अ.भा. साहित्य परिषद ने सरस्वती पूजन कर बसन्त काव्य पाठ का आयोजन किया रूतबा साहित्य और सृजन से जुड़कर ही संतुष्टी प्राप्त करता है- नगर निरीक्षक पुलिस श्री पुष्पेन्द्र सिंह राठौर

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अ.भा. साहित्य परिषद ने सरस्वती पूजन कर बसन्त काव्य पाठ का आयोजन किया रूतबा साहित्य और सृजन से जुड़कर ही संतुष्टी प्राप्त करता है- नगर निरीक्षक पुलिस श्री पुष्पेन्द्र सिंह राठौर

प्रकृति के उल्लास को मन की शांति से जोड़ने का पर्व है बसंत पंचमी- प्रेस क्लब संरक्षक श्री ब्रजेश जोशी

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मंदसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की बसन्त काव्य गोष्ठी नगर निरीक्षक पुलिस एवं साहित्यानुरागी श्री पुष्पेन्द्र सिंह राठौर के मुख्य आतिथ्य, जन परिषद मंदसौर चैप्टर अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल एवं टी वी एंकर श्री ब्रजेश जोशी के विशेष आतिथ्य में आयोजित हुई।

हेमू कालानी चौराहा स्थित मेडिपॉइंट सभागृह में बसंत पंचमी शुक्रवार शाम सम्पन्न काव्य गोष्ठी में आशीषसिंह मण्डलोई, नरेन्द्रसिंह राणावत, नन्दकिशोर राठौर, अजय डांगी, राजेन्द्र तिवारी, अजीजउल्लाह खान, नरेन्द्र त्रिवेदी, नरेन्द्र भावसार, राजकुमार अग्रवाल, श्रीमती चंदा डांगी, श्रीमती स्वाति रिछावरा, श्रीमती दीपिका मनवानी, ईश्वर डांगी, सुरेन्द्र शर्मा (पहलवान) ने रचना पाठ किया और अपने विचार व्यक्त किए।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगर पुलिस निरीक्षक पुलिस श्री राठौर ने अपनी साहित्य के प्रति रूचि और जुड़ाव के बारे में बताया और कहा कि लगातार पुलिस सेवा कानून ओर व्यवस्था के बीच साहित्य सृजन और संवाद सुकून देता है और वे संतुलन बना कर दायित्व निभाने में जुटे हैं।

आपने कहा कि बसंत पंचमी से शीत का कम होना तथा ताप का धीरे-धीरे बढ़ना खुशनुमा मौसम का आरंभ काल शुरू होता है। वहीं ज्ञान की देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस भी प्रकृति को संस्कृति से जोड़ती है। अपनी संस्कृति को आत्मसात करने पर ही व्यक्ति सुकुन का अनुभव करता है क्योंकि व्यक्ति अपनी उपलब्धियों से एक रूतबा तो हासिल कर लेता है किन्तु ‘रूतबा’ साहित्य, संगीत ओर ज्ञान से जुड़कर ही संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। रुतबा चाहे किसी भी क्षेत्र में हो मन की थाह से ही सन्तोष मिलेगा। तुलनात्मक रूप से सागर ओर जीवन को प्रस्तुत कर विवेचना की ओर यथार्थ सबके सामने रखा।

श्री राठौर ने साहित्य परिषद के कवियों साहित्यकारों लेखकों से परिचय प्राप्त किया ओर आमंत्रण के प्रति आभार जताया।
इस मौके पर नगर निरीक्षक श्री राठौर ने बुंदेल खंड झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर केन्द्रित स्वतंत्रता आंदोलन की कविता धाराप्रवाह सस्वर प्रस्तुत की ओर भरपूर सराहना प्राप्त की।

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जन परिषद मंदसौर चैप्टर अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल ने कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान की देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस है। यह सरस्वती की वीणा का ही कमाल है कि संसार में सात सुर एवं नौ रसों की उत्पत्ती हुई है। जिसका प्रभाव सभी पर पड़ा।

आपने कहा कि पुलिस केवल अपनी सख्त कार्यशैली ओर वर्दी के लिए ही नहीं अपितु पुलिस टीम के अन्दर भी दिल धड़कता है, वह भी मानव है पुलिस की इसी धड़कन में संवेदना भी है और सृजन भी है कर्मठता है तो दायित्व भी जो हम नगर निरीक्षक श्री राठौड़ के रूप में देख सकते हैं।

श्री ब्रजेश जोशी ने कहा कि बसंत पंचमी प्रकृति एवं संस्कृति के उल्लास का त्यौहार है। खेतों में पीली सरसों एवं जनसामान्य के पीले परिधान उल्लास का प्रतीक है तो सरस्वती का श्वेत परिधान मन की शांति का प्रतीक है। याने उल्लास को मन की शांति से जोड़ने का पर्व है बसंत पंचमी। श्री जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय भागवताचार्य स्व श्री मदनलाल जोशी शास्त्री की चार दशक पूर्व रचित बसंत की कविता प्रस्तुत की।

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इस अवसर पर कवियों ने काव्य पाठ भी किया। नरेन्द्र त्रिवेदी ने ‘सुगंध पुष्पों की मिले, होते ही भिनसार, कली कली पर डोलते भौरे कर गुज्जार’, नरेन्द्र भावसार ने ‘लो फिर आ गया बसंत, तुम्हारी कुल्हाड़ियों के खिलाफ’, नंदकिशोर राठौर ने सरस्वती गान, शब्द रस पहचान, मन की उड़ान, भाये तो बसंत है’’, अजय डांगी ने ‘‘विश्व के दो उत्सव, एक नववर्ष एक बसंत’’, श्रीमती चंदा डांगी ने ‘‘आई खुशियों की बौछार, बहेगी साहित्य की रसधार’, ईश्वर डांगी ने ‘‘हे शारदे तू हमें स्वर दे मॉ, करूणा कर हमें वर दे मॉ’, दीपिका कोशारी ने ‘श्वेत हंस आसीन वह, श्वेताम्बर नित धार, सुमधुर वीणा वादिनी, विद्या दे सह प्यार’ सुनाई। श्री मण्डलोई ने ‘‘पीली पीली धूप उतर आई,धरती को नई चुनर उड़ाई’’, संजू सुचित्रा इंदौर ने वीडियों कॉल पर वर्चुयल जुड़कर अपनी कविता सुनाई।

सभी ने ज्ञान की देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं गुलाब पुष्प अर्पण किया। सरस्वती वंदना गायक राजकुमार अग्रवाल ने प्रस्तुत की। संचालन नरेन्द्र भावसार ने किया।

कार्यक्रम में श्रीमती चंदा डांगी ने अतिथियों को स्व निर्मित कपड़े की थैलियॉं भेंट की तथा डॉ बटवाल ने शिवना की पुकार का वार्षिक कैलेण्डर सभी साहित्यकारों को भेंट किया। अंत में अभिनेता एवं कवि नरेन्द्र भावसार के यूट्यूब सीरियल ‘गेलिया गणपत‘ के पहले एपिसोड का अवलोकन किया।

आभार अखिल भारतीय साहित्य परिषद सचिव नंदकिशोर राठौर ने व्यक्त किया।