सदन में सबसे ज्यादा सक्रिय हुए धराशायी, ज्यादा मौन रहने वाले बने सरताज

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सदन में सबसे ज्यादा सक्रिय हुए धराशायी, ज्यादा मौन रहने वाले बने सरताज

भोपाल। विधानसभा चुनाव जीतने का कोई स्थायी मूल मंत्र नहीं होता है। प्रदेश में कई ऐसे जनप्रतिनिधि रहे है जो सदन में सबसे ज्यादा सक्रिय रहते थे। लेकिन विधानसभा चुनाव में वह अपने विरोधियों से पटखनी खा जाते थे। वहीं कुछ ऐसे भी जनप्रतिनिधि है जो सदन की कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा मौन रहते थे। लेकिन विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा मतों से चुनाव जीतने का रिकार्ड बनाते है। कांग्रेस में ऐसे तीन जनप्रतिनिधि थे जो सदन में सबसे ज्यादा सक्रिय रहते थे।

रामनिवास रावत, मुकेश नायक और निशंक जैन वर्ष 2013 से लेकर वर्ष 2018 के बीच विधानसभा कार्यकाल के दौरान जनसमस्याओं से जुड़े हुए मुददों को लेकर सबसे ज्यादा प्रश्न लगाते थे। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ये तीनों उम्मीदवार चुनाव हार गए थे। वहीं भाजपा के विधायक रमेश मेंदोला वर्ष 2013 से लेकर वर्ष 2018 के विधानसभा के कार्यकाल के दौरान मात्र तीन प्रश्न सदन में लगाए थे। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान मेंदोला प्रदेश में सबसे ज्यादा 71 हजार मतों से जीत का रिकार्ड बनाने में सफल रहे।

रामनिवास रावत-

पांच बार से कांग्रेस के विधायक रह चुके रामनिवास रावत इस बार फिर चुनावी मैदान में है। वर्ष 2013 से लेकर वर्ष 2018 के विधानसभा के कार्यकाल के दौरान जनसमस्या को लेकर सदन में सबसे अधिक 615 प्रश्न पूछे थे। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में रामनिवास रावत चुनाव हार गये। इस बार उनके सामने भाजपा के बाबूलाल मेवड़ा सामने है। मेवड़ा वर्ष 1998 में भाजपा से विधायक रहे, लेकिन वर्ष 2003 में चुनाव हार गए। उसके पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में वह बागी बनकर बसपा का दामन थाम लिए। हालांकि पार्टी ने उन्हें इस बार एक मौका दी है।

मुकेश नायक-

पूर्व मंत्री रह चुके और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुकेश नायक ने 13 से लेकर 18 के विधानसभा कार्यकाल के दौरान 574 प्रश्न पूछकर सदन की सक्रियता में दूसरे पायदान पर थे। लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में हर भाजपा के प्रहलाद लोधी से चुनाव हार गए। मुकेश नायक के सामने इस बार विधायक प्रहलाद लोदी फिर उनके सामने है।

निशंक जैन-

निशंक जैन कांग्रेस ने इस बार फिर गंजबासौदा से चुनावी मैदान में है। जैन अपने पिछले विधानसभा कार्यकाल के दौरान 570 प्रश्न पूछकर सदन की सक्रियता में तीसरे पायदान पर थे। हालांकि वर्ष 218 के विधानसभा चुनाव में निशंक जैन को भाजपा के लीना जैन ने दस हजार से अधिक मतों से चुनाव में शिकस्त दी थी। इस बार निशंक के सामने भाजपा के हरिसिंह रघुवंशी मैदान है।
रमेश मेंदोला- इंदौर क्रमांक दो से रमेश मेंदोला भाजपा से तीन बार लगातार विधायक रह चुके है। वह अपना हर चुनाव रिकार्ड मतों से जीतते है। रमेश मेंदोला वर्ष 2013 से लेकर 18 तक विधानसभा के कार्यकाल के दौरान मात्र तीन प्रश्न पूछे थे।

सदन की सक्रियता ही सब कुछ नहीं है-

विधानसभा चुनाव जीतने के लिए सदन की सक्रियता ही सब कुछ नहीं होती है। सदन में अपनी सक्रियता दिखाकर जनप्रतिनिधि भले ही बौद्धिक वर्ग के बीच अपनी इमेज बेहतर बनाने में सफल हो सकते है। लेकिन चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच सक्रियता सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके साथ ही जनता से लगातार संवाद बनाना भी जरूरी है। चुनाव में जैसे – जैसे पूंजी का हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है वैसे – वैसे चुनाव से बौद्धिक जमात दूर होता जा रहा है।