घर जिन्होंने अपने जलते नहीं देखे !

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घर जिन्होंने अपने जलते नहीं देखे !

अन्ना दुराई

विश्व के विभिन्न देशों में युद्ध छिड़ा जब हमारे देश में होली का माहौल था। सैकड़ो स्कूली बच्चों सहित युद्ध में हताहत होने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। मलबों के ढेर के रूप में नुक़सान की कोई सीमा नहीं। इतने दुष्कर समय में भी हमारे यहां मजाक चला, दूसरे देशों में दिवाली मन रही है और हमारे यहां होली। एक ऐसा वर्ग जो हमेशा घमंड और अहंकार के नशे में चूर दिखाई देता है, भारत को बेताज बादशाह बता रहा था। हम विश्व गुरु हैं। हमें युद्ध की विभीषिका से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जैसे जैसे युद्ध खींचता चला जा रहा है, आज इसकी तपन विभिन्न रूपों में भारत तक आ पहुंची है। न चाहते हुए भी आम आदमी इस त्रासदी को झेल रहा है। ये युद्ध कहां तक जाएगा और आने वाले समय में आम जनजीवन कितना प्रभावित होगा इसकी कल्पना मात्र से मन सिहर उठता है। एक शायर की ये पंक्तियाँ वाकई झकझोरती है।

 

पढ़ते हैं मजे लेकर फसादों की खबरें,

घर जिन्होंने अपने जलते नहीं देखे….

 

लंबा अर्सा हो गया हमारे यहां सरकार के टुकड़ों पर पलने वाले चाटुकारों और चरण वंदना करने वालों की एक फौज तैयार हो गई है। इन लोगों को देश से कुछ लेना देना नहीं, निजी स्वार्थ एवं आर्थिक हितों को साधने के लिए हमेशा सरकार से जुड़े रहते हैं। शर्म आती है जब पढ़ा लिखा तब्बका नफरती और झूठी बातें फ़ैलाने में अपनी शिक्षा और संस्कारो की उपयोगिता सिद्ध करते हुए चापलूसी की दौड़ में शामिल होने में जुटा रहता है। सरकारी ठेके और पैसों पर मौज मारने वाले भी अपने काले कारनामों को छिपाने के लिये अनर्गल प्रलाप करते हैं। भोली भाली जनता को बरगलाना इनकी नियति में शामिल है। इनकी स्थिति देख गिरगिट भी शरमा जाए। युद्ध की बात करें तो कभी ये ईरान को अपना दोस्त बता रहे होते हैं, कभी ट्रंप को अपना दुश्मन। कभी अमेरिका एवं इजराइल दोस्त हो जाते हैं तो कभी ईरान को ये दुश्मन बताने लगते हैं। क्या सही क्या गलत, कोई सोच या फर्क नहीं। बस सरकार के हर कदम में मास्टर स्ट्रोक दिखाना इनकी दिनचर्या में शामिल होता है। सार्थक बहस से ये हमेशा बचते हैं। कुछ पूछ लो तो ये सामने वाले की हंसी उड़ाने लगते हैं।

दूसरे देशों की बात करें तो वहां हर मुद्दे पर तर्क कुतर्क होते हैं। देश के लिए अच्छे बूरे को लेकर नसीहत दी जाती है। सवाल पूछे जाते हैं लेकिन भारत में एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया गया है कि सभी मौन में ही अपनी भलाई समझते हैं। असहनीय कृत्यों में भी चुप रहना एक मजबूरी सी बन गई है। बस हिन्दू मुस्लिम एंगल टाप पर चलता है। सच को सच और झूठ को झूठ कहने का साहस दिखाना होगा, देश और देश-विदेश में रहने वाले भारतीयों की भलाई भी इसी में है।