Clean Indore and Jal Jeevan Mission: इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड ने स्वच्छ इंदौर और जल जीवन मिशन के धागे खोल कर रख दिए

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Clean Indore and Jal Jeevan Mission

Clean Indore and Jal Jeevan Mission: इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड ने स्वच्छ इंदौर और जल जीवन मिशन के धागे खोल कर रख दिए

 शैलबाला मार्टिन पाठक

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इंदौर की इस दुखद घटना ने भारत की आंगनवाड़ियों में चलाए जा रहे सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 कार्यक्रम पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं। इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य 0 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बालकों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना है।
लेकिन विडंबना देखिए कि भागीरथपुरा क्षेत्र की एक माता अपने तीन माह के कलेजे के टुकड़े को दूध में यही दूषित पानी मिलाकर पिला रही थी। उसे क्या पता था कि यही पानी बच्चे की जान ले लेगा?
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इस नन्हें बालक अव्यान ने कल रात अस्पताल में दम तोड़ दिया। दम ही नहीं उसके माता पिता के सपने भी उस बालक के हंसा के साथ ही पखेरू उड़ गए। अब अगर कोई जनप्रतिनिधि कई दिन तक रात रात भर जागे भी तो उस नन्हें और अन्य मृतकों की आत्मा में प्राण नहीं फूंक सकेगा।
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‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’।
सभी जानते हैं कि इंदौर माननीय मुख्य मंत्री महोदय के प्रभार का ज़िला है। ये भी पहली बार है कि कोई मुख्य मंत्री किसी ज़िले का प्रभारी बना हो। उनके पास प्रभार आने के साथ ही उम्मीदें जागी थीं लेकिन सब व्यर्थ।
जवाबदारी केवल इंदौर के जनप्रतिनिधियों की ही नहीं बनती है। जवाब उनसे भी मांगे जाने चाहिए जो प्रशासन चला रहे हैं, जो इंदौर से लेकर भोपाल तक इस विभाग की कमान संभाल रहे हैं। ये पूरा का पूरा सिस्टम इसके लिए ज़िम्मेदार है। क्यों नहीं इन सबसे भी सवाल किए जाने चाहिए? पूछा जाना चाहिए कि आखिर इन मौतों के लिए सही मायने में जो अधिकारी कर्मचारी ज़िम्मेदार हैं वो कब सज़ा पाएंगे? कब तक कुछ कमज़ोर कड़ियों को निलंबित किया जाकर मामलों को ठंडे बस्ते में डालने का खेल चलेगा?
लेखक पूर्व IAS अधिकारी हैं ,उनके फेसबुक वाल से