रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल… आओ भारत में रामराज्य की कल्पना करें…

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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल… आओ भारत में रामराज्य की कल्पना करें…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

रामनगरी अयोध्या में भगवान श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ वैसे तो हिंदू पंचांग और तिथि के अनुसार 31 दिसंबर 2025 को श्रद्धा,भव्यता और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई जा चुकी है। लेकिन तारीख के मुताबिक आज यानि 22 जनवरी 2026 को श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे हो रहे हैं। तिथि परंपरा के तहत पहली वर्षगांठ 11 जनवरी 2025 को मनाई गई थी। 22 जनवरी 2024 की तारीख ने अयोध्या में आक्रमणकारी बाबर द्वारा राम मंदिर का विध्वंस बाबरी मस्जिद निर्मित कर दिए गए विवाद का पटाक्षेप कर दिया था। 16वीं शताब्दी में विदेशी आक्रान्ता बाबर के द्वारा मन्दिर को तोड़ दिया गया था। जिसके बाद से जन्मभूमि को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही। और सनातन प्रेमियों के लिए 22 जनवरी की तारीख हमेशा-हमेशा के लिए असीम आस्था, श्रद्धा और विश्वास जगाने वाली बन गई। तिथि के मुताबिक रामलला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में भव्य आयोजन और हर्ष के साथ अयोध्या राममय हुई थी।

आओ आज एक बार फिर अयोध्या में राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा को याद करते हैं।

22 जनवरी, 2024, सोमवार (पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2080 पौष शुक्ल द्वादशी) को अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में आयोजित राम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ था। इस कार्यक्रम का आयोजन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा किया गया था। इसमें श्री राम के बाल्य स्वरूप (रामलला) के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की गई। राम मंदिर का अभिषेक समारोह भारतीय समयानुसार दोपहर 12:15 बजे शुरू हुआ और 22 जनवरी, 2024 को दोपहर 12:45 बजे समाप्त हुआ। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस समारोह के मुख्य यजमान के रूप में चुना गया था। इसके लिए उन्होंने 11 दिनों तक विशेष व्रत का पालन किया, जिसमें उन्होंने केवल नारियल का पानी पीया और फर्श पर सोए। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, मेष लग्न और अभिजीत मुहूर्त में हुई। काशी के सांग्वेद विद्यालय के प्राचार्य गनेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने ये अद्भुत मुहूर्त निकाला। प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त 12 बजकर 29 मिनट 8 सेकेंड से 12 बजकर 30 मिनट 32 सेकेंड के बीच रहा जो कुल मिलाकर 84 सेकेंड का था। इसी में रामलला प्रतिष्ठित कर दिए गए। कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने मूर्ती का निर्माण किया था।

इस कार्यक्रम हेतु देश विदेश से 7000 से अधिक अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। आमंत्रितों में अभिनेता, राजनेता, नौकरशाह, व्यापारी, आध्यात्मिक नेता, एथलीट सम्मिलित थे। महाकाव्य रामायण टीवी श्रृंखला के अभिनेता अरुण गोविल, दीपिका चिकलिया और सुनील लहरी इस कार्यक्रम के लिए सबसे अधिक देखी जाने वाली हस्तियों में से एक थे और उन्हें अयोध्या में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पूर्व-आमंत्रित किया गया था। मोदी ने प्रत्येक भारतीय से इस अवसर पर दीये जलाने और दिवाली मनाने का आग्रह किया था।

इन दो वर्षों में न केवल मुख्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, बल्कि राम जन्मभूमि परिसर 14 अन्य भव्य मंदिरों से सज्जित होकर एक विराट धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर परिसर अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, स्थापत्य कौशल और आधुनिक सुविधाओं का अद्वितीय संगम बन गया है। राम मंदिर में बाल स्वरूप रामलला तो विराजमान हैं ही, अब प्रथम तल पर राम परिवार के भी दर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा 800 मीटर लंबा परकोटा भी बनकर तैयार हो गया है। परकोटा में छह देवी-देवताओं (भगवान शंकर, गणेश, सूर्य, हनुमान, माता भगवती, अन्नपूर्णा) के मंदिर भी आकार ले चुके हैं। इन मंदिरों ने परिसर की आध्यात्मिक गरिमा को और ऊंचाई दी है। परिसर समरसता का भी संदेश देता नजर आता है। श्रीराम के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, वशिष्ठ, अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या व माता शबरी के भी मंदिर परिसर में बनकर तैयार हैं। हालांकि यह मंदिर अभी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले गए हैं।

तो तारीख के मुताबिक अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने पर हम सभी सनातन प्रेमी भगवान राम के चरणों में नमन करते हैं। और ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जिसमें रामराज चरितार्थ हो सके। रामराज के बारे में कहा जाता है कि

दैहिक दैविक भौतिक तापा।

राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥

सब नर करहिं परस्पर प्रीती।

चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥

यानि ‘रामराज्य’ में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी को नहीं व्यापते। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदों में बताई हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। रामचरित मानस की यह दो चौपाई ही एक लोक कल्याणकारी राज्य की सही तस्वीर पेश कर रही हैं। रामलला करें कि ऐसा ही भारत आकार ले जैसा राज उनके समय में था और इसमें सभी प्रेमपूर्वक अपनी अपनी मर्यादा में रहकर सुखी और संपन्न हों।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।