टंट्या मामा प्रतिमा बहुचर्चित विवाद का पटाक्षेप: फाइबर हटी, 570 किलो की धातु प्रतिमा स्थापित

34

टंट्या मामा प्रतिमा बहुचर्चित विवाद का पटाक्षेप: फाइबर हटी, 570 किलो की धातु प्रतिमा स्थापित

खरगोन : मध्य प्रदेश के खरगोन में जनजातीय क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। बुधवार को नगर पालिका परिषद की टीम ने बिस्टान रोड तिराहे पर लगी विवादित फाइबर (एफआरपी) प्रतिमा को हटाकर रात को उसकी जगह नई धातु की प्रतिमा स्थापित कर दी। इस पूरी प्रक्रिया में नपा अमले को घंटों मशक्कत करनी पड़ी।

IMG 20260402 WA0015 scaled

जानकारी के अनुसार, दोपहर में पुरानी प्रतिमा हटाने का काम शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा। प्रतिमा का बेस काफी मजबूत होने के कारण उसे हटाने में कर्मचारियों को तेज धूप में कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इसके बाद शाम होते-होते नई प्रतिमा को स्थापित करने का कार्य शुरू किया गया, जिसे रात तक पूरा कर लिया गया।

नगर पालिका परिषद की सीएमओ कमला कौल ने बताया कि ग्वालियर से तैयार होकर आई नई धातु की प्रतिमा का वजन लगभग 570 किलोग्राम है और इसे करीब 10 लाख रुपए की लागत से बनवाया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि पहले ही प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम हो चुका था, इसलिए इस बार औपचारिक कार्यक्रम के बिना सीधे स्थापना की गई।

 

सीएमओ के मुताबिक, पूर्व में लगाई गई फाइबर की प्रतिमा को लेकर विवाद के बाद संबंधित ठेकेदार ने उसे दान स्वरूप छोड़ दिया था, इसलिए उसे कोई भुगतान नहीं किया गया। अब उस पुरानी प्रतिमा को परिषद की मंशा के अनुसार किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाएगा।

IMG 20260402 WA0013

उल्लेखनीय है कि नगर पालिका की प्रेसिडेंट इन काउंसिल (पीआईसी) ने 24 सितंबर की बैठक में धातु या संगमरमर की प्रतिमा लगाने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद 15 नवंबर, जनजातीय गौरव दिवस पर निर्धारित मानकों के विपरीत फाइबर की प्रतिमा स्थापित कर उसका लोकार्पण कर दिया गया था। जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ, तो प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में इसकी आलोचना हुई और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रतिमा के भौतिक सत्यापन में इंजीनियरों द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गई थी, जिसके चलते दो इंजीनियरों पर कार्रवाई भी की गई। साथ ही ठेकेदार को भी ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था। वहीं, फाइबर प्रतिमा लगाने वाली कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग अब भी उठ रही है

नपा अधिकारियों के अनुसार, इस बार पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए ई-टेंडर के माध्यम से ग्वालियर की कंपनी को कार्यादेश दिया गया। लघु उद्योग निगम से टेस्ट रिपोर्ट मिलने के बाद ही नई प्रतिमा स्थापित की गई। अधिकारियों की मौजूदगी में प्रतिमा का भौतिक सत्यापन भी कराया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं, हालांकि नई प्रतिमा की स्थापना के साथ ही प्रशासन इस विवाद को समाप्त मान रहा है।