आधी रात को आईएएस अधिकारियों के तबादलों के पीछे का सच 

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आधी रात को आईएएस अधिकारियों के तबादलों के पीछे का सच 

सुरेश तिवारी की खास रिपोर्ट

राज्य शासन द्वारा आधी रात को जारी 11 IAS अधिकारियों के तबादला आदेश को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस तबादला आदेश में 4 अधिकारियों को लेकर खासी चर्चा हो रही है। ये है: मनीष सिंह,दीपक सक्सेना, अशोक वर्णवाल और संदीप यादव।

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मनीष सिंह

पहले बात करते हैं मनीष सिंह की, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा में 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। मनीष सिंह शिवराज के भी विश्वसनीय और निकट अधिकारी रहे हैं और पूर्व में भी आयुक्त जनसंपर्क और मध्य प्रदेश माध्यम के एमडी रह चुके हैं। आपको याद दिला दें कि सवा दो साल पहले जब मोहन यादव मुख्यमंत्री बने थे तब उज्जैन के पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह को शुरुआत के दौर में लूप लाइन में पदस्थ किया गया था लेकिन मनीष सिंह ने अपनी कार्य कुशलता और काबिलियत से शीघ्र ही मुख्यमंत्री को प्रभावित कर लिया और मुख्यमंत्री ने उन्हें परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जवाबदारी सौंप दी। मनीष सिंह की गिनती एक मेहनती और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में होती हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री यादव को उनकी काबिलियत का उपयोग सरकार के हित में लिए करना चाहा, तभी उन्हें पहले परिवहन और अब जनसंपर्क विभाग की कमान फिर से सौंप दी।

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अब बात करते हैं 2010 बैच के अधिकारी दीपक सक्सेना की। सब जानते हैं कि मुख्यमंत्री के विश्वसनीय अधिकारियों में दीपक सक्सेना शुरू से शामिल रहे हैं। वे भी उज्जैन के हैं और मुख्यमंत्री के चहेते अधिकारी के रूप में उनकी पहचान रही है।

सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री जिस उम्मीद से उन्हें जनसंपर्क विभाग में लाए थे, शायद उस पर वे खरे नहीं उतर पाए। हाल ही में मुख्य सचिव के प्रदेश के कलेक्टरों को लेकर तथाकथित रूप से दिए गए एक बयान, जिससे सरकार की किरकिरी हुई, दीपक सक्सेना पर मीडिया मैनेजमेंट नहीं करने की चर्चा भी सामने आई थी। शायद इसके बाद से ही उनकी रवानगी की चर्चा होने लगी थी। ऐसे में फिर से मनीष सिंह की मुख्यमंत्री को याद आई और वे इस पद के लिए सबसे उपयुक्त माने गए। मुख्यमंत्री चाहते थे कि आयुक्त जनसंपर्क से हटाने के बाद दीपक को सम्मानजनक पद दिया जाए। इसी बीच सोम डिस्टलरी को लेकर आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल द्वारा दिया गया एक आदेश उनको भारी पड़ गया और यही वह मौका था जब मुख्यमंत्री ने उनके स्थान पर दीपक सक्सेना को पदस्थ करने का मन बनाया। कहा जा सकता है कि आबकारी आयुक्त का पद भी मुख्यमंत्री के बहुत ही विश्वसनीय और निकट के अधिकारी को दिया जाता है। बता दें कि कुछ वर्षों पहले आयुक्त जनसंपर्क रहे राकेश श्रीवास्तव को आयुक्त जनसंपर्क पद से विदा किया गया था तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें आयुक्त आबकारी बनाया था। जानकारों का कहना है कि दीपक सक्सेना का सम्मान मुख्यमंत्री ने अपने रिश्ते निभाते हुए कायम रखा है।

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अब बात करते हैं अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव संदीप यादव की। अशोक वर्णवाल को संदीप यादव के स्थान पर स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के मंत्री राजेंद्र शुक्ल, संदीप यादव की कार्यप्रणाली से खुश नहीं थे। बताते तो यहां तक है कि वे उनके तबादले को लेकर मुख्यमंत्री से पिछले दिनों में कई बार कह भी चुके थे। अंततः मुख्यमंत्री ने राजेंद्र शुक्ल की बात मानते हुए स्वास्थ्य विभाग से संदीप यादव की विदाई कर दी लेकिन उन्हें वन विभाग की जिम्मेदारी देखकर उनके महत्व को कम नहीं किया गया है।

हम यहां एक और अधिकारी की बात करना चाहते हैं 2012 बैच के IAS अधिकारी उमाशंकर भार्गव की। वे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विश्वसनीय अधिकारी रहे हैं। मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वे राजभवन में लूप लाइन में पदस्थ थे। भार्गव की गिनती भी परिणाम देने वाले अधिकारियों में होती रही है। राज्य सरकार चालू वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मना रहा है। ऐसे में भार्गव को संचालक कृषि बनाकर उनके काम का सही आकलन किया गया है।

कुल मिलाकर कल आधी रात हुए IAS अधिकारियों के तबादले में मुख्यमंत्री की मंशा को तो ध्यान में रखा गया लेकिन उससे भी ज्यादा काबिलियत को महत्व दिया गया।