Walk on Foot : जीवन अमृतम है नंगे पैर घास पर चलना, देखिये 8 अप्रतिम लाभ !

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Walk on Foot : जीवन अमृतम है नंगे पैर घास पर चलना, देखिये 8 अप्रतिम लाभ !

डॉ तेज प्रकाश व्यास की एक ख़ास रिपोर्ट 
राष्ट्रीय पैदल दिवस दिवस, हमें पैदल चलने के सरल, स्फूर्तिदायक अभ्यास को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है। चलने के विभिन्न प्रकारों में से, घास पर नंगे पैर घूमना, जिसे ‘अर्थिंग’ के नाम से जाना जाता है, अपने असंख्य लाभों के लिए जाना जाता है। घास पर नंगे पैर चलने का अभ्यास न केवल सादगी की ओर लौटाता है बल्कि कई स्वास्थ्य लाभों का स्रोत भी है। इस लेख में, हम इस सचेतन गतिविधि के आठ प्रमुख लाभों के बारे में तथा भारत वर्ष के पंडित पूर्णानन्द व्यास की जीवन अमृत अभ्युक्ति से अवगत कराते हैं। प्रत्येक लाभ पर एक केंद्रित और जानकारीपूर्ण अभिलेख है।

आइए अर्थिंग की दुनिया में कदम रखें और जानें कि यह प्राकृतिक संबंध हमारी भलाई को कैसे बढ़ा सकता है।

पृथ्वी से संबंध
घास पर नंगे पैर चलने से शरीर को पृथ्वी से नकारात्मक आयनों को अवशोषित करने की अनुमति मिलती है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जमा हुए सकारात्मक आयनों को बेअसर कर सकता है। यह ग्राउंडिंग प्रभाव सूजन को कम कर सकता है, नींद में सुधार कर सकता है और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ा सकता है। यह शरीर के विद्युत चुम्बकीय संतुलन को बहाल करने और उपचार को बढ़ावा देने का एक प्राकृतिक तरीका है।

उन्नत प्रोप्रियोसेप्शन
हमारे पैरों के तलवे तंत्रिका अंत से भरे होते हैं जो पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। घास पर चलना इन तंत्रिकाओं को उत्तेजित करता है, प्रोप्रियोसेप्शन को बढ़ाता है – शरीर की गति, क्रिया और स्थान को समझने की क्षमता। जैसे ही आप नंगे पैर चलते हैं, आपके पैरों के तलवे आपके मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं, जिससे आपके शरीर की गतिविधियों को समायोजित करने और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यह संवेदी उत्तेजना मानसिक स्पष्टता और स्वयं की बेहतर समझ पैदा कर सकती है।

Five benefits of walking barefoot on grass in the morning - सुबह-सुबह नंगे पैर घास पर चलने के पांच फायदे, रोजाना 15 मिनट जरूर निकालें , जीवन शैली न्यूज

तनाव से राहत
घास पर नंगे पैर चलने का कार्य अविश्वसनीय रूप से शांत हो सकता है, जो प्राकृतिक रूप से तनाव से राहत प्रदान करता है। पैरों के नीचे की नरम, प्राकृतिक बनावट दबाव बिंदुओं को उत्तेजित कर सकती है, विश्राम और कल्याण की भावना को बढ़ावा दे सकती है। यह सरल गतिविधि कोर्टिसोल और एड्रेनलीन (एड्रिनल अंत: स्त्रावि ग्रंथि) के स्तर को कम करने, तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकती है।

दर्द और सूजन में कमी
घास पर नंगे पैर चलने के सूजनरोधी प्रभाव अच्छी तरह से प्रलेखित हैं। पृथ्वी का नकारात्मक चार्ज शरीर के सकारात्मक चार्ज को खत्म करने में मदद कर सकता है, पुरानी सूजन को कम कर सकता है और दर्द से राहत में योगदान दे सकता है, खासकर सूजन की स्थिति से पीड़ित लोगों के लिए।

नींद की गुणवत्ता में सुधार
नियमित रूप से घास पर नंगे पैर चलना, खासकर सुबह के समय, आपकी नींद के पैटर्न को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। ग्राउंडिंग प्रभाव को दिन-रात कोर्टिसोल लय को सामान्य करके नींद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए दिखाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप रात में अधिक आरामदायक नींद आ सकती है। अच्छी नींद से हैप्पी हार्मोंस स्त्रावित होते हैं । जो चिर स्वस्थ , रोग रहित मानव जीवन को सुरक्षित करते हैं । विज्ञान यह भी सिद्ध कर चुका है कि हल्के गर्म पानी के सोने के पूर्व स्नान से बढ़िया नींद आती है । (रात को नींद खुले , तो किचन में कुछ भी खाने को दौड़ न लगाएं।)

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाया
घास पर नंगे पैर चलने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो सकती है। पैरों की तंत्रिका अंत की उत्तेजना रक्त परिसंचरण को बढ़ाती है, जो प्रतिरक्षा और शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को बढ़ा सकती है। बेहतर रक्त प्रवाह का मतलब पूरे शरीर में अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाना भी है। तंत्रिका तंत्र श्रेयस्कर होने से मस्तिष्क को इंटरनल कैरोटिड और वर्टीब्रल आर्टरी से मस्तिष्क को श्रेष्ठ रक्त प्रवाह से ऑक्सीजन और ग्लूकोज की श्रेष्ठ आपूर्ति होती है ।
न केवल मस्तिष्क को वरन शरीर की ट्रिलियन कोशिकाएं स्वस्थता प्राप्त करती हैं, याने पूरा शरीर स्वस्थ।

