हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे…

52

हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ साल का सफर तय कर लिया है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से लेकर डॉ. मोहन भागवत तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज को अपनी ताकत बनाकर

समाज की ताकत बनने में सफलता पाई है। और यह दावा करने का आत्मबल अर्जित किया है कि भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के युवाओं को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भोपाल में 2 जनवरी 2026 को संबोधित किया। युवाओं से आह्वान किया कि हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के प्रसंग पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का देशभर में प्रवास हो रहा है। इसी श्रृंखला में उनका दो दिवसीय प्रवास भोपाल में हुआ। प्रवास के पहले दिन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में उन्होंने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि संघ अपने जन्म से ही लक्ष्य लेकर चल रहा है कि अपने धर्म-संस्कृति का संरक्षण कर, अपने भारत को परम वैभव पर लेकर जाना है। संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक यह प्रतिज्ञा करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश सम्पूर्ण समाज के योगदान से ही बड़ा होता है। नेता, नीति और व्यवस्था, ये सब तब सहायक होते हैं जब समाज गुणसम्पन्न होता है। भारत का युवा जाग गया है, वह अपने देश को समर्थ बनाना चाहता है। संघ युवाओं से आह्वान करता है कि वे संघ की शाखा में आएं या फिर संघ की योजना से चल रहे अपने रुचि के कार्य में जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि यदि हमें देश के लिए कुछ करना है तो इस मार्ग में हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे। दुनिया में संघ ने ही एकमात्र ऐसी पद्धति दी है, जो अच्छी आदतें विकसित करती है।

डॉ. मोहन भागवत वास्तव में राष्ट्र को समर्पित एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व और चिंतक, विचारक और ज्ञान से लबालब कुशल वक्ता हैं। डॉ. भागवत को सुनकर श्रोता गर्व की अनुभूति करते हैं। पर यह बात भी उतनी ही सही है कि जितना संघ को लेकर भागवत के दावे हैं कि समाज की जागरूकता से बनी देश की भाजपा सरकारों के नेता गुणों को कितना धारण किए हैं यह भी देखने वाली बात है और इनमें कितना अहंकार और स्वार्थ भरा हुआ है यह भी चिंता में डालने वाली बात है। और इन सब गुणों से परिपूर्ण

यह चेहरे जब डॉक्टर भागवत आते हैं तो उनके सामने ही नजर आते हैं। डॉ. भागवत आपकी हर बात सही है और यह सौ फीसदी सही है कि संघ की शाखा देशभक्ति सिखाती है। पर इन्हीं शाखाओं से देशभक्ति का पाठ पढ़ने के बाद राजनीति में सफलता के शिखर पर पहुँचने वाले वर्तमान नेता अब संघ की सीख से दूर और बहुत दूर खड़े दिखाई देते हैं। सरसंघचालक डॉ. भागवत जी ने कहा कि हम कई बार असुरक्षा और चिंता के साथ जीते है। लेकिन इसकी बजाय हमें भयमुक्त होकर जीना चाहिए। स्वयं से पहले देश को रखना चाहिए। पर अब हर जगह स्वयं ही स्वयं नजर आ रहा है। और इसीलिए भय, चिंता और असुरक्षा सभी तरफ दिखाई दे रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा, जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिन्दू पहचान हम सबको जोड़ती है। हम सबकी एक संस्कृति और धर्म है। हम सबके पूर्वज समान हैं। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में व्यक्त किए। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान में चार प्रकार के हिन्दू रहते हैं- एक, जो कहते हैं कि गर्व से कहो हम हिन्दू है। दो, जो कहते हैं कि गर्व की क्या बात हैं, हम हिन्दू हैं। तीन, जो कहते हैं कि जोर से नहीं बोलो, आप घर में आकर देखो, हम हिन्दू ही हैं। चार, जो भूल गए हैं कि हम हिन्दू हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब हम यह भूल जाते हैं कि हम हिन्दू हैं तो विपत्ति आती है। भारत का इतिहास देख लीजिए। इसलिए हिन्दू को जगाना और संगठित करना आवश्यक है। हमें समझना होगा कि हिन्दू धार्मिक पहचान से बढ़कर, स्वभाव और प्रकृति है। धर्म को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का अर्थ रिलीजन नहीं है। धर्म का अर्थ पूजा-पद्धति नहीं है। धर्म सबको साथ लेकर चलता है। सबका उत्थान करता है। धर्म सबके लिए आनंददायक है। स्वभाव धर्म है। कर्तव्य धर्म है। आपस में सद्भावना रखकर सब लोग चलें, इसके लिए जो संयम चाहिए, वह धर्म है।

उन्होंने कहा कि रुचि-प्रकृति के भेद के अनुसार रास्ते अनेक हैं लेकिन हम सबको जाना एक ही जगह हैं। मनुष्य प्रकृति अनुसार अपने मार्ग का चुनाव करता है। सरसंघचालक ने कहा कि संघ के बारे में नैरेटिव बहुत चलते हैं। कई बार किसी को जानने के लिए उसके जैसे किसी से तुलना करते हैं। लेकिन जो अनूठा हो, उसकी तुलना नहीं की जा सकती। संघ दुनिया में अनूठा संगठन है।

डॉ. भागवत जी ने बताया, संघ ने प्रारंभ से तय किया कि समाज में ‘प्रेशर ग्रुप’ के तौर पर संगठन खड़ा नहीं करना है। अपितु सम्पूर्ण हिन्दू समाज का ही संगठन करना है। क्योंकि समाज ही किसी देश का भाग्य निर्धारित करता है। नेता, नीति, अवतार तो सहायक हो सकते हैं। देश को बड़ा बनाने में गुणसम्पन्न समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। स्वयंसेवकों के किसी भी कार्य को संघ रिमोर्ट कंट्रोल से नहीं चलाता है। समाज के सभी मत-संप्रदायों में इस प्रकार की सज्जन शक्ति भी है। इन सबके बीच एक नेटवर्क होना चाहिए। समाज की यह सज्जन शक्ति एक-दूसरे की पूरक बने। यही वातावरण बनाने का काम संघ कर रहा है।

तो संघ कल तक समाज निर्माण के जरिए अपने लक्ष्य को पाने की तपस्या करता नजर आया तो एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज भी अपने विस्तारित लक्ष्य को पाने में दिन रात जुटा है। हमें गुणों को धारण करना होगा और अहंकार एवं स्वार्थ छोड़ने होंगे… यह वाक्य युवाओं को तभी प्रभावित कर पाएगा जब समाज में प्रेरणास्रोत बने और डॉ. भागवत के व्याख्यानों में उनके सामने बैठने वाले नेता इन भावों को अपने आचरण में समाहित कर पाएंगे। और भागवत को सुनने वाले श्रोताओं में भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का भाव जग सके, संघ की दूसरी शताब्दी की यात्रा की यह बड़ी चुनौती है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।