
सुप्रीम कोर्ट के कटघरे में UGC Rules 2026, जातिगत भेदभाव के आरोपों पर होगी सुनवाई
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले रेगुलेशन 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। यह मामला उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव, समान अधिकार और संवैधानिक समानता से जुड़ा हुआ है।
■ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, नियमों पर जताई चिंता
याचिका पर त्वरित सुनवाई की मांग करते हुए वरिष्ठ वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी कि UGC के नए नियम देशभर के विश्वविद्यालयों में लागू किए जा रहे हैं और इससे पहले ही असमानता की स्थिति पैदा हो रही है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है और इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि तब तक नियमों में मौजूद कमियों को दूर किया जाना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी को UGC नियमों पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
■ क्या है UGC का नया रेगुलेशन 2026
UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह नया रेगुलेशन अधिसूचित किया था। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी, समान अवसर केंद्र, ओम्बड्सपर्सन और शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना को अनिवार्य किया गया है ताकि छात्रों और कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न की स्थिति में संस्थागत संरक्षण मिल सके।
■ किस बात पर उठा विवाद
नए नियमों के सामने आने के बाद विवाद तब शुरू हुआ जब इन्हें सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि रेगुलेशन में जातिगत भेदभाव की परिभाषा सीमित कर दी गई है और इसका दायरा मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक केंद्रित है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि सामान्य वर्ग का कोई छात्र या शिक्षक जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करता है तो उसे इन नियमों के तहत समान शिकायत निवारण और सुरक्षा का अधिकार नहीं मिल पाएगा।
■ संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का दावा
याचिका में यह भी कहा गया है कि UGC का यह रेगुलेशन संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार, अनुच्छेद 15 के तहत भेदभाव निषेध और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि भेदभाव की परिभाषा को जाति तटस्थ बनाया जाए या फिर वर्तमान स्वरूप में इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए।
■ देशभर में प्रतिक्रिया और बहस
UGC Rules 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। कुछ छात्र और सामाजिक संगठन इन नियमों को वंचित वर्गों के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था बता रहे हैं। वहीं विरोध करने वाले वर्गों का कहना है कि यह नियम समानता के सिद्धांत को कमजोर करता है और इससे नई तरह की असमानता पैदा हो सकती है। कई राज्यों में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन भी दिए गए हैं।
■ अब सुप्रीम कोर्ट क्या तय करेगा
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह तय होगा कि UGC के ये नियम संवैधानिक कसौटी पर खरे उतरते हैं या नहीं और क्या सभी वर्गों के छात्रों और कर्मचारियों को समान रूप से भेदभाव से संरक्षण मिलना चाहिए। अदालत के फैसले का असर देश की उच्च शिक्षा नीति और विश्वविद्यालयों की आंतरिक व्यवस्थाओं पर दूरगामी होगा।




