
रविवारीय गपशप : जनसुनवाई: नए प्रयोग का बेरोजगार दिव्यांगों को ऐसे मिला लाभ
आनंद शर्मा
मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों में प्रति मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई आम जनता की तकलीफों के निराकरण में कई बार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है , इससे कलेक्टर न केवल जनता की तकलीफों से सीधे रूबरू होते हैं , बल्कि कई बार इससे नए प्रयोग भी सामने आते हैं।
इस संबंध में एक पुरानी घटना याद आ रही है । उनदिनों मैं राजगढ़ जिले में कलेक्टर था । राजगढ़ जैसे जिले में जनसुनवाई की व्यवस्था को हमने एक नया रूप दिया था । यहाँ आने वाले आवेदकों की समस्याओं के बारे में निःशुल्क आवेदन लिखने का काम युवा विद्यार्थी किया करते थे । इस सुनवायी की एक और विशेषता ये थी कि युवा विद्यार्थी यदि यह पाते कि समस्या गंभीर है तो वे आवेदन पर अपनी ओर से स्टार बना देते जिसका अर्थ ये था कि इसे कलेक्टर स्वयं सुनेंगे ।
एक दिन मंगलवार को सुबह ऐसी ही एक दरख्वास्त के साथ जब दो विकलांग नवयुवक संजय और कुशल सिंग मेरे समक्ष उपस्थित हुए और सरकारी नौकरी में विकलांगों के लिए आरक्षण को लागू न करने की शिकायत की तो मैंने अपने आप को बड़ा विवश पाया क्योंकि सरकारी नौकरी में आरक्षण का अनुपात तय करना सरकारी विभागों का काम था और किसी भी बेरोजगार को नौकरी देना कलेक्टर के हाथ में नहीं होता। आखिर बिना प्रतियोगी परीक्षा पास किये किसी को नौकरी कैसे मिल सकती थी ? पर विवश होकर बैठने से क्या होता । इस आवेदन पर स्टार का चिह्न किसी युवा विद्यार्थी ने न जाने किस आशा से अंकित किया होगा ।
मैंने इसका एक उपाय सोचा , जिले में समग्र के डाटा से ब्लॉक वार ऐसे विकलांग युवकों को छांटा जो उम्र और काबिलियत में प्रतियोगी परीक्षाओं के लायक थे , फिर सीईओ जनपद पंचायतों के माध्यम से ब्लाक मुख्यालय पर उपस्थित हुए युवक-युवतियों की एक परीक्षा के द्वारा स्क्रीनिंग की गयी और कुल 100 अभ्यर्थियों को राजगढ़ बुलाया । जिला स्तर पर पुनः स्क्रीनिंग की गयी जिसमें 42 बच्चे इस योग्य पाए गए कि उन्हें प्रशिक्षित किया जा सकता है । अब दो प्रश्न थे , एक तो ये कि उनका खाना रहना कहाँ होगा और दूसरा इनका प्रशिक्षण कैसे करेंगे ? जिले में लीड बैंक की संस्था आर सेटी नामक संस्था थी जो शासकीय ट्रेनिंग इकाई थी और जिसका मुख्य काम स्वरोजगार के लिए इक्छुक लोगों को धंधे की बारीकियां समझाना था । इसी संस्था के कर्मशील मेनेजर श्री जैन ने 45 दिन का कोर्स डिजाइन किया और जिले मैं मौजूद नवजवान अधिकारियों सहित , उनदिनों दैनिक भास्कर के पत्रकार सत्येन्द्र ने भी इन विकलांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी ली । निशुल्क रहने खाने की व्यवस्था की बात आई तो हमारे एसडीएम रामप्रकाश ने कहा कि ओबीसी विभाग से संबंधित नया हॉस्टल तैयार हो चुका है जिसमें खाने के लिए खाने और ठहरने का इंतिजाम हो सकता है , जो कुछ भोजन सामग्री की जरूरत थी वो पंचायत और समाज कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर श्री बाघ ने पूरी कर दी साथ ही साथ इनके लिए प्रतियोगी परीक्षा के फॉर्म भी समाज कल्याण विभाग के सौजन्य से श्री बाघ ने भरवाए ।
45 दिन की ट्रेनिंग के बाद ये युवक युवती बड़े उत्साह से लबरेज़ विदा हुए । और फिर कमाल हुआ , ट्रेनिंग समाप्त हुए अभी कुल जमा तीस दिन ही हुए थे कि इनमे से 8 युवक योजना आर्थिक सांख्यकी विभाग में प्रगणक और सर्वेयर के पद पर सेलेक्ट हो गए और 10 युवक प्रतीक्षा सूचि में आए । सबसे बड़ा आश्चर्य ये था ये बच्चे सामान्य कोटे से चयनित हुए थे , विकलांगों के लिए रिजर्व कोटे से नहीं । कालांतर में उनमे से कुछ पटवारी परीक्षा में और कुछ पीएससी की परीक्षाओं तक पहुँचे । मुझे ये इत्मीनान हो गया था कि अब इनके अंदर एक आत्मविश्वास ने जन्म ले लिया है ।





