
रूस-यूक्रेन की तरह ही होने वाले हैं यूएस-ईरान जंग के हालात…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जुबां पर आखिरकार वह सच आ ही गया, जिसकी आशंका पूरी दुनिया को है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार (26 मार्च 2026) को कहा कि मिडिल ईस्ट जंग में आगे क्या होगा ये कोई नहीं बता सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के नतीजे कोविड-19 महामारी जितने ही गंभीर हो सकते हैं। मॉस्को में बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि इस जंग की वजह से पहले ही लॉजिस्टिक, प्रोडक्शन और सप्लाई चेन बाधित हुआ है। साथ ही हाइड्रोकार्बन, मेटल, फर्टिलाइजर सेक्टर पर दवाब बढ़ा है।
कुल मिलाकर, पुतिन ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट के इस खेल के कितने बुरे अंजाम अमेरिका सहित पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकते हैं। और यह भी साफ कर दिया है कि इतने दिन युद्ध के बाद दुनिया भर में क्या परिणाम सामने आ चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि जंग में शामिल देश भी नहीं बता सकते कि आगे क्या होने वाला है। उन्होंने कहा कि इस जंग की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। यह संकट कोरोना वायरस के झटके की तरह ही कई देशों में विकास को धीमा कर सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। मुझे लगता है कि जो लोग इस संघर्ष में शामिल हैं, वे खुद भी किसी बात का अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं। हमारे लिए तो यह और भी ज्यादा मुश्किल है। यानी, पुतिन ने सही समय पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के मुखिया बेंजामिन नेतन्याहू को खासतौर पर आईना दिखाने का काम किया है।
28 फरवरी को जब यह युद्ध शुरू हुआ था, तब अमेरिका और इजराइल को उम्मीद थी कि उनकी सैन्य ताक़त ईरान को जल्दी ही गिरा देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद अमेरिका और इजराइली मीडिया ने बताया था कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की मदद से ईरान को 15 पॉइंट्स का युद्धविराम प्रस्ताव दिया है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकना और यमन में हूती और लेबनान में हिज़्बुल्लाह जैसी “प्रॉक्सी मिलिशिया” को समर्थन बंद करना शामिल है।
इसके बदले ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर कुछ हद तक शेयर्ड कंट्रोल मिलेगा। शुरुआत में ईरान ने अमेरिका की 15 बिंदुओं वाली योजना को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे “हद से ज्यादा” बताया। लेकिन इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने के लिए 5 शर्तें रखी गईं हैं। इन शर्तों में ईरान ने मांग की है कि दुश्मन की तरफ से हो रहे ‘हमले और हत्याएं’ पूरी तरह रुकें।
ऐसा समाधान हो कि ईरान पर दोबारा युद्ध न थोपा जाए। युद्ध से हुए नुकसान के मुआवजे की गारंटी मिले, इसका भुगतान हो। पूरे मोर्चों पर और पूरे क्षेत्र में शामिल सभी समूहों के लिए युद्ध का अंत हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और गारंटी मिलनी चाहिए कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर अधिकार जताने का हक है।
कुल मिलाकर, युद्ध को शुरू हुए करीब एक महीना होने को है और स्थितियाँ लगातार भयावह और पूरी दुनिया को संकट में डालने वाली नजर आ रही हैं। पुतिन के बयान के बाद अब इस बात को भी पूरा बल मिला है कि युद्ध का अंत कब होगा, इसके बारे में अब केवल अमेरिका या ईरान कोई भी तय करने का दावा नहीं कर सकता। यह संकेत भी है कि जिस तरह अमेरिका ने जानबूझकर यूक्रेन के जरिए रूस पर निशाना साधा था, कोई बड़ी बात नहीं कि अब वही इतिहास अमेरिका-ईरान युद्ध में दोहराया जाए। और इस बार निर्णायक भूमिका में रूस नजर आएगा, इस बात में भी कोई शक नहीं है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





