सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी पर हाई कोर्ट ने जताई गहरी चिंता – बताया “शर्मनाक” 

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश

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सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी पर हाई कोर्ट ने जताई गहरी चिंता – बताया “शर्मनाक” 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की गंभीर कमी और उनकी दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस स्थिति को “शर्मनाक” बताते हुए, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति, गैरहाजिरी और स्कूल छोड़ने में योगदान दे सकती है। इसे एक प्रणालीगत विफलता बताते हुए कहा कि यह महिला छात्रों को असमान रूप से प्रभावित करती है।

अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

*शौचालयों के क्या है आंकड़ा*

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 5,000 से अधिक स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक स्कूलों में शौचालय अत्यंत खराब स्थिति में हैं। बिलासपुर जिले का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वहां 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय की गंभीर समस्या है और 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय तो हैं, लेकिन उपयोग योग्य नहीं हैं।

आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 56,615 संचालित स्कूलों में से 54,715 में बालिकाओं के लिए शौचालय उपलब्ध हैं परंतु केवल 52,545 ही उपयोग योग्य हैं। इसी प्रकार 53,142 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय हैं, लेकिन केवल 49,355 कार्यरत बताए गए हैं। इसका अर्थ है कि 4,070 स्कूलों में बालिकाओं के लिए और 7,260 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं हैं।

विद्यालयों के एकीकरण की प्रक्रिया के बाद स्कूलों की संख्या घटकर लगभग 38,000 रह गई, किंतु इसके बावजूद 1,000 से अधिक स्कूलों में अब भी बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, बस्तर और जांजगीर-चांपा जिलों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई।

इन तथ्यों पर गंभीर चिंता जताते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की-

“समाचार रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों की स्थिति शर्मनाक है। बालिकाओं के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनके लिए प्रतिदिन पांच से छह घंटे स्कूल में बिताना भी कठिन हो जाता है। यह व्यवस्था बालिकाओं के विरुद्ध उत्पीड़न का एक रूप है। यही कारण हो सकता है कि अनेक छात्राएं पढ़ाई छोड़ देती हैं या विद्यालय आना बंद कर देती हैं। कई स्कूलों में लड़के और लड़कियां एक ही शौचालय का उपयोग करते हैं, जिससे छात्राओं को प्रतिदिन शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।अदालत ने शिक्षा मंत्रालय की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें लगभग 5,500 स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय न होने की बात सामने आई थी।