
लोक-सुरों में फैला शिव भक्ति का आलोक
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर / संस्कृति विभाग, म.प्र. शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा मंदसौर के पशुपतिनाथ लोक परिसर में स्थित एमपीथियेटर में शिव-शिक्त की कला अभिव्यक्तियों पर एकाग्र “महादेव महोत्सव” का आयोजन रविवार को किया गया। समारोह में लोक गायन, शिव केंद्रित नृत्य नाटिका एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियाँ संयोजित की गईं।
कार्यक्रम के दौरान सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर सहित अन्य जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारियों में अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, मंदसौर एसडीएम श्री शिवलाल शाक्य, बड़ी संख्या में श्रोतागण और दर्शक, पत्रकार मौजूद थे।

महोत्सव की संध्या लोक-सुरों की मधुर अनुगूंज से आलोकित हुई। इंदौर के लोकगायक श्री मुकेश चौहान ने अपने साथी कलाकारों के साथ मंच संभाला और भक्ति-रस की गंगा प्रवाहित कर दी। उन्होंने गुरुज्ञान की भांग पिलाई अंखियों में सुरती छाई… भावपूर्ण भजन से अपनी मनोहारी प्रस्तुति का श्रीगणेश किया। उनके कंठध्वनि में ऐसी आत्मीयता और आस्था थी मानो स्वयं शिवत्व का स्पर्श श्रोताओं के अंतर्मन को आलोकित कर रहा हो। इसके पश्चात पीले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी… भजन गाकर शिव की महिमा का गुणगान किया। स्वर और ताल के संगम ने ऐसा आध्यात्मिक आलोक रचा कि श्रोता भाव-विभोर हो उठे।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए फागण आयो रे सतगुरु जी म्हा पर रंग बरसायो रे… की प्रस्तुति देकर उत्सवधर्मिता का उल्लास बिखेरा। वहीं, बेगा बेगा आव जो बंजारा रे… और काई लाया न काई लई जावंगा, जसा आया न वसा चली जावांग… जैसे गीतों के माध्यम से संत सिंगाजी की वाणी का स्मरण कराते हुए मानव जीवन की क्षणभंगुरता और वैराग्य का गूढ़ संदेश दिया गया। इसके बाद जरा हल्के गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले… भजन के साथ उन्होंने अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। इस समापन ने श्रोताओं के हृदय में भक्ति, चिंतन और आत्ममंथन की ऐसी छाप अंकित की, जो देर तक वातावरण में गूंजती रही।

अगली कड़ी में देवास के श्री प्रफुल्ल सिंह गहलोत एवं साथी कलाकारों ने नृत्य नाटिका “गंगा अवतरण” की प्रस्तुति दी। नाटिका में दिखाया गया कि गंगा अवतरण के लिए किस तरह से भगीरथ ने तपस्या की। नाटिका में दिखाया कि ब्रह्मदेव ने भगीरथ को बताया कि गंगा का वेग धरती नहीं सह पाएगी, तब भगीरथ ने भगवान शंकर से प्रार्थना की और भगवान ने गंगा को अपनी जटाओं में लेकर फिर गंगा को धरती पर अवतरित किया। कथक शैली में प्रस्तुत नाटिका के अगले दृश्य में दिखाया गया कि आज माँ गंगा प्रदूषण का शिकार है। नाटिका के माध्यम से माँ के आँचल को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश दिया गया। नाटिका के संवाद अमित राव पवार ने लिखे एवं संगीत आशुतोष सिद्ध, अनूप राजे पवार द्वारा दिया गया है।
भक्तिमय शाम की अंतिम सभा में भोपाल के श्री अखिलेश तिवारी एवं साथी कलाकारों ने भगवान शिव पर केंद्रित भक्ति गायन की प्रस्तुति दी। अखिलेश ने प्रस्तुति की शुरुआत सत्यम शिवम सुंदरम्… गीत से की। इसके पश्चात शिव कैलाशों के वासी…, मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा…, बगड़ बम बगड़ बम लहरी…, भोले की बारात…, मेरा भोला है भंडारी…, शिवरात्रि का त्यौहार आया… और शंकर मेरा प्यारा… जैसे गीतों के माध्यम से लोक-संस्कृति और शिव भक्ति के अनुपम संगम से श्रोताओं की स्मृतिपटल पर अंकित कर दिया।





