तब ‘धार’ नहीं भारत की पूरी ‘धरा’ पर पारस्परिक सम्मान का भाव दिखेगा…

पूरी दुनिया की निगाहें मध्य प्रदेश में धार की भोजशाला परिसर पर टिकी

27

तब ‘धार’ नहीं भारत की पूरी ‘धरा’ पर पारस्परिक सम्मान का भाव दिखेगा…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

आज यानि 23 जनवरी 2026 को पूरी दुनिया की निगाहें मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला परिसर पर टिकी रहेंगी। ऐसा अक्सर तब होता है जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ते हैं। तब यहाँ सरस्वती पूजा और नमाज के चलते जिला प्रशासन को विशेष व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं ताकि साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति न बन सके। हालांकि आपसी सामंजस्य और भाईचारे के साथ ही एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव अब बनने लगा है लेकिन फिर भी प्रशासन को तो हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना ही पड़ता है। 8000 पुलिस बल की मौजूदगी 23 जनवरी, शुक्रवार को धार में आपसी सम्मान और भाईचारे की साक्षी बनेगी। और सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी इस आपसी सम्मान और भाईचारे का कवच बनकर मौजूद रहेगा। इससे कहीं न कहीं यह सच सामने आ जाता है कि अभी पारस्परिक सम्मान और भाईचारे की पूर्णता में कहीं न कहीं कमी तो है। और जब तक मन पूरी तरह से नहीं मिल जाते तब तक पूर्ण भाईचारे और आपसी सम्मान की पूरी तरह से उम्मीद भी नहीं की जा सकती। और सच यह भी है कि ऐसा हो पाना पूरी तरह से नामुमकिन नहीं है तो पूरी तरह से मुमकिन भी नहीं लगता। इस आदर्श स्थिति की कल्पना तब ही की जा सकती है जब वास्तव में भारत का संविधान भारत के जन-जन के मन में धर्म से ऊपर आरूढ़ होगा। जब राजनीति पूरी तरह से नीति केंद्रित होकर सच को सच और झूठ को झूठ कहने में एक पल की भी देरी नहीं लगाएगी। तब ही पारस्परिक सम्मान और भाईचारे की पूर्णता को सच होते देखा जा सकेगा।

 

बात फिर भोजशाला की कर रहे हैं, जहाँ बसंत पंचमी पर शुक्रवार के दिन पूजा और नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2026, गुरुवार को धार भोजशाला मामले में बड़ा आदेश दिया है। 23 जनवरी (बसंत पंचमी, शुक्रवार) को हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा की पूरी छूट दी गई है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने प्रशासन को दोनों के लिए अलग-अलग जगह तय करने, विशेष पास व्यवस्था करने और शांति-सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह व्यवस्था हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पूरा मामला सुनने के बाद कहा कि इस पुरातात्विक परिसर को लेकर दोतरफा दावे हैं। मामला हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए हम इस पर कोई राय नहीं दे रहे। हमारे सामने सिर्फ 2003 में आए भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आदेश का मामला है। उस आदेश में एएसआई ने शुक्रवार को नमाज और मंगलवार व बसंत पंचमी को पूजा की अनुमति दी थी। इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को है। दलील दी गई कि इसके कारण प्रशासन को व्यवस्था बनाने में दिक्कत हो सकती है। हमने मस्जिद पक्ष, मध्य प्रदेश सरकार, एएसआई और याचिकाकर्ता को सुना। राज्य सरकार ने बताया कि मुस्लिम पक्ष 1 से 3 बजे के बीच आएंगे। उनके आने-जाने के लिए अलग रास्ता रखा गया है। नमाज की जगह भी तय कर दी गई है। हिंदू पक्ष की पूजा की भी जगह तय की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा। जब बताया गया कि परिसर में आने के लिए एक ही गेट है। तब सीजेआई ने

व्यवस्था दी कि प्रशासन इसका ध्यान रखे। कलेक्टर को अनुमानित संख्या की जानकारी दे दें। और यह भी अपेक्षा की और व्यवस्था दी कि सभी पक्ष एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखें और प्रशासन से सहयोग करें।

दरअसल 2013 में बसंत पंचमी और शुक्रवार एक दिन आने पर धार में माहौल बिगड़ गया था। हिंदुओं के जगह छोड़ने से इंकार करने पर पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा था। साल 2016 में भी शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से यहां तनाव का माहौल बन गया था। तो हम अब उम्मीद करते हैं कि दस साल पहले जैसी स्थितियाँ अब नहीं बनेंगी और 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को भोजशाला में बसंत पंचमी और नमाज पारस्परिक सम्मान और भाईचारे के साथ संपन्न होकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनेंगी। और ऐसा दिन भी आएगा जब बसंत पंचमी और शुक्रवार साथ-साथ पड़ने पर भी बिना भारी पुलिस बल और प्रशासनिक कसावट के पारस्परिक सम्मान और भाईचारा बना रहेगा। तब असल कानून का राज देखने को मिलेगा और तब ही नीति केंद्रित राष्ट्र में हर समय एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव देखने को मिल सकेगा। तब ही सही तौर पर ‘धार’ नहीं भारत की पूरी ‘धरा’ पर पारस्परिक सम्मान का भाव दिखेगा…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।