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इसी तरह 1896 में लोकमान्य तिलक द्वारा शोलापुर में प्रारम्भ किए गए गणपति उतसव में हिन्दू मुस्लिम सिख पारसी सभी धर्मावलबी शामिल होते थे | उस समय के एक साप्ताहिक अखबार ‘ रफत गोफ्तार ‘ ने लिखा था – ” गणपति उत्सव में स्थानीय मुसलमान गणपतिजी का सम्मान करते जुलूसों में शामिल हुए | नासिक में तो गणपति विसर्जन जुलुस का नेतृत्व एक मुस्लिम सज्जन कर रहे थे | ” इस समय बिहार बंगाल और वहां के मुस्लिमों को लेकर सर्वाधिक राजनीति हो रही है | इतिहास इस बात का गवाह है कि लार्ड कर्जन ने 1903 में हिन्दू मुस्लिम एकता तोड़ने के लिए ही बंगाल के विभाजन कि योजना पर अमल शुरू किया था | इसके विरुद्ध समाज में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी | स्वदेशी रैली हुई और राखी अपील जारी की गई | 1905 में लियाकत हुसैन ने सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को पत्र लिखकर बंग विभाजन से निपटने के लिए बहिष्कार को एकमात्र उपाय बताया था | बिहार में 1908 और 1909 में हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए सम्मेलनों के आयोजन हुए | उस समय हिन्दू मुस्लिम नेताओं का प्रभाव जनता पर था | बहरहाल अंग्रेजों के कारण बंगाल ही नहीं देश का भी विभाजन हुआ | लेकिन क्या आज उस तरह का कोई बड़ा राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता है ? कांग्रेस पार्टी में दशकों से प्रमुख स्थानों पर रहे सलमान खुर्शीद या बंगाल में अधीर रंजन चौधरी अपने मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में न तो स्वयं चुनाव जीत पाते हैं , न किसीको जितवा पाते हैं | आर जे डी और समाजवादी या शरद पवार की विभाजित एन सी पी में जो नेता मुस्लिम नेता बढ़ाए गए , उनकी आपराधिक गतिविधियों से देश के किसी राज्य में उनकी विश्वसनीयता मुस्लिम समाज में नहीं बन पाई | ओवेसी भी हैदराबाद और दो चार चुनाव क्षेत्रों को प्रभावित कर पाते हैं | ये सब अपने प्रचार और देशी विदेशी समर्थन से सम्पूर्ण मुस्लिम समुदाय के हितों की ठेकेदारी का दावा करते रहते हैं |
देश में सबसे अधिक मुस्लिम जम्मू-कश्मीर में रहते हैं. |आबादी में इनकी हिस्सेदारी 68.31% है | मुफ़्ती मोहम्मद सईद जम्मू और कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री थे। वे जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष थे। वे भारत के गृह मंत्री भी रहे। यह भी कांग्रेस से निकले वी पी सिंह के अल्प सत्ता काल में | उत्तर प्रदेश भारत की सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है. | देश की कुल आबादी का 16.51 फीसदी यहीं बसता है | इस सूबे में चुनावों में हुई हार-जीत का गणित देश की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाता है | साल 2011 की जनगणना पर नजर डाले तो यूपी की कुल आबादी 19.98 करोड़ रही और इसमें 3.84 करोड़ मुस्लिम रहे | इस हिसाब से देखा जाए तो इस सूबे की कुल आबादी में 20.26 फीसदी मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है | यही वजह है कि सियासी शतरंजी बिसात पर मुस्लिम वोट बैंक की अहमियत को अनदेखा नहीं किया जा सकता है | यहां विभिन्न राजनीतिक दलों की हार-जीत का दारोमदार मुस्लिम नेताओं पर रहता है | ऐसे कुछ असरदार और रौबदार नेताओं में आजम खान, मुख्तार अंसारी, नसीमुद्दीन सिद्दीकी हैं तो इमरान मसूद शफीकुर्रहमान बर्क, नाहिद हसन, हाजी फजलुर्रहमान, एसटी हसन जैसे नेताओं के नाम गिनाए जाते रहे हैं | लेकिन इनके विवादों की चर्चा काम नहीं होती और किसी अन्य राज्य में तो उनका कोई असर नहीं होता |लोकसभा चुनाव 2024 में कुल 78 मुस्लिम उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इसमें निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं। जबकि 2019 में 115 मुस्लिम उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इस बार संसद में 24 मुस्लिम सांसद चुनकर आए हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 7, समाजवादी पार्टी के 4, टीएमसी के 5, आईयूएमएल के 3, नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो और 2 निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंचे हैं।इसमें युसुफ पठान, असदुद्दीन ओवैसी, और इकरा चौधरी जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। फिर भी करीब बीस करोड़ मुस्लिम आबादी में व्यापक प्रभाव रखने वाला क्या कोई एक मुस्लिम नेता है ?