खाडी की जंग और ‘स्टोन एज’ का किस्सा 

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खाडी की जंग और ‘स्टोन एज’ का किस्सा 

राकेश अचल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘ स्टोन एज ‘ में भेजने की चेतावनी दी तो दुनिया को अतीत में झांकने के लिए मजबूर होना पडा. खाडी की जंग में कौन? किसे? स्टोन एज में पहुंचाएगा ये तो बाद में तय होगा, लेकिन मैं अपने पाठकों को ‘स्टोन एज ‘ की कहानी जरूर सुनाए देता हूँ.

असल में ‘स्टोन एज ‘ को हम भारत वाले ‘ पाषाण युग’ या पाषाण काल कहते है। ‘स्टोन एज ‘मानव इतिहास का सबसे लंबा पूर्व-ऐतिहासिक काल है, जिसमें हमारे पूर्वज मुख्य रूप से पत्थर के औजारों का इस्तेमाल करते थे. यह काल लगभग लगभग 33 लाख वर्ष पहले शुरू हुआ और धीरे-धीरे 4000 ईसा पूर्व से 2000 ईसा पूर्व के बीच तब समाप्त हुआ, जब मनुष्य ने धातु के औजारों का इस्तेमाल करना सीख लिया.

मानव इतिहास का लगभग 99 हिस्सा पाषाण काल यानि ‘स्टोन एज ‘ का है.इस युग में लिखित इतिहास नहीं था, इसलिए हमारी जानकारी मुख्य रूप से पुरातात्विक खुदाई से मिले पत्थर के औजारों, गुफा चित्रों और हड्डियों से आती है.

पाषाण युग के तीन मुख्य चरण माने जाते हैं. उस युग में जंग तो होती थी किंतु तब डोनाल्ड ट्रंप, बारुद, मिसाइल, ड्रोन, बम और फाइटर प्लेन नही होते थे.पाषाण युग को पत्थर के औजारों की बनावट और मानव जीवन शैली के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है.पुरापाषाण काल सबसे पुराना और सबसे लंबा चरण लगभग 3.3 मिलियन वर्ष पहले से 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है. उस समय मानव शिकारी-संग्राहक थे.शिकार करते और जंगली फल-फूल इकट्ठा कर थे.उनकी नजर तेल भंडारों या यूरेनियम पर नहीं थी. इन चीजों के बारे में कोई कुछ जानता ही नहीं था.सरल और बड़े पत्थर के औजार जैसे हाथ की कुल्हाड़ी, चाकू और ननुकीले हथियार हुआ करते थे. मनुष्य ने आग का उपयोग करना सीख लिया था.गुफाएं आश्रय स्थल हुआ करते थे. पाषाण युग के इनसान ने पत्थरों पर चित्र उकेरना भी सीख लिया था. स्पेन की अल्तामिरा गुफा या फ्रांस की लास्कॉ गुफा चित्र इसी काल के हैं, जिनमें जानवरों और शिकार के दृश्य दिखते हैं.

मध्यपाषाण काल को संक्रमण काल भी ककहा जाता है. ये (लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 8,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है. इस समय बर्फ युग के बाद जलवायु गर्म हुई, जंगल बढ़े.छोटे और नुकीले तीर के फलक, मछली पकड़ने के औजार बनाए गए. इनसान ने शिकार के साथ मछली पकड़ना और पशुओं को पालना शुरू कर दिया.अर्ध-स्थायी बस्तियां भी बनने लगीं.

तीसरे चरण का स्टोन एज यानि नव पाषाण काल और अंतिम चरण लगभग 8,000 ईसा पूर्व से 3,000-2,000 ईसा पूर्व तक का माना जाता है. इस समय कृषि क्रांति हुई.मानव ने फसलें उगाना और पशुपालन शुरू किया. चिकने पत्थर के औजार, पीसने के पत्थर, मिट्टी के बर्तन और स्थायी गांव बने यानि इनसान कुछ -कुछ सभ्य होने लगा.घर, पशुशालाएं और शुरुआती गांव जैसे मेहरगढ़ (भारत) या जेरिको (मध्य पूर्व) इसी काल के हैं.

पाषाण युग में औजार पत्थर से बने.बाद में हड्डी और लकड़ी भी इस्तेमाल हुई.शुरुआत में इनसान घुमंतू रहा, लेकिन फिर स्थायी बस्तियां बसने लगीं. गुफा चित्र, हाथों के निशान, कुछ प्रतीक भी बननाए जाने लगे जो संभवतः संचार या धार्मिक महत्व रखते थे.मानव प्रजातियों जैसे होमो इरेक्टस, निएंडरथल और अंत में होमो सेपियंस का विकस हुआ.आज यही विकास मानव सभ्यता के विना का सबसे बडा खतरा बन गया है. आज चौतरफा अशांति और युद्ध ही युद्ध हैं. और यही युद्ध इनसान को हजारों – हजार साल पीछे ले जाने की धमकियां दे रहा है.