आज का विचार : एक नेत्रहीन व्यक्ति की तरह पूर्वाग्रहित होने के बजाय, जो मिला है उसकी महत्ता को समझें

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आज का विचार : एक नेत्रहीन व्यक्ति की तरह पूर्वाग्रहित होने के बजाय, जो मिला है उसकी महत्ता को समझें

सोशल मिडिया में रोज ही कुछ ख़ास सन्देश होते है ,जिन्हें हम बाद में पढेंगे यह सोचकर छोड़ देते है ,पढ़ते कभी नहीं, उन्हें पढ़िए .

एक गाँव में एक महिला अपने परिवार से सदा नाराज रहती थी ,उसे लगता था कि सबने संपत्ति लूट ली .उसे कुछ नहीं मिला .नाराजी का आलम यह था कि उसने अपने ही प्रियजनों को खूब भला बुरा कहा ,रिश्ते कड़वे हो गए .सालों बाद उसने देखा की उसके पास तो अपार घन है जो उसे उस परिवार ने ही दिया हुआ था जिसको वह कोसती रही .उसने ही  कभी अपने खाते में झाँक कर नहीं  देखा था .पश्चाताप होने पर वह परिवार से बोलना ,मिलन चाहती थी लेकिन अब किसी के पास उसके लिए कोई भाव नहीं बचे थे .लोग उसे उसकी कोई नयी चाल समझ रहे थे .तब वह महिला एक विद्वान् संत के पास गयी .संत ने उसके घ्यान चक्षु खोलने के लिए एक कथा सुनाई —नकारात्मक चश्मा उतारिये ,सकारात्मक नजर से दुनिया और परिवार को देखिये .परिवार पर भरोसा जीवन का पहला सुख है .

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एक अँधा व्यक्ति रोज शाम को सड़क के किनारे खड़े होकर भीख माँगा करता था। जो थोड़े-बहुत पैसे मिल जाते उन्हीं से अपनी गुजर-बसर किया करता था।  एक शाम वहां से एक बहुत बड़े रईस गुजर रहे थे।  उन्होंने उस अंधे को देखा और उन्हें अंधे की फटेहाल होने पर बहुत दया आई और उन्होंने सौ रूपये का नोट उसके हाथ में रखते हुए आगे की राह ली।

उस अंधे आदमी ने नोट को टटोलकर देखा और समझा कि किसी आदमी ने उसके साथ ठिठोली भरा मजाक किया है क्योंकि उसने सोचा कि अब तक उसे सिर्फ 5 रूपये तक के ही नोट मिला करते थे जो कि हाथ में पकड़ने पर सौ की नोट की अपेक्षा वह बहुत छोटा लगता था और उसे लगा कि किसी ने सिर्फ कागज़ का टुकड़ा उसके हाथ में थमा दिया है और उसने नोट को खिन्न मन से कागज़ समझकर जमीन पर फेंक दिया।

एक सज्जन पुरुष जो वहीँ खड़े ये दृश्य देख रहे थे, उन्होंने नोट को उठाया और अंधे व्यक्ति को देते हुए कहा- “यह सौ रूपये का नोट है!” तब वह बहुत ही प्रसन्न हुआ और उसने अपनी आवश्यकताएं पूरी कीं।

शिक्षा – ज्ञानचक्षुओं के अभाव में हम सब भी भगवान के अपार दान को देखकर यह समझ नहीं पाते और हमेशा यही कहते रहते हैं कि हमारे पास कुछ नहीं है, हमें कुछ नहीं मिला, हम साधनहीन हैं, पर यदि हमें जो नहीं मिला उन सबकी शिकायत करना छोड़कर, जो मिला है उसकी महत्ता को समझें तो हमें मालूम पड़ेगा कि जो हम सबको मिला है वो कम नहीं अद्भुत है।

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