलेश की 10 फरवरी को हुई संदिग्ध मौत का मामला अब केवल आत्महत्या की थ्योरी तक सीमित नहीं रहा है। शुरुआती स्तर पर पुलिस ने इसे सुसाइड बताया था, लेकिन परिवार, साथी छात्रों और सामाजिक संगठनों ने जांच की दिशा और परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला अब पूरी तरह फॉरेंसिक जांच के दायरे में है और पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने की बात कह रही है।

*● मोबाइल फोन से मिला सुसाइड नोट, डिलीट डेटा रिकवरी*

जांच के दौरान पुलिस ने छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर तकनीकी परीक्षण कराया। डिलीट डेटा रिकवरी प्रक्रिया के दौरान एक सुसाइड नोट जैसा मैसेज सामने आया है। पुलिस के अनुसार यह नोट मोबाइल के नोटपैड में लिखा गया था और बाद में खुद को व्हाट्सएप पर भेजा गया था। इसके बाद उसे डिलीट कर दिया गया, जिसे तकनीकी टीम ने रिकवर किया।

सुसाइड नोट में पढ़ाई के दबाव, पारिवारिक अपेक्षाओं और मानसिक तनाव का उल्लेख बताया जा रहा है। छात्रा ने माता-पिता से माफी मांगते हुए जिम्मेदारियों का जिक्र किया है। हालांकि नोट में किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार ठहराने या मौत के तरीके का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

पुलिस ने मोबाइल और नोट को फॉरेंसिक साइंस लैब भेज दिया है। एफएसएल यह जांच करेगी कि नोट वास्तव में किस समय लिखा गया, क्या उसमें बाद में कोई एडिटिंग हुई, क्या टाइम स्टैम्प से छेड़छाड़ की गई, तथा फोन के डेटा में किसी प्रकार की बाहरी हस्तक्षेप की संभावना तो नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट से पहले इस नोट को निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।

*● कॉल डिटेल, सीसीटीवी और डिजिटल ट्रेल की जांच*

जांच एजेंसियां कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, इंटरनेट एक्टिविटी, व्हाट्सएप चैट, तथा सीसीटीवी फुटेज की भी गहन जांच कर रही हैं। यह देखा जा रहा है कि मौत से पहले छात्रा किन लोगों के संपर्क में थी, आखिरी कॉल किसे किया गया, और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियां क्या थीं। डिजिटल ट्रेल से घटना की टाइमलाइन तैयार की जा रही है ताकि वास्तविक घटनाक्रम स्पष्ट हो सके।

*● कोहेफिजा थाना की कार्रवाई पर विवाद*

घटना के बाद कोहेफिजा थाना पुलिस ने देर रात छात्राओं के हॉस्टल में पहुंचकर रूममेट्स से पूछताछ की थी। इस कार्रवाई को लेकर छात्रों में आक्रोश देखा गया। छात्रों का आरोप है कि पूछताछ का तरीका संवेदनशील नहीं था और इससे मानसिक दबाव बना। वहीं पुलिस का पक्ष है कि महिला अधिकारी की उपस्थिति में विधिसम्मत कार्रवाई की गई और जांच के लिए आवश्यक पूछताछ की गई।

*● परिवार और सामाजिक संगठनों की आपत्ति*

परिजन का कहना है कि घटनास्थल की परिस्थितियां आत्महत्या की ओर संकेत नहीं करतीं। बाथरूम में शव मिलने, एसिड की बोतल बरामद होने, तथा आसपास के साक्ष्यों को लेकर कई प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं। परिवार का आरोप है कि शुरुआती जांच में कई पहलुओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। मामले को लेकर भोपाल और अलीराजपुर में नाराजगी है । रोशनी के दोस्तों ने भोपाल में प्रदर्शन किया है वही अलीराजपुर में भी बड़ी तादाद में धरना देकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अलीराजपुर और भोपाल में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन कर न्याय की मांग की है।

*● सियासी हलचल तेज*

मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। अलीराजपुर विधायक एवं मध्य प्रदेश शासन में कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर और मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रश्न लगाकर सरकार से जवाब मांगा है।

*● सुसाइड थ्योरी पर सवाल*

परिवार और कुछ छात्र नेताओं का कहना है कि यदि यह आत्महत्या है तो घटनास्थल की परिस्थितियां और बरामद सामग्री कई संदेह पैदा करती हैं। उनका तर्क है कि जब तक वैज्ञानिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

*● अंतिम सच का इंतजार*

रोशनी कलेश की मौत अब केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं, बल्कि छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बन चुकी है। एक ओर मोबाइल से मिला सुसाइड नोट आत्महत्या की ओर संकेत करता है, तो दूसरी ओर घटनास्थल की परिस्थितियां और परिवार द्वारा उठाए गए सवाल संदेह को समाप्त नहीं होने देते।

अब पूरा मामला एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों पर टिका है। जब तक वैज्ञानिक जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं होते, तब तक “सुसाइड या साजिश” का प्रश्न बना रहेगा। परिवार न्याय की प्रतीक्षा में है और समाज पारदर्शी व निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाए हुए है।