कान्हा में बाघों की मौत का सिलसिला जारी, 5 माह में 9 वीं घटना से मचा हडक़ंप

किसली जोन में 4 वर्षीय बाघिन का मिला शव,  आपसी संघर्ष बनी मौत का कारण

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कान्हा में बाघों की मौत का सिलसिला जारी, 5 माह में 9 वीं घटना से मचा हडक़ंप

गणेश पांडे की विशेष रिपोर्ट

भोपाल। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं। गर्मी के इस सीजन में व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है।

ताजा मामले में किसली जोन के मगर नाला क्षेत्र में एक 4 वर्षीय बाघिन का शव मिलने से हडक़ंप मच गया है।

कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 5 महीनों में यह नौवीं घटना सामने आई है, जिससे केटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा घटना कोर क्षेत्र के किसली वन परिक्षेत्र के मगर नाला की है, जहां एक मादा बाघिन मृत अवस्था में पाई गई।

प्रबंधन की ओर से सहायक क्षेत्र निदेशक पीके वर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में बाघिन की मौत का कारण आपसी संघर्ष माना जा रहा है।

सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार किया गया।

लगातार हो रही मौतों से न केवल वन विभाग में हडक़ंप की स्थिति है, बल्कि पर्यटकों, गाइडों, जिप्सी चालकों और बफर जोन के ग्रामीणों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इन घटनाओं का असर पर्यटन पर भी साफ नजर आने लगा है।

*अमाही बाघिन का पूरा कुनबा खत्म*

कान्हा टाइगर रिजर्व में अमाही बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस घटना में बाघिन का पूरा कुनबा समाप्त हो गया, जिससे संरक्षण व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शावकों की मौत के कारणों की जांच अभी जारी है, लेकिन प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अलग-अलग वजहें सामने आई हैं। दो शावकों के पेट खाली मिले, जिससे भूख से मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि अन्य दो शावकों और बाघिन के फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

*संरक्षण पर उठ रहे सवाल*

लगातार हो रही इन घटनाओं ने केटीआर प्रबंधन की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और भयावह हो सकती है।