
‘The Bottle Gourd Man’-Dr. Shivpujan Singh:लौकी से शंखनाद, ‘लौकी पुरुष’ डॉ शिवपूजन सिंह से महेश बंसल की खास मुलाकात
(लखनऊ में लौकी मंदिर की अनोखी दुनिया, जहाँ साधारण लौकी से जन्म लेता है संगीत और सृजन का अद्भुत संगम)
महेश बंसल
लखनऊ प्रवास के दौरान प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एवं “लौकी पुरुष” के नाम से विख्यात डॉ शिवपूजन सिंह से उनके आवास पर आत्मीय भेंट का अवसर मिला। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक परिचय नहीं, बल्कि सृजन और परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षात्कार थी।
लौकी मंदिर: सृजन का जीवंत संग्रहालय
उनके द्वारा निर्मित “लौकी मंदिर” अपने आप में एक अनोखी दुनिया है। यहाँ साधारण लौकी को असाधारण रूपों में ढाला गया है। प्रो. सिंह ने केवल खाने योग्य लौकी की फसल ही नहीं उगाई, बल्कि अपने घर में ही एक अद्वितीय लौकी संग्रहालय विकसित किया है।

इस संग्रह में पकी हुई लौकी के खोल में से बीज निकालने के बाद पेंट कर सजावटी एवं उपयोगी वस्तुएँ … जैसे लौकी-शंख, तुमड़ी, लौकी कप आदि, विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। विशेष रूप से, सूखी लौकी से निर्मित शंख, जिसकी ध्वनि पारंपरिक शंख जैसी ही गूंजती है, आश्चर्यचकित कर देती है।
लौकी से बने शंख की अनूठी ध्वनि प्रस्तुत करते डॉ शिवपूजन सिंह—–
मेरे लिए सबसे रोचक क्षण वह था, जब डॉ. सिंह ने स्वयं इस लौकी-शंख को बजाकर उसकी ध्वनि का सजीव प्रदर्शन किया (देखें वीडियो)। यह अनुभव वास्तव में अद्वितीय और रोमांचकारी था।
शोध और नवाचार की अनोखी यात्रा

प्रो. सिंह ने अपने शोध कार्यों के माध्यम से लौकी, काशीफल, करेला और परवल की कुल 17 प्रजातियाँ विकसित की हैं। वर्ष 1995 में उन्होंने बीजरहित लौकी की एक जीनोटाइप ‘एंड्रोमोन-6’ विकसित की, जिसे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में पंजीकृत किया गया। यह उपलब्धि लौकी विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।
इसके पश्चात उन्होंने जुलाई में बुआई कर शीत ऋतु में उत्पादन देने वाली ‘नरेंद्र शिशिर’, ‘नरेंद्र माधुरी’ तथा असाधारण लंबाई वाली ‘नरेंद्र शिवानी’ जैसी विशिष्ट प्रजातियों का विकास किया।
आठ फीट लंबी लौकी ने बनाई पहचान
प्रो. सिंह द्वारा विकसित ‘नरेंद्र शिवानी’ किस्म ने लौकी की खेती में एक नई पहचान स्थापित की है। लगभग 8 फीट तक लंबी होने वाली इस लौकी ने देश में किसानों सहित अनेक लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। यह किस्म किसानों और वैज्ञानिकों, दोनों के बीच लोकप्रिय हो रही है।

हाल ही में योगी आदित्यनाथ की एक तस्वीर भी चर्चा में रही, जिसमें वे एक विशाल लौकी के साथ अपनी लंबाई मापते नजर आए।
73 वर्ष की आयु में भी प्रो. सिंह की ऊर्जा, नवाचार की सोच और सतत सक्रियता अत्यंत प्रेरणादायक है। उनकी सादगी और आत्मीयता ने इस भेंट को और भी विशेष बना दिया। उनके हाथों से बनी सादगीपूर्ण किंतु स्वादिष्ट खिचड़ी का “प्रसाद-भोज” ग्रहण करना, इस अनुभव में आत्मीयता का मधुर स्पर्श जोड़ गया।
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