

वाह री प्रदेश पुलिस…फरार टीआई पर नहीं आई आंच और पत्रकार आधी रात गिरफ्तार…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जन्मदिन यानि 25 मार्च 2025 का दिन पत्रकारों के लिए बेहद खास रहा। आधी रात एक पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को गिरफ्तार करने वाला थाना प्रभारी लाइन हाजिर कर दिया गया, तो पत्रकार को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया। पत्रकारों ने मंगलवार सुबह कटारा हिल्स थाने में प्रदर्शन किया और पुलिस पर सिंगोरिया के खिलाफ मनगढ़ंत मामला दर्ज करने का आरोप लगाया। इस दौरान प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ के प्रभारी आशीष अग्रवाल भी थाने पहुंचे और प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का पत्रकारों के हित के लिए थाने जाना और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलना वाकई सराहनीय और काबिले तारीफ है। मामले ने जब सियासी तूल पकड़ा, तब सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी अफसरों को अपनी भावना से अवगत करा दिया था। तो पुर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सहित तमाम नेताओं ने पत्रकार को तत्काल रिहा करने और जिम्मेदार पुलिस अफसर पर कार्यवाही की मांग की।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने 20 मार्च को हुई दुर्घटना के सिलसिले में पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को सोमवार रात को गिरफ्तार किया। सिंगोरिया की गिरफ्तारी के बाद मीडिया कर्मियों ने सुबह कटारा हिल्स थाने के बाहर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके खिलाफ मनगढ़ंत मामला दर्ज किया है। दोपहर में सत्र अदालत ने सिंगोरिया को जमानत दे दी। तो पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) संजय अग्रवाल ने कहा कि कटारा हिल्स थाने के प्रभारी कृष्ण गोपाल शुक्ला को लाइन हाजिर कर दिया गया है। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रजनीश कश्यप ने बताया कि चार से पांच दिनों की जांच के बाद सिंगोरिया को दुर्घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।प्राथमिकी के अनुसार, सिंगोरिया और उनके साथियों को कई धाराओं में मामला दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। एफआईआर के अनुसार, कटारा हिल्स पुलिस थाने की सीमा के अंतर्गत विवेकानंद कॉलोनी के पास एक वाहन (एसयूवी) ने शिकायतकर्ता शेख अकील के दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी और वाहन में सवार लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की और दुर्व्यवहार किया। प्राथमिकी के मुताबिक, वाहन सवार लोगों ने अकील से एसयूवी को नुकसान पहुंचाने के लिए 50,000 रुपये की मांग की। इस बीच, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने मामले का संज्ञान लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को बिना किसी अपराध के झूठे मामले के आधार पर कल रात गिरफ्तार कर लिया गया। पत्रकारों के कड़े विरोध के बावजूद उन्हें आज (मंगलवार) जेल भेज दिया गया। राजधानी के सभी पत्रकार इस गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं।” कमलनाथ ने सिंगोरिया की रिहाई की मांग करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
खैर मामला सियासी नहीं था, बल्कि एक पत्रकार पर अत्याचार का है। पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट रजनीश बरया का कहना है कि पत्रकार कुलदीप सिंह सिंगोरिया के खिलाफ पुलिस की एफआईआर पूरी तरह से फर्जी है। पुलिस ने मनगढ़ंत मामले में जानबूझकर अड़ीबाजी करने की धाराएं लगाईं लेकिन वो कोर्ट में इसके लिए जरूरी फैक्ट्स प्रस्तुत नहीं कर पाई। ये केस पूरी तरह से फर्जी है।
राजधानी भोपाल में हाल ही में एक फरार टीआई को हाईकोर्ट से जमानत मिलने की चर्चा चारों तरफ हुई है। भोपाल में फर्जी कॉल सेंटर संचालकों को बचाने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में अंडर ग्राउंड हुए निलंबित टीआई जितेंद्र गढ़वाल को जबलुपर हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत को मंजूर कर लिया। कथित मुख्य आरोपी एएसआई पवन रघुवंशी अब भी फरार है। उसके साथ एएसआई मनोज सिंह और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य आरोपी मोइन अंशुल पार्षद भी फरार हैं।
तो है न मजेदार बात। कि गंभीर आरोपों से घिरे टीआई और आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुच पाई और अंडरग्राउंड रहकर उन्होंने जमानत भी ले ली। जबकि इस मामले में पुलिस आयुक्त कड़ी कार्यवाही के पक्षधर थे। वहीं एक साधारण मामले में पत्रकार को आधी रात में गिरफ्तार कर ऐसा व्यवहार किया गया, मानो वह माफिया हो। वाह री मध्यप्रदेश पुलिस…साबित कर दिया कि पुलिस जो चाह ले, वही कर सकती है…।