एंटीऑक्सीडेंट का सेवन बढ़ाएँ
पृथ्वी की सतह इलेक्ट्रॉनों से समृद्ध है, जो प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट हैं। नंगे पैर चलने से आपके शरीर को इन इलेक्ट्रॉनों को अवशोषित करने की अनुमति मिलती है, जो आपकी कोशिकाओं को क्षति से बचाने और समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करने में मदद कर सकता है।

भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ
अंत में, नंगे पैर घास पर चलने से भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। यह सचेतनता और वर्तमान-क्षण जागरूकता को प्रोत्साहित करता है, जो मानसिक कल्याण के प्रमुख घटक हैं। यह अभ्यास प्रकृति के साथ गहरा संबंध बनाने, मूड को बेहतर बनाने और शांति की भावना पैदा करने में भी मदद कर सकता है।

स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम
नेशनल वॉकिंग डे घास पर नंगे पैर चलने के सरल लेकिन गहरे प्रभाव की याद दिलाता है। जैसे ही हम इस अभ्यास के असंख्य लाभों को उजागर करते हैं, हमें अपने जूते उतारने, घास पर कदम रखने और स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए पृथ्वी के साथ फिर से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

विशेषज्ञ पूर्णानन्द व्यास बताते हैं  कि पैदल चलना सबसे सरल और सबसे अधिक लाभ देने वाली एक नैसर्गिक विधा है। सूर्योदय उपरांत ,सूर्य की किरणे धरती समीप रात के घनीभूत पेट्रोल डीजल को इवापरेट कर प्रकृति को प्रदूषण शून्य बनाने में मदद करती है ।तो सूर्योदय उपरांत नंगे पैर दूब पर चलिए। अपनी सामर्थ्य अनुरूप 100 से 100000 कदम चलिए । नियम तो शरीर की क्षमता अनुसार रखिए । धीरे धीरे पैदल चलने की क्षमता बढ़ती चली जाएगी । दूब पर चलिए । चल सकते हैं तो 20 ,20 मिनिट के तीन भागों में चलिए , विशेषकर बढ़ी उम्र के मानव । तय स्पॉट पर 20 मिनिट पैदल चलकर 5 मिनट का रेस्ट दीजिए । शुद्ध पानी साथ रखिए। आवश्यकतानुसार पानी पीते रहिए। शरीर हाइड्रेटेड बना रहना अति आवश्यक है। पसीना पोछने के लिए तौलिया भी साथ रखिए । एक स्टिक भी स्वसुरक्षा के लिए रखें । सुस्वस्थता मानव का जन्म सिद्ध अधिकार है , तो स्वास्थ्य सुरक्षा के उपक्रम तो पालने ही पड़ेंगे । पैदल चलने से मानव हृदय मानो बुलेटप्रूफ बन जाएगा।

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥*
जो आहार और आमोद-प्रमोद को संयमित रखते हैं, कर्म को संतुलित रखते हैं और निद्रा पर नियंत्रण रखते हैं, वे योग का अभ्यास कर अपने दुखों को कम कर सकते हैं।

इंदौर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सौरभ व्यास के अनुसार अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल पर छपी रिसर्च बताती है कि रोजाना पर्याप्त कदम चलने (Walking Benefits) से दिल को परेशान करने वाली कई बीमारियों से बचाव होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा 60 साल से बुजुर्ग लोगों को मिलता है। वॉल्किंग से बुढ़ापे में होने वाले हार्ट अटैक व स्ट्रोक से बचाव किया जा सकता है।

मेडिकल न्यूज टुडे के मुताबिक, हृदय को हेल्दी रखने के रोजाना 10,000 कदम तक चलना लाभ प्रद है। नियम कदमों का स्वयं तय करिएगा।
पैदल चलने के लाभ
तेजी से कैलोरी बर्न होकर पतले बनते हैं।
ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है।
हड्डियों के जोड़ मजबूत रहते हैं।
हृदय मस्तिष्क सुरक्षित होते हैं।
इम्यून सिस्टम सही काम करता है।
हमेशा एनर्जी बनी रहती है।
मूड अच्छा रहता है।

सबसे अंत में वरन सबसे उत्तम
तवलीन फाउंडेशन के ग्लोबल हैप्पीनेस लीडर डॉक्टर गुरमीत जी नारंग, जिनके हैप्पीनेस साहित्य को विश्व के 15 देश पढ़ रहे हैं।विश्व स्तरीय शारीरिक मानसिक स्वस्थता के लिए विश्व प्रसिद्ध सोल स्पेस जर्नल का प्रकाशन करते हैं। वे अपने चेतना केंद्र पर जीवन मूल्यों पर आधारित अवेकेनिंग जाय (Awakening Joy ) सर्टिफिकेट कोर्स भी करवाते हैं। नई पीढ़ी भिन्न भिन्न जीवन के प्रेशर में असमय Saucide कर रही है। जीवन को सुरक्षित स्वस्थ और प्रसन्नता मय बनाने वालो के लिए चेतना केंद्र कल्पवृक्ष है।tavleenfoundation.org का अवलोकन कर सकते हैं। प्रतिभागी गूगल पर तवलीन फाउंडेशन से संपर्क कर सकते हैं । प्रतिभागी+91 90090 04020 व्हाट्सएप नंबर पर अपनी जिज्ञासा अंकित कर जानकारी ले सकते हैं।
डॉक्टर गुरमीत जी नारंग के अनुसार “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास है तथा स्वस्थ मस्तिष्क में ही शारीरिक मानसिक प्रसन्नता का वास है।”

जीवन चलने का नाम। जो चलेगा , सो चलेगा। हृदय एवम शरीर रहेगा पूर्ण स्वस्थ। चलने या वॉकिंग जैसा जीवन रक्षक विधा है उपयोगी 365  ।

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