Temple Accident:  मंदिर हादसा कई लापरवाही का नतीजा, अफसरों की नजरअंदाजी महंगी पड़ी!  

राजनीतिक दबाव में नोटिसों पर कार्रवाई नहीं, बावड़ी के पास ही भाजपा पार्षद का कार्यालय!

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Temple Accident:  मंदिर हादसा कई लापरवाही का नतीजा, अफसरों की नजरअंदाजी महंगी पड़ी!

Indore : स्नेह नगर के मंदिर की बावड़ी की छत गिरने से उसमें हवन कर रहे 45-50 लोग गिर गए। इस हादसे का कारण नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही माना जा रहा है। बावड़ी के ऊपर मंदिर अवैध तरीके से बनाया गया था। लेकिन, शिकायत के बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे थे। बताया गया कि राजनीतिक दबाव सबसे बड़ा कारण था। इस कारण ये बड़ा हादसा हुआ।

बताया जा रहा है कि जहां पर बावड़ी थी, उसके पास ही कमरा भाजपा के एक पार्षद का कार्यालय है। करीब डेढ़ साल पहले आप-पास के रहवासियों ने नगर निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल को एक लिखित शिकायत दी थी। कहा गया था कि ये बावड़ी अवैध है, इससे कभी भी हादसा हो सकता है, इसके बाद भी न तो कमिश्नर ने और न किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इसकी तरफ ध्यान दिया।

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स्थानीय लोगों की शिकायत को नजर अंदाज कर दिया गया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि यह हादसा हुआ। मामले को लेकर बरती गई लापरवाही पर सरकार पर सख्त एक्शन ले सकता है। प्रशासन के आला अफसरों ने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की रिपोर्ट मांगी है।

बावड़ी का भराव किए बिना छत बनाई

इलाके के लोगों ने खुलासा किया है कि मंदिर प्रबंधन ने इस बावड़ी का भराव किए बिना ही ऊपर गर्डर और फर्शियां डाल दीं। उसके बाद टाइल्स लगा दी। मंदिर आने वाले अधिकांश लोगों को इस बात की कोई जानकारी ही नहीं थी, कि वे जहां खड़े होकर भगवान के दर्शन और हवन-पूजन करते हैं, उसके नीचे 40 फ़ीट से ज्यादा गहरी बावड़ी है।

मंदिर के नीचे जमीन खोखली

बताया गया कि मंदिर पुराना है। यह पहले बहुत छोटा था। करीब 20 से 25 साल पहले इसके विस्तार की योजना बनाई और बावड़ी बंद करने का फैसला किया गया। ट्रस्ट ने बावड़ी का भराव नहीं किया और सिर्फ सरिए डालकर ऊपर से स्लैब डाल दी। इस पर टाइल्स लगवा दी गईं। यानी जहां लोग रोज दर्शन के लिए खड़े हो रहे थे, वहां नीचे जमीन खोखली थी। यहीं पर रामनवमी पर आरती के दौरान भीड़ जुटने से हादसा हुआ।

करीब 20-25 साल पहले जिस बावड़ी का भराव किए बिना पर मंदिर का फर्श बना दिया गया था, उसी के पास दो साल पहले नए मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया गया। नगर निगम ने इस अवैध निर्माण पर आपत्ति तो ली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते रहे। जानकारों का मानना है कि मानना है कि बावड़ी के पास नए निर्माण की खुदाई के कारण भी बावड़ी की दीवार कमजोर हुई होंगी, जिससे ज्यादा भार होने पर छत धंस गई और ये हादसा हुआ।

मिट्‌टी धंसने की भी आशंका

बावड़ी बरसों पुरानी है और इसका ज्यादातर हिस्सा कच्चा है। यही मिट्‌टी धंसने की भी आशंका है। इसके अलावा बरसों से पूरी तरह ढंका होने से उस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पास में पिछले साल निर्माण शुरू करने से बावड़ी में चूहों को घुसने का रास्ता मिल गया। नए निर्माण के लिए गेंती, कुदाली चलाए जाने से भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई रही है।

ये भी कहा जा रहा है कि नगर निगम ने बावड़ी को लेकर कभी नोटिस दिया ही नहीं। नए निर्माण को अवैध मानते हुए रोकने के लिए जरूर कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके पीछे एक बड़े भाजपा नेता का राजनीतिक दबाव था, यह बात नगर निगम के अफसरों ने स्वीकार भी की।