
GST से होने वाले घाटे का बोझ आम आदमी पर नहीं डालेगी सरकार, एक अफसर एक वाहन का फार्मूला हो सकता है लागू
भोपाल: GST में किए गए टैक्स छूट प्रावधानों का असर मध्यप्रदेश पर भी पड़ेगा। मध्यप्रदेश को जीएसटी में केन्द्र सरकार से मिलने वाली राशि में सालाना लगभग पच्चीस सौ करोड़ रुपए की कमी आ जाएगी। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार इसकी पूर्ति के लिए आम आदमी पर कोई बोझ नहीं बढ़ाएगी बल्कि खर्चो को कम करेगी।
GST से मध्यप्रदेश की कर हिस्सेदारी कम होंने से होंने वाले नुकसान को पूरा करने के लिए अब राज्य सरकार मितव्ययिता से चलने के लिए सभी सरकारी विभागों को निर्देशित करेगी। खर्चो को कम करने के लिए वित्त विभाग एक मंत्री, एक अफसर एक वाहन के फार्मूले को भी लागू कर सकता है। प्रदेश के कई मंत्रियों के पास अभी कई निगम-मंडलों, सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्षों का प्रभार भी है। कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग है। इसी तरह मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों, मध्यप्रदेश के पुलिस महकमें, शिक्षा विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में वे सभी जिम्मेदारियों का भार उठाने के साथ वहां से प्रदाय की जाने वाली सुविधाओं जैसे वाहनों और कर्मचारियों का भी उपयोग करते है। वित्त विभाग यह कर सकता है कि एक व्यक्ति, एक अधिकारी एक वाहन का उपयोग करे। इसमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से ही यह पूछा जाएगा कि वे वर्तमान में कितने वाहन, कितने अमले का उपयोग कर रहे है। एक से अधिक वाहन उनके पास है तो वे कौन सा वाहन अपने पास रखना चाहते है और अन्य कौन से वाहन है जो विभाग को वापस करेंगे। उन्हें बिना किसी रखरखाव, डीजल खर्च के रखा जाएगा। अथवा पूल में शामिल करते हुए अन्य अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों को जिन्हें जरुरत है उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। इससे सरकारी बंगलों पर जो गैर जरुरी वाहन ज्यादा संख्या में खड़े रहते है उन पर रोक लग सकेगी और सरकार का खर्च भी बच सकेगा। इसी तरह भविष्य में मंत्रियों और अधिकारियों के लिए तय आवासों को भी ईयर मार्क किया जा सकता है ताकि पद पर न रहने पर भवन खाली हो और उनके रखरखाव की भी पॉलिसी बनाई जा सकती है ताकि संधारण पर आने वाला खर्च भी कम किया जा सके। इसी तरह एसी के उपयोग, बिजली के संतुलित उपयोग पर भी काम किया जाएगा।





