
सुपरपावर्स की दादागिरी का दौर अब पूरी तरह खत्म, जयशंकर ने इशारों में अमेरिका-चीन को बताई भारत की ताकत
नई दिल्ली: विदेश मंत्री जयशंकर ने दुनिया को बहुत ही कड़ा और साफ मैसेज दिया है. उन्होंने कहा कि बड़े देशों के बीच अब व्यापक समझौते नहीं होंगे. कुछ बड़े देश अब सिर्फ लिमिटेड मुद्दों पर ही अस्थाई समझौता करेंगे. शक्तियों के बीच कोई बहुत बड़ा समझौता अब नहीं होने जा रहा है. दुनिया को अब इस नए सिस्टम को अपनाना और स्वीकार करना ही होगा. बड़े देशों की मनमानी का दौर अब इफेक्टिव रूप से खत्म हो चुका है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भविष्य अधिक बहुध्रुवीय होगा और बड़े देशों द्वारा प्रभाव डाले जाने तथा उनके व्यापक समझौतों तक पहुंचने का युग प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है. ‘रायसीना डायलॉग’ में एक संवाद सत्र के दौरान जयशंकर ने कहा कि बहुध्रुवीयता यहां कायम होगी. जयशंकर का यह संदेश अमेरिका और चीन जैसे सुपरपावर की तरफ इशारा करता है, जो समय-समय पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हैं
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि आपका भविष्य बहुत अधिक बहुध्रुवीय होगा क्योंकि आज किसी भी देश के पास व्यापक क्षेत्रों पर आधिपत्य नहीं है…” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और क्षमताओं के वितरण के बारे में नहीं है, और दुनिया के विभिन्न हिस्सों का अलग-अलग क्षेत्रों में ‘अधिक योगदान’ होगा.
विदेश मंत्री ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की किताब ‘द ट्राएंगल ऑफ पावर’ पर चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की.उन्होंने कहा, ‘बहुध्रुवीयता यहां बनी रहेगी…एक हद तक यह होगा कि कुछ बड़े देश सीमित मुद्दों पर अस्थायी समझौता करेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘शक्तियों के बीच कोई बड़ा समझौता नहीं होने जा रहा है और बाकी दुनिया को इसे स्वीकार करना होगा. वह युग खत्म हो गया है.’
जयशंकर ने कहा कि भारत ने पिछले तीन वर्षों से ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ’ बैठकों की मेजबानी की है क्योंकि ‘ग्लोबल साउथ’ मंच के लिए एक नया आधार है. उन्होंने कहा कि बड़े देशों द्वारा प्रभाव डाले जाने तथा उनके व्यापक समझौतों तक पहुंचने का युग प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है.




