यह ‘फूल’ बहुत ‘जहरीला’ है…

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यह ‘फूल’ बहुत ‘जहरीला’ है…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम 2023 आने के बाद कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया सुर्खियों में रहे थे। उन्होंने कहा था, अगर प्रदेश में बीजेपी को 50 सीटें मिल गईं तो वो अपना मुंह काला कर लेंगे और विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद उन्हें ऐसा ही करना पड़ा था। राजभवन के सामने अपना मुंह काला करने के बाद उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कालिख पोती है। जो वादा किया था उसे पूरा किया है। लेकिन फूल सिंह बरैया ने जितना घृणित बयान अब दिया है, उससे यह साबित हो रहा है कि वास्तव में मुंह काला करने से हुई उनकी इस पारी की शुरुआत सही ही थी। समाज में जहर फैलाने वाले इस बयान की जितनी निंदा की जाए, उतनी ही कम है। वास्तव में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करनी है तो ऐसे सभी नेताओं का मुंह हमेशा के लिए काला करना पड़ेगा, जो समाज में आधारहीनता के साथ जहर फैलाने का कृत्य कर रहे हैं। और जब अपने ही पार्टी के नेताओं द्वारा आलोचना होती है तब बिहार के हरिमोहन झा का बयान बताकर बेशर्मी के साथ यह कहना कि उनके बयान को कोट किया था इससे वह खुद भी सहमत नहीं है,बहुत ही लज्जाजनक है। बेहतर होता कि अपने इस लज्जित बयान के लिए सीधी-सीधी माफी मांग ली जाती। आइएएस संतोष वर्मा के घृणित बयान के बाद मध्य प्रदेश में फूल सिंह बरैया के बयान ने प्रदेश को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। हालांकि इसमें कांग्रेस पार्टी के नेताओं की सराहना की जानी चाहिए जिन्होंने खुलकर और तथ्यों सहित अपने ही दल के विधायक की तीखी आलोचना की है। वहीं पार्टी ने सीधे-सीधे फूल सिंह बरैया के बयान से पल्ला झाड़ लिया है।

आज हम कांग्रेस के ही नेताओं की आलोचना का जिक्र कर रहे हैं जो वास्तव में बहुत ही सराहनीय है और फूल सिंह बरैया को आईना दिखा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ-साफ कहा कि महिलाओं के साथ बलात्कार करने वाले अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता है। वह सिर्फ एक अपराधी होता है, जिसे कानून के अनुसार कठोर सजा मिलनी चाहिए।एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार सरकार की विफलता के कारण मध्य प्रदेश में हर रोज 22 बलात्कार हो रहे हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इस विषम परिस्थिति में समाज और हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि हम इस अराजकता को रोकने और प्रदेश को सुरक्षित बनाने के लिए आगे आएँ। आज श्री फूलसिंह बरैया जी का जो बयान सामने आया है, वह उनका व्यक्तिगत विचार है। कांग्रेस पार्टी इस प्रकार के बयान से इत्तेफाक नहीं रखती। इस संदर्भ में उनसे स्पष्टिकरण माँगा गया है।

संगठन महासचिव डॉ संजय कामले ने हाल ही में बरैया द्वारा दिए गए बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उक्त बयान पूरी तरह से उनके निजी विचार हैं, जिनका कांग्रेस पार्टी से कोई संबंध नहीं है। कामले ने कहा कि बरैया जी जिन धर्मग्रंथों का हवाला दे रहे हैं,उन धर्मग्रंथों में इस संदर्भ में कोई भी व्याख्या नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं विभिन्न वेद एवं धर्मग्रंथों का अध्ययन किया है, लेकिन किसी भी धर्मग्रंथ में इस प्रकार की बातों का उल्लेख नहीं मिलता। न ही किसी भी धर्म में इस तरह की सोच का समर्थन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि जहाँ तक बलात्कार जैसे जघन्य अपराध का प्रश्न है, विशेषकर चार वर्ष की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार, तो यह किसी भी प्रकार से धर्म, समाज या उम्र से जुड़ा विषय नहीं है। इस तरह के अपराध केवल विकृत मानसिकता और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों द्वारा ही किए जाते हैं। इसका किसी धर्म, किसी समाज या किसी आयु वर्ग से कोई लेना-देना नहीं है।

