
रविवारीय गपशप:भगवान श्री कृष्ण के पोते और बाणासुर की बेटी की लव स्टोरी, जो बनी युद्ध का कारण!
आनंद शर्मा
अगले माह हमारे देश के जिन पाँच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं , असम भी उनमें से एक है । एसआईआर की प्रक्रिया के चलते इन चुनावों के नतीजों पर पूरे देश की निगाहें होंगी । हमारे प्रशासन और पुलिस महकमे के साथी ऑब्ज़र्वर के रूप में इन राज्यों में पहुँच गए हैं , और उनकी भूमिका भी बड़ी महत्वपूर्ण रहने वाली है ।

कई बरस पहले मैं भी विधान सभा के इन चुनावों में असम गया था । असम की राजधानी से लगा हुआ जिला कामरूप (गोहाटी ) देहात के सबडिवीजन रंगिया में मुझे ऑब्जर्वर बनाया गया था । रंगिया वो जगह थी जहाँ उग्रवादी आंदोलन पहले हुए थे , इस नाते ये संवेदनशील विधानसभा की सूची में था ।
ऑब्जर्वर की ड्यूटी में जो सबसे अच्छी बात मुझे लगी वो ये थी कि इसमें हमें महीनों इन राज्यों में रहना होता है , सो काम के साथ साथ इन नई जगहों की सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों से भी दो चार होने का मौका मिलता है , जो बड़ा दिलचस्प और आकर्षक होता है ।

रंगिया में पहुँचते ही एक मज़ेदार वाक़या हुआ । हुआ यूँ कि जब मैं भोजन के लिए बैठा तो खाने में रोटी नहीं थी बस चावल था । मैंने रोटी के बारे में पूछा तो तो रसोइए ने कहा “ साहब खाने में तो हम चावल ही खाते हैं । “ मैंने कहा भाई मुझे तो खाने में रोटी लगेगी और भी गेंहू के आटे की ।” दूसरे दिन सुबह नाश्ता आया तो चाय के साथ रोटी थी , मैंने रसोइये को बुलाया और पूछा ये क्या , सुबह से रोटी ? रसोइये ने मासूमियत से कहा साहब यहाँ चाय के साथ रोटी खाते हैं । बहरहाल मैंने लायजन अफ़सर को बुलाकर समझाया तब कहीं सुबह और शाम के खाने में रोटी शामिल होने लगी ।

मतदान सम्पन्न हो जाने के बाद मतगणना में तीन दिन का वक़्त था । बीच की अवधि में करने को कुछ नहीं था , तो रंगिया के एसडीएम कार्तिकेय ने जो 2009 बैच का नवजवान अफसर था , ने सुझाव दिया कि आप तेजपुर जा सकते हो , जो गोहाटी से लगा हुआ ही है और सचमुच तेजपुर ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोण से बड़ा दिलचस्प और खूब सूरत शहर निकला ।

तेजपुर जाने में आपको भारत की एक मात्र पुरुष नद ब्रम्हपुत्र के ऊपर लगभग तीन किलोमीटर लम्बे पुल (जो भारत के सबसे लम्बे दस पुलों में शामिल है ) को पार करना होता है । तेजपुर को प्राकृतिक सुंदरता के अलावा , रोमांटिक सिटी के रूप में भी जाना जाता है और अनेक असमिया फ़िल्मों की शूटिंग यहाँ होती रहती हैं ।
तेज़पुर शहर के नाम का अर्थ अंग्रेज़ी के शब्दानुवाद के अनुसार “फ़ास्ट सिटी “ नहीं है बल्कि असमिया भाषा में तेज़ का अर्थ है रक्त या खून और ये खून यहाँ हज़ारों बरस पहले इसलिए बहा था क्योंकि हरिहर का युद्ध यहाँ हुआ था ( हरी याने विष्णु और हर यानि शिव ) ।
कहते हैं ये शहर बाणासुर की राजधानी था , और उसकी बेटी थी उषा , जो निहायत ही खूबसूरत थी ( रति का अवतार ) और अनिरुद्ध था श्रीकृष्ण का पोता जो कामदेव का स्वरूप था । उषा ने उसे स्वप्न में देखा और इश्क़ कर बैठी , जाहिर है अनिरुद्ध भी उसे देख के सुध बुध खो बैठा और ये जानते हुए भी कि बाणासुर एक शिवभक्त और परम प्रतापी राजा है , उसकी बेटी से चोरी छुपे मिलने पहुँच गया । बाणासुर को अपनी बेटी के प्रेम के बारे में पता चल चुका था और उसने उसे अग्निगढ नामक ऐसे स्थान पर सुरक्षित रख रखा था जहाँ चारो ओर अग्नि जलती थी , पर हर युग की तरह यहाँ भी प्रेमियों को मिलने से ये आग रोक नहीं पाई और हर युग की तरह बाणासुर ने इन्हे मिलते हुए पकड़ लिया और अनिरुद्ध को कैद कर लिया।
श्रीकृष्ण को पता चलने पर वे पोते को छुड़ाने सेना लेकर आ गए पर बाणासुर तो शिवभक्त था , उसके राज्य की सुरक्षा स्वयं शिव के हाथ थी सो स्वयं भगवान शंकर अपने भक्त की रक्षा के लिए आ डटे । दोनों में बड़ा भीषण युद्ध हुआ और बीचबचाव करने ब्रम्हा को आना पड़ा जिन्होंने आकर दोनों को प्रारब्ध और पूर्वजन्म की कथासार से समझाया और अनिरुद्ध और उषा का विवाह हुआ ।
संयोग से भारतीय पौराणिक प्रेम कहानियां सुखांत ही हैं और इसी कथा से ये शहर रोमांटिक शहर कहलाता है । मुझे लगता है ये पौराणिक गाथाएं हमें यह भी बताती हैं कि प्राचीन काल से ही हमारा देश तो एक ही था क्योंकि कृष्ण तो द्वारका जा बसे थे और ठेठ पश्चिम का कोई राजकुमार ठेठ पूरब की राजकुमारी से इश्क़ कर बैठे तो इसका अर्थ तो यही हुआ कि एक भौगोलिक साँचा तो स्थापित था ही ।
तो इस गपशप के साथ कुछ पुरानी तस्वीर भी है , अग्नि गढ़ में स्थापित चम्पा के वृक्ष के समक्ष जिसे असमिया भाषा में गूलन कहते हैं ।





