
हर छोटे छोटे जिलों में हों साहित्य महोत्सव, जिससे सभी लोग हमारी संस्कृति से जुड़े सके : पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर । सीतामऊ साहित्य महोत्सव के द्वितीय दिवस विद्वान वक्ताओं के विचारों, कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के मन को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य श्री संजीव सान्याल के व्याख्यान से हुई। उन्होंने “इतिहास का भूगोल” विषय पर बोलते हुए व्यापार, जहाजरानी, समुद्री यात्राएं, समुद्री शक्तियां, युद्ध तथा पड़ोसी देशों से संबंधों पर विस्तृत और रोचक विवेचना की।
प्रश्नोत्तरी में युवा पत्रकार सुश्री समीक्षा बाडोलिया ने श्री सान्याल से प्रश्न किए उनके समाधान परक उत्तर दिए।

इसके पश्चात कुरूक्षेत्र विश्व विद्यालय के प्रो. रविन्द्र कुमार शर्मा ने “भारतीय संस्कृति और इतिहास” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि यदि किसी देश को गुलाम बनाना है, तो सबसे पहले उसे उसका इतिहास भुला देना चाहिए। उन्होंने भारतीय संस्कृति, सैन्य परंपरा और सैनिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में ऐसा कोई देवता नहीं है जिसके हाथ में शस्त्र न हों। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय स्थल है और भारत को समझने के लिए मध्यप्रदेश को समझना आवश्यक है।

प्रो. शर्मा ने बुंदेलखंड के छत्रसाल, शिवाजी, महाराणा प्रताप की वीरता और शस्त्र विधा निपुणता को विस्तार से उल्लेखित किया।
कार्यक्रम के दौरान पैरामाउंट एकेडमी स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा सीतामऊ के साहित्य और इतिहास पर आधारित लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई— “आओ जी पधारो, मारी छोटी काशी”।
पद्मश्री कवि साहित्यकार श्री सुरेंद्र शर्मा ने अपनी कविताओं और विचारों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

अपनी चार लाइन की प्रभावी कविताओं से वातावरण बना दिया।
श्री शर्मा ने कहा कि सीतामऊ साहित्य महोत्सव जैसे आयोजन हर छोटे-छोटे जिलों में होने चाहिए, ताकि लोग अपनी संस्कृति से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि ज्यादा जीना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि कैसे जिया गया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए सार्थक जीवन जीने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि हंसी किसी के आंसुओं से अर्जित नहीं होनी चाहिए, गहराई के बिना ऊंचाई का कोई अर्थ नहीं होता। पेड़ जितना बड़ा होता है, उसकी जड़ें उतनी ही गहरी होती हैं। उन्होंने कर्म को महत्व देते हुए कहा कि काम को इज्जत देंगे तो मुनाफा मिलेगा, काम पर ऐसे जाएं जैसे मंदिर जाते हैं। इच्छाओं को सीमा में रखने और कर्म में विश्वास रखने का संदेश भी उन्होंने दिया। उन्होंने सीतामऊ में आयोजित इस महोत्सव और नट नागर शोध संस्थान के विशाल पुस्तकालय की सराहना की।

प्रसिद्ध कवि, लेखक एवं पत्रकार श्री आलोक श्रीवास्तव ने “आलोकनामा” और “शब्दों का आलोक” विषय पर संबोधन किया। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े इतिहास छोटे-छोटे शहरों से निकलते हैं और सीतामऊ की धरती पर हो रहा यह साहित्य महोत्सव उसी परंपरा का उदाहरण है। उन्होंने अपनी पुस्तक “आमीन” का उल्लेख किया तथा शैलेंद्र के गीत “धरती कहे पुकार” को सुनने का आग्रह किया।
श्री आलोक श्रीवास्तव ने शहीद दिवस होने पर महात्मा गांधी केन्द्रित कविता पाठ भी किया ।
उन्होंने कहा कि यदि भारत में जन्म लिया है तो अपने जन्म का अर्थ समझना चाहिए और राष्ट्र की संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। प्रेरणा एक शब्द से भी मिल सकती है, जरूरत है उसे ग्रहण करने की। उन्होंने संघर्ष, गुरु और जीवन को सीख का माध्यम बताते हुए साहित्य में तप और साधना की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने शिव तांडव स्तोत्र का हिंदी भावानुवाद और “घर की बुनियादी दीवारें—हमारे बाबूजी” कविता का पाठ किया।
इसके साथ ही डॉ गीतांजलि त्यागी ने प्राचीन राजपूताना राजघरानों के बारे में जानकारी प्रदान की।
इसके साथ ही श्री साजिद लोधी (पूर्व टेनिस कोच एवं पर्यावरण कार्यकर्ता) ने पर्यावरण, वन्यजीव, जीव-जंतु, वनस्पति एवं पक्षियों पर जानकारी दी। उनके मार्गदर्शन में बसई क्षेत्र में चंबल सफारी, मगरमच्छ एवं ऊदबिलाव दर्शन की गतिविधियों की जानकारी दी गई।
कबीर स्टूडियो द्वारा “वेव्स में स्वरागिनी” की प्रस्तुति दी गई।
दूसरे दिवस के आयोजन में कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी श्रोतागण उपस्थित रहे।
इस मौके पर पर्यावरण प्रेमी श्रीमती चंदा अजय डांगी ने स्वयं निर्मित कपड़े की थैलियां अपने अभियान के तहत विद्वानों एवं अतिथियों को भेंट की । उल्लेखनीय है कि प्लास्टिक बंद करने को लेकर श्रीमती डांगी एक लाख से अधिक कपड़े की थैलियां निःशुल्क वितरण कर चुकी हैं ।
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ घनश्याम बटवाल ने प्रकाशित साहित्य संग्रह यथार्थ पुस्तक प्रो रवीन्द्र शर्मा, कवि लेखक साहित्यकार श्री आलोक श्रीवास्तव एवं पद्मश्री कवि साहित्यकार श्री सुरेंद्र शर्मा को सम्मान सहित भेंट की ।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई अध्यक्ष श्री नरेंद्र भावसार सचिव नंदकिशोर राठौर एवं अन्य ने स्वागत सम्मान किया ।
व्याख्यान सत्र में कृषि वैज्ञानिक नरेंद्र सिंह सिपानी, इनकम टैक्स कमिश्नर सागर श्रीवास्तव नरेंद्र त्रिवेदी, विक्रम विद्यार्थी बंशीलाल टांक भुवनेश्वर सिंह दीपाखेड़ा, पंकज मलिक नीमच, ब्रजेश जोशी डॉ घनश्याम बटवाल विजय अग्निहोत्री राजेंद्र तिवारी नंदकिशोर राठौर नरेन्द्र भावसार डॉ दिनेश तिवारी नवीन त्रिवेदी अंशुल गर्ग अजीजुल्लाह खालिद डॉ विनीता कुलश्रेष्ठ सलमान कुरैशी राजेश कुलश्रेष्ठ प्रदीप कारपेंटर अनिल पाण्डेय प्रकाश कल्याणी विकास भंडारी डॉ ईश्वर लाल चौहान मनीष मनी शामगढ़ गौरी शंकर सांवरा डॉ सहदेव सिंह चौहान नरेंद्र सिंह राणावत अरुण गौड़ सहित अन्य सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शिरकत की ।