कामले ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो भारत के संविधान के अनुसार चलती है, जिसके निर्माण में कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संविधान में कहीं भी इस प्रकार की अमानवीय या असंवैधानिक सोच का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी समाज में सद्भाव, समानता, महिला सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है तथा इस तरह के बयानों का कांग्रेस पार्टी समर्थन नहीं करती है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने विधायक फूल सिंह बरैया द्वारा ‘रुद्रयामल तंत्र’ ग्रंथ के संदर्भ में दिए गए बयानों का तथ्यात्मक रूप से खंडन किया है। नायक ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंचों से प्राचीन ग्रंथों की भ्रामक व्याख्या करना उचित नहीं है, यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास पैदा करने वाला निरर्थक प्रयास है। मुकेश नायक ने कहा कि ‘रुद्रयामल तंत्र’ भगवान शिव और शक्ति के संवाद का वह पावन संग्रह है, जो भेदभाव को मिटाकर मानवता को एकता के सूत्र में पिरोता है। उन्होंने इस बात की पुष्टि हेतु ग्रंथ के दो अत्यंत महत्वपूर्ण श्लोक प्रस्तुत किए:

“सर्ववर्णाश्रमाणां च सामान्यं धर्ममुत्तमम्।

तन्त्रमार्गेण सिद्धिः स्यात् सत्यं सत्यं न संशयः॥”

(अर्थात: यह तंत्र मार्ग समाज के सभी वर्णों और आश्रमों के लिए एक समान और उत्तम धर्म है। इसमें सिद्धि प्राप्त करने का अधिकार हर मनुष्य को है, इसमें कोई संशय नहीं है।)

नायक ने कहा कि जब ग्रंथ स्वयं कहता कि यह ‘सर्ववर्ण’ के लिए है, तो इसे किसी वर्ग विशेष के विरुद्ध बताना घोर अज्ञानता है। दूसरा श्लोक है-

“देहो देवालयः प्रोक्तो जीवो देवः सनातनः।

त्यजेदज्ञाननिमाल्यं सोऽहंभावेन पूजयेत्॥”

(अर्थात: यह मानव शरीर ही मंदिर है और इसके भीतर निवास करने वाला प्रत्येक जीव ही सनातन देव है। मनुष्य को अज्ञान का त्याग कर स्वयं के और दूसरों के भीतर के ईश्वर की पूजा करनी चाहिए।)

नायक ने बल देकर कहा कि जो ग्रंथ प्रत्येक जीव को ‘सनातन देव’ का दर्जा देता हो, वह किसी भी जाति या वर्ग का अपमान कैसे कर सकता है? उन्होंने कहा कि इसी ग्रंथ से ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ जैसी महान 112 ध्यान पद्धतियाँ निकली हैं, जो मानसिक शांति और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करती हैं। मुकेश नायक ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी सभी धर्मग्रंथों का सम्मान करती है और किसी भी नेता के ऐसे निजी विचारों का समर्थन नहीं करती जो बिना अध्ययन के धार्मिक आस्थाओं और गौरवशाली परंपराओं पर चोट करते हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील की है कि वे ग्रंथों के मर्म को समझें और किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक भ्रम का शिकार न हों।

 

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और महिला नेतृत्व द्वारा आलोचना करना राजनीतिक माना जा सकता है लेकिन जब फूल सिंह बरैया के बयान पर उनकी ही पार्टी के नेता खफा हैं, तब बयान की आधारहीनता, भ्रामकता और विकृतता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बाद भी यदि फूल सिंह बरैया शर्मिंदा नहीं है तब उनकी विकृत सोच और इस विकृत सोच से उत्पन्न स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कहा जाता है कि यथा नामे तथा गुणे यानि कि जिसका जैसा नाम होता है उसके वैसे गुण परिलक्षित होते हैं। पर बरैया के मामले में यह साबित हो चुका है कि यहाँ नाम के विपरीत अवगुणों की भरमार है। यह फूल सुगंधित नहीं है, प्रसन्नता से भरने वाला नहीं है बल्कि यह ‘फूल’ बहुत ही जहरीला है जो पूरे समाज में ‘जहर’ फैलाकर लोकतंत्र और संविधान की हत्या करने पर उतारू है… समय रहते ऐसी सोच पर अंकुश नहीं लगाया गया तब ऐसा जहर पूरे समाज को दूषित कर देगा।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।