
विक्रम उत्सव 2026: 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में गूंजेगा “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का वैभव,उज्जैन में कलाकारों की कड़ी तैयारी
उज्जैन: विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत 3 से 5 अप्रैल तक मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का भव्य मंचन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए उज्जैन के एक सैकड़ा से अधिक कलाकार दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कलाकार प्रतिदिन 7 से 8 घंटे तक सघन अभ्यास कर रहे हैं, जिसकी तैयारियां देवास रोड स्थित शोध पीठ कार्यालय में जारी हैं।

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा 15 फरवरी से 30 जून तक 139 दिवसीय विक्रम उत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन से प्रारंभ हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी तक पहुंच रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि और दूरदर्शी सोच से यह आयोजन भारतीय संस्कृति के गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहा है। यह भव्य प्रस्तुति विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन द्वारा दी जाएगी। संस्था के अध्यक्ष राजेश सिंह कुशवाहा, सचिव विजेन्द्र वर्मा एवं निर्देशक संजीव मालवीय के मार्गदर्शन में कलाकार मंचन की तैयारियों में जुटे हैं। कार्यक्रम को आधुनिक लाइट एंड साउंड शो की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें हाथी-घोड़े, राजशाही साज-सज्जा, विशाल मंच और आकर्षक नृत्य दर्शकों को रोमांचित करेंगे। युद्ध के दृश्य सम्राट विक्रमादित्य के अद्वितीय शौर्य और भारतीय इतिहास की वीरता को जीवंत करेंगे।
*कई राज्यों में हो चुका सफल मंचन*
विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि भारत की गौरवशाली परंपरा और महापुरुषों के योगदान को रेखांकित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सम्राट विक्रमादित्य के लोक कल्याणकारी गुणों को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से इस महानाट्य का निर्माण किया गया है। इस महानाट्य का मंचन उज्जैन, भोपाल और तेलंगाना के हैदराबाद में किया जा चुका है, जहां इसे हजारों दर्शकों ने सराहा।
अप्रैल 2025 में दिल्ली के लाल किले पर भी इसका भव्य मंचन हुआ था। उस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे सम्राट विक्रमादित्य के गौरव और वैभव को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया था।





