

गरीब-मध्यम वर्ग के मन को भाएगी “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा”…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश में बसी ग्रामीण आबादी और शहरी मध्यम वर्ग और बीपीएल के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” वरदान साबित होगी। मध्यप्रदेश की करीब 20 फीसदी आदिवासी जनसंख्या और 16 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी सहित बीपीएल सामान्य और ओबीसी जनसंख्या के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आ रहा है। पिछली भयावह दुर्घटनाओं को देखते हुए पीपीपी मोड पर चलने वाली इन बसों की लाभ केंद्रित गलाकाट स्पर्धा पर लगाम लगानी होगी। वहीं धनपशु मानसिकता पर केंद्रित किराया बढ़ोतरी पर अंकुश लगाना आवश्यक होगा ताकि आम आदमी के लिए यह परिवहन सेवा पूर्ण सरकारी नहीं तो सरकारी की तरह का सुकून देती रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साधारण और ग्रामीण मार्गों में संगठित, सुविधाजनक एवं सुरक्षित यात्री परिवहन बस सेवायें उपलब्ध कराने के लिए “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” प्रारम्भ करने की स्वीकृति सराहनीय है। और सरकार की यह अच्छी सोच है कि प्रदेश में ग्रामीण एवं साधारण मार्गों का ट्रैफिक एवं मार्ग सर्वे तथा बसों की फ्रीक्वेन्सी निर्धारित करते हुये एक व्यवस्थित प्लानिंग अनुसार यात्री बसों को चलाया जायेगा। पर मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य में सुगम सुरक्षित एवं विनियमित यात्री परिवहन सुविधा, निजी क्षेत्र के माध्यम से उपलब्ध कराये जाने का निर्णय थोड़ा मन में निजी मानसिकता का भय जरूर पैदा कर रहा है। इसे दूर करने के लिए सरकार को अपनी नई छवि बनाते हुए बस ऑपरेटर्स पर शिकंजा कसकर रखना होगा। क्योंकि अतीत में पन्ना, सीधी और धार में हुई बेहद गंभीर दुर्घटनाएं निजी बस ऑपरेटर्स के अमानवीय चेहरे को बेनकाब कर चुकी हैं। और दुर्घटनाएं रोकने और नियम-कानून के मुताबिक निजी बस ऑपरेटर्स को जिम्मेदार बनाने का काम सरकार को बेहद सावधानी और सतर्कता के साथ करना होगा।
यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति और जनहितैषी सोच ही है कि सरकार ने यात्री परिवहन सेवा को प्रारम्भ करने के लिए 101 करोड 20 लाख रुपये की अशंपूजी के रूप में स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के गठन की स्वीकृति भी दी गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन हेतु कंपनी एक्ट के तहत एसपीवीज् गठित हैं, जिसमें से 16 कार्यरत हैं। उक्त समस्त कंपनियों को 7 संभागीय कंपनियों के रूप में मर्ज किया जावेगा। उक्त सात कंपनियों के एकीकृत नियंत्रण के लिए राज्य स्तर पर कंपनीज एक्ट 2013 के तहत एक होल्डिंग कंपनी का गठन जायेगा। साथ ही त्रि-स्तरीय संरचना के तहत दायित्व निर्वहन और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के 51 प्रतिशत शेयर बहुसंख्यक आधार पर निवेश करने एवं सात सहायक कंपनियों के बोर्ड और उसके आर्टीकल ऑफ एसोसिएशन में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति, रीवा एवं ग्वालियर के लिए वर्तमान प्रचलित कंपनी को बंद करते हुए नवीन क्षेत्रीय कंपनी गठित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। इन क्षेत्रीय सहायक कंपनियों का गठन, संबंधित संभागीय मुख्यालयों में स्थित सिटी बस ट्रांसपोर्ट की वर्तमान कंपनी में संशोधन कर, निर्मित करने की स्वीकृति दी गई। जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति के गठन की स्वीकृति भी प्रदान की गई।
म.प्र. मोटरयान नियम 1994 के नियमों में आवश्यक संशोधन एवं वांछित प्रावधान करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। इसके अलावा भी सरकार ने “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” के प्रभावी परिचालन की सभी तैयारी कर ली है। सोच के अनुरूप ही “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” संचालन के लिए बस परिवहन अधोसंरचना के तहत पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रक्रिया से उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं मापदण्डों का यात्री एवं बस ऑपरेटर के लिए सुविधाओं का निर्माण करने का प्रावधान भी इसमें शामिल है। बस संचालन एवं संधारण के लिए पीपीपी मोड प्रक्रिया से, निजी बस ऑपरेटर्स को, संगठित रूप से एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत, दक्ष आई.टी. प्लेटफार्म के माध्यम से विनियमित किया जायेगा। आई.टी. टेक्नालॉजी साल्यूशन की स्थापना करते हुए समस्त बस ऑपरेशन्स पर प्रभावी निगरानी रखी जायेगी। इसके तहत सेवा स्तर समझौता (सर्विस लेवल अग्रीमेंट) और प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर) पर प्रभावी नियंत्रण रखा जायेगा, जिससे बस ऑपरेशन यात्रियों के लिए सुविधाजनक एवं सुरक्षित हो सके। बस सरकार की यही सोच आमजन की उम्मीदों पर खरी उतरे, ताकि मध्यप्रदेश की यह “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” मॉडल परिवहन के रूप में देशभर में अपना परचम फहरा सके। तब ह्रदय से गरीब-मध्यम वर्ग के मन को “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” भाएगी और डॉ. मोहन यादव का यह कदम मील का पत्थर बनकर जन-जन के मन पर अंकित हो सकेगा…।