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सदन के भीतर फौजिया अलीम ने सवाल उठाया कि किस कानून में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया गया है। वहीं बाहर मीडिया से चर्चा में उन्होंने धार्मिक आधार पर आपत्ति जताई। इस दौरान कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान के बयान ने विवाद को और तूल दे दिया।
घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा का विषय हो सकता है, हालांकि उन्होंने राष्ट्रगीत के सम्मान के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।
लगातार शोर-शराबे के बीच प्रश्नोत्तर काल बाधित रहा, लेकिन अंततः बहुमत के आधार पर बजट पारित कर दिया गया। सभापति मुन्नालाल यादव ने ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ में अमर्यादित भाषा के प्रयोग को गलत ठहराते हुए कार्रवाई को उचित बताया।
गौरतलब है कि एक दिन पहले भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सदन में विवाद हुआ था, जिससे बजट सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। लगातार हो रहे हंगामों के चलते शहर के विकास से जुड़े मूल मुद्दे चर्चा के केंद्र से दूर होते नजर आए।