
“इक्कीसवाँ मिनट” समकालीन यथार्थवादी कथा-परंपरा का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
भोपाल 10 मार्च, मध्य प्रदेश लेखक संघ अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी की अध्यक्षता, वनमाली कथा के संपादक मुकेश वर्मा के मुख्य आतिथ्य में और मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशिका डॉ. नुसरत मेहदी के सारस्वत आतिथ्य में देश की वरिष्ठ कथाकार संतोष श्रीवास्तव की कथात्मक कृति “इक्कीसवाँ मिनिट” की कहानियों पर गहन विमर्श हुआ।
सर्वप्रथम लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने कृति संरचना, भूमिका और रचना प्रक्रिया के अनुभव साझा करते हुए कहा कि “इस दसवें कहानी संग्रह की कहानियों को लिखते हुए मैंने हर चरित्र को जिया है, उनसे संवाद किया है, उनकी प्रसन्नता से प्रसन्न हुई हूँ, उनके आँसुओं को अपनी आँखों में उमड़ते पाया है। मेरी कहानियों ने स्त्री अस्मिता को पुनः परिभाषित करने की कोशिश में अपने स्त्री पात्रों को हारने नहीं दिया है। इसी तारतम्य में जोखिम, मोहभंग, मुक्ति, उड़ान को पँख जैसी कहानियाँ लिखीं गईं।”
इस अवसर पर राजेंद्र गट्टानी ने कहा कि “इस संग्रह की कहानियाँ मार्मिक है। जो पाठक को उद्वेलित करती हैं।” मुख्य अतिथि मुकेश वर्मा ने संग्रह की कहानियों की समालोचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत की। “इक्कीसवाँ मिनिट” को बेहतरीन कहानियों का संग्रह बताया। इनकी कहानियों में विविधता है, जो पाठक को झकझोरती है। मुक्ति कहानी सही दिशा में स्त्री की अस्मिता को पहुँचाती प्रतीत होती है।”
नुसरत मेहदी ने कहा कि “इक्कीसवाँ मिनट” एक सार्थक और प्रभावशाली कहानी-संग्रह है।“इक्कीसवाँ मिनट” समकालीन यथार्थवादी कथा-परंपरा का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। ”
इसमें स्मृति, करुणा, न्याय-बोध और मानवीय संवेदना की अनेक सूक्ष्म धाराएँ प्रवाहित हैं। यह संग्रह केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि हमारे समय के सामाजिक और नैतिक प्रश्नों पर एक गंभीर साहित्यिक संवाद भी प्रस्तुत करता है।
नीलिमा रंजन ने कृति की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने संतोष श्रीवास्तव का ‘इक्कीसवाँ मिनट’ अंतस के मर्म से यथार्थ को रोमांचक बनाती चौदह सार्वभौमिक कहानियों का संग्रह है जिसकी प्रत्येक कहानी में उपन्यास बनने का रहस्य छुपा है। इक्कीसवाँ मिनिट एक फिल्मी नायक के बीस मिनट असुरक्षित ऊहापुह और इक्कीसवे मिनट में निर्णय की कहानी है।
श्री संजय द्विवेदी ने सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य सुनील चतुर्वेदी ने दिया। कार्यक्रम का सरस संचालन जया केतकी शर्मा ने किया।
दूसरे सत्र में भोपाल शहर के नामचीन कवियों ने फागुन और बसंत पर अपनी कविताएं सुना कर समा बांधा।
कार्यक्रम में शहर के पत्रकारों कवियों और वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति दर्ज की गई।
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