
सार्थक हो ‘गण का तंत्र’ भाव…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
भारत ने 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। गणतंत्र दिवस के अपने भाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि महिला सशक्तिकरण विकसित भारत के सपने को साकार करने की कुंजी है। उन्होंने शासन और राष्ट्रीय विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से हाल ही में पारित विधायी उपायों पर प्रकाश डाला। तो भाषण की शुरुआत में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में अपने देश की स्थिति और दिशा पर चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है। हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की शक्ति ने 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत स्वतंत्र हुआ। हम अपने राष्ट्रीय भाग्य के स्वयं निर्माता बने। 26 जनवरी,1950 से हम अपने गणतंत्र को संवैधानिक आदर्शों की ओर अग्रसर कर रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूर्णतः लागू हुआ। लोकतंत्र की जन्मभूमि भारत, प्रभुत्व प्रणाली से मुक्त हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणतंत्र अस्तित्व में आया।
हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का आधारभूत दस्तावेज है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श हमारे गणराज्य की परिभाषा हैं। संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
मध्य प्रदेश में गणतंत्र दिवस पर अपने भाषण में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश को बाबा साहेब की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है और सामाजिक न्याय, समता तथा बंधुत्व के उनके विचार प्रदेश के मार्गदर्शक हैं।गणतांत्रिक शासन व्यवस्था सेवा, समानता और संवेदनशीलता का संकल्प है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बात बहुत ही सटीक कही है कि गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में अपने देश की स्थिति और दिशा पर चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है। पर यह गौर करने की बात है कि हम देश की स्थिति और दिशा पर
चिंतन करने के अवसर को राष्ट्रहित में सार्थक निष्कर्षों तक नहीं पहुंचा पाते। गणतंत्र के 76 साल बाद भी जब देश में संविधान बचाओ के नारे लगाए जाते हैं तब अवसर वास्तव में देश की स्थिति और दिशा पर चिंतन करने का ही है। और यह चिंतन पूर्णता प्राप्त करे तभी गणतंत्र संवैधानिक आदर्शों की ओर अग्रसर हो पाएगा। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श हमारे गणराज्य की परिभाषा हैं। तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि अभी भी न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श तक पहुंचने की यात्रा जारी है और यात्रा की राह कई बार बहुत मुश्किल सी नजर आती है। इससे मन में बेचैनी भी होती है और कभी-कभी संविधान भी परेशान सा नजर आता है। यह स्वीकार करने में कतई कोई परेशानी नहीं है कि संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना और देश की एकता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है। लेकिन यह माना जा सकता है कि संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से
संविधान के रक्षकों ने बहुत बार संवैधानिक प्रावधानों की भावना को न केवल ठेस पहुंचाई है बल्कि खुलेआम खिलवाड़ किया है। और इससे न केवल राष्ट्रहित प्रभावित हुए हैं बल्कि राष्ट्रवाद की भावना और देश की मजबूत एकता का आधार कमजोर ही हुई है। ऐसे में संविधान अपने आदर्शों पर पहुँचने के लक्ष्य से भटका नजर आया है। तो 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम यही सार्थक चिंतन कर सकते हैं कि गणतंत्र का मूल भाव कैसे बना रह सकता है? ‘गण का तंत्र’ का भाव तभी सार्थक होगा जब संविधान वास्तव में आदर्श लक्ष्य की तरफ अग्रसर होगा। और यह तभी संभव हो पाएगा जब राज्यपाल मंगूभाई पटेल के भावों के मुताबिक बाबा साहब अंबेडकर की मंशा के अनुरूप सामाजिक न्याय, समता तथा बंधुत्व के उनके विचार सैद्धांतिक तौर पर नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप में देश और प्रदेश के मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आएंगे। और तब गणतांत्रिक शासन व्यवस्था में निहित सेवा, समानता और संवेदनशीलता का संकल्प चरितार्थ हो पाएगा। तब तक ‘गण का तंत्र’ भाव सार्थक होने की उम्मीद दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र के हर नागरिक के मन में कायम रहेगी…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





