विद्यार्थियों के पैदल मार्च के बाद प्राचार्य पद से हटाई गई   

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विद्यार्थियों के पैदल मार्च के बाद प्राचार्य पद से हटाई गई 

बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के मेणीमाता स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने प्राचार्य और तीन शिक्षकों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला मुख्यालय तक 35 किमी का पैदल मार्च शुरू कर दिया। इसके बाद देर शाम प्राचार्य को हटा दिया गया।

विद्यार्थियों का आरोप था कि प्राचार्य मनमानी करती हैं, फीस और छात्रवृत्ति को लेकर अनियमितता बरतती हैं, खेलकूद व स्वच्छता पर ध्यान नहीं देतीं और परीक्षा में फेल करने की धमकी देती हैं।

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करीब 3 बजे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, पालक और एबीवीपी पदाधिकारी कलेक्टर से शिकायत करने के लिए स्कूल से निकल पड़े। सूचना मिलते ही बीईओ आर.एस. जाधव और तहसीलदार हितेंद्र भावसार पहुँचे और बरुखोदरा गाँव में छात्रों को रोका। इस दौरान विद्यार्थी सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। भावसार भी छात्रों के बीच ज़मीन पर बैठ गए और समस्याएँ सुनीं, मगर छात्र तत्काल आदेश जारी करने पर अड़े रहे।

करीब छह किलोमीटर तक पैदल चल चुके छात्रों ने सिलावद के पास बरुखोदरा फाटे पर धरना जारी रखा। दबाव बढ़ने पर देर शाम बीईओ जाधव ने आदेश जारी कर प्रभारी प्राचार्य साधना पाटीदार हटा दिया । और ,वरिष्ठ शिक्षक राजाराम भालसे को नया प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। आदेश जारी होते ही छात्र शांत हुए और वापस लौट गए।

*बड़वानी में बार-बार छात्र मार्च*  

यह पहली बार नहीं है जब जिले में विद्यार्थी पैदल मार्च पर निकले हों।

फरवरी 2024: पाटी ब्लॉक के एकलव्य आवासीय विद्यालय की 200 छात्राओं ने 15 किमी तक पैदल चलकर कलेक्टर से शिकायत की थी।

जुलाई 2025: मडगांव कन्या परिसर की 100 छात्राओं ने 70 किमी लंबा पैदल मार्च शुरू किया था, जिन्हें बीच रास्ते में रोककर समझाया गया।

जून 2025: सेंधवा के नर्सिंग कॉलेज के लगभग 40 छात्रों ने 22 किमी पैदल चलकर कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर परीक्षा में बैठने से रोके जाने का विरोध किया था।

अगस्त 2025: एकलव्य विद्यालय की छात्राओं ने कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना देकर हॉस्टल वार्डन हटाने की मांग की थी।

लगातार हो रहे इन छात्र आंदोलनों से साफ है कि जिले में शैक्षिक और आवासीय संस्थानों की व्यवस्थाओं को लेकर गहरी असंतुष्टि बनी हुई है। हर बार छात्र समस्याओं का समाधान पाने के लिए लंबी दूरी तक पैदल मार्च करने को मजबूर हो रहे हैं। हालांकि इसके पीछे शिक्षकों और होस्टल वार्डनों की आपसी खींचतान और संगठनों के एजेंडे की बात सामने आई है।