
Supreme Court on Bhojshala: भोजशाला मे एक ही दिन पूजा और नमाज पर टिकी देश की नजर
▪️ डॉ बिट्टो जोशी▪️
New Delhi-Dhar: मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर वर्षों से चला आ रहा संवेदनशील विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया है। वजह है बसंत पंचमी और शुक्रवार की जुम्मे की नमाज का एक ही दिन पड़ना, जिसने सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में बेचैनी और सतर्कता दोनों बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए एक अहम और संतुलित आदेश पारित किया है, जिसने न केवल दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों को स्पष्ट किया है, बल्कि प्रशासन के सामने शांति बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी रख दी है।
● कोर्ट का अहम आदेश, समयबद्ध पूजा और नमाज की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भोजशाला परिसर में हिंदू समुदाय को बसंत पंचमी के अवसर पर सुबह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना की अनुमति होगी। वहीं मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की जुम्मे की नमाज के लिए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय दिया गया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले लोगों की सूची पहले से जिला प्रशासन को सौंपी जाए, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति न बने।
● समय विभाजन के जरिए संतुलन साधने की कोशिश
शीर्ष अदालत के इस निर्णय को धार्मिक संतुलन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि धार्मिक स्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे कानून व्यवस्था पर कोई आंच न आए। आदेश का मूल उद्देश्य यह है कि दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन सम्मान और संयम के साथ कर सकें।
● दशकों पुराना विवाद, आस्था और इतिहास की टकराहट
भोजशाला विवाद कोई नया नहीं है। हिंदू समाज इस स्थल को देवी सरस्वती की प्राचीन आराधना स्थली मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। दोनों पक्षों के अपने-अपने ऐतिहासिक और धार्मिक तर्क रहे हैं। यही कारण है कि यह मामला वर्षों से अदालतों, प्रशासन और समाज के बीच बहस का विषय बना हुआ है।
● बसंत पंचमी और जुम्मे की नमाज का संयोग बना कारण
इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने से स्थिति और संवेदनशील हो गई। हिंदू समाज की ओर से पूरे दिन पूजा की मांग की गई, जबकि मुस्लिम पक्ष ने जुम्मे की नमाज में किसी तरह की बाधा न आने की बात रखी। दोनों पक्षों की याचिकाओं और दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय निर्धारित कर व्यावहारिक समाधान निकाला।
● धार बना छावनी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन का फोकस स्पष्ट है कि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हों।
● शांति बनाए रखने की अपील, माहौल पर नजर
सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी दोनों समुदायों से संयम और सहयोग की अपील की जा रही है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि अफवाहों, उकसावे या किसी भी तरह के तनाव को समय रहते रोका जा सके।
● पूरे प्रदेश की नजरें धार पर
भोजशाला को लेकर आया यह फैसला केवल धार तक सीमित नहीं है। इसे धार्मिक सहअस्तित्व, न्यायिक संतुलन और प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले घंटों में धार का घटनाक्रम यह तय करेगा कि संवेदनशील मुद्दों पर कानून और समाज के बीच संतुलन किस तरह कायम रहता है।





