Wrong Attitude of ADG : सीधी के ADG ने पुलिस कार्रवाई को सही बताया, ये CM के निर्देशों के विपरीत

  लॉकअप में कपड़े उतराने की कार्रवाई को विधिसम्मत बताया

1333

Bhopal : सीधी के पत्रकारों को अर्धनग्न करके लॉकअप में बंद करने के मामले में ADG केपी वेंकटेश्वर राव का बयान की सवाल खड़े करता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सख्त निर्देश पर पत्रकारों पर गलत कार्रवाई करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया। जबकि, ADG ने पुलिस की कार्रवाई को सही और विधि सम्मत बताया! उनका कहना है कि पकड़े गए किसी भी आरोपी को इसी तरह थाने के लॉकअप में बंद किया जाता है, ताकि वह ख़ुदकुशी जैसी कोई हरकत न करे!

ADG के इस बयान से मुख्यमंत्री के निर्देश की अवहेलना प्रतीत होती है! क्योंकि, ADG पुलिस की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं। जबकि, कानून के जानकारों का कहना है कि कभी किसी आरोपी को थाने के लॉकअप में कपडे उतराकर बंद नहीं किया जाता! रिटायर IG एनके त्रिपाठी का भी कहना है कि ADG का यह कहना अनुचित है! लॉकअप में बंद करने से पहले आरोपी की तलाशी ले जाती है जो जरूरी भी है! ताकि उसके पास कोई हथियार या कोई घातक वस्तु न हो! पर, अर्धनग्न करना अनुचित कार्रवाई है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) केपी वेंकटेश्वर राव के मुताबिक सोशल मीडिया पर विधायक के बेटे पर अनर्गल टिप्पणी के मामले में नीरज कुंदेर को गिरफ्तार किया गया था। उसके समर्थन में एक कथित पत्रकार कनिष्क तिवारी कुंदर के कलाकार साथियों को लेकर सिटी कोतवाली थाने के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। उन्हें प्रिवेंटिव मेजर के तहत गिरफ्तार किया गया। थाने में कपड़े इसलिए उतरवाए जाते हैं, ताकि गिरफ्तार व्यक्ति सुसाइड जैसे कोई कदम न उठाए। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर की हम जांच करा रहे हैं। लेकिन, पुलिस ने प्रक्रिया का पालन किया है।
इस घटना के दो दिन बाद गिरफ्तार हुए लोगों की अर्धनग्न फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसकी वजह से पत्रकारों द्वारा पुलिस के ऐसे व्यवहार की निंदा की गयी, लेकिन और कोई पत्रकार वहां मौजूद न होने के कारण सवाल भी उठते रहे. हालांकि पत्रकारों के दमन जैसी कोई घटना नहीं हुई है और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कपड़े उतरवाने की कार्रवाई को थाने का प्रोटोकॉल बताया|

ये मामला सीधी के बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करना पत्रकार को महंगा पड़ गया। नीरज कुंदेर एक नाट्य समिति के संचालक हैं, जो थिएटर कलाकारों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। नीरज पर सोशल मीडिया पर फेक आईडी (अनुराग मिश्रा नाम से आईडी बनाई) बनाकर MLA केदारनाथ के खिलाफ अपशब्द लिखने का आरोप है। जिसकी शिकायत थाने में दर्ज हुई और नीरज कुंदेर पर विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया।
नीरज कुंदेर के समर्थन में कुछ पत्रकार और नाट्य कर्मियों ने सिटी कोतवाली थाने के सामने प्रदर्शन किया तो पुलिस ने पत्रकारों और नाट्य कर्मियों को जमकर पीटा और उनके साथ बदसलूकी की।  पत्रकारों के कपडे उतारकर उनका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कराया गया। रातभर उन्हें थाने में रखकर मारपीट की गई और सुबह जमानत दी। पुलिस की इस कार्रवाई की देशभर में निंदा हो रही है। लेकिन, पुलिस ADG ने इस कार्रवाई को सही ठहराया।
मामला दो अप्रैल की शाम का है जब कुछ कलाकार सिटी कोतवाली के सामने बैठकर नीरज कुंदेर नाम के कलाकार की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। सीधी के नीरज कुंदेर नाट्य कर्मी है और कई कलाकारों के मार्गदर्शक हैं. उन पर आरोप था कि उन्होंने फेसबुक में अनुराग मिश्रा नाम से आईडी बना रखी थी जिससे वे सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे को अपशब्द कमेंट किया करते थे। मामला दर्ज होने पर पुलिस ने नीरज कुंदेर को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जेल भेज दिया गया है। इसी घटना के विरोध में उनके साथी कलाकार सिटी कोतवाली के सामने प्रदर्शन कर रहे थे जिसकी अगुआई एक यू-ट्यूबर पत्रकार कनिष्क तिवारी कर रहे थे। हालांकि, कनिष्क का कहना है कि वे कवरेज कर रहे थे लेकिन यह बात भी सच है कि उस समय उनके अलावा कोई और पत्रकार वहां मौजूद नहीं था।

10 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया
प्रदर्शन कर रहे कलाकारों और पत्रकारों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, तो पुलिस पुलिस ने प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए करीब 10 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया जिसमें यू-ट्यूब कनिष्क तिवारी भी शामिल थे। थाने की प्रक्रिया के तहत उनके कपड़े उतरवाए गए और रात भर उन्हें थाने में रखकर सुबह 151 की कार्रवाई करते हुए जमानत पर छोड़ा गया।

वायरल फोटो की जांच होगी
सीधी पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव का बयान कुछ और ही कहानी कहता है। उन्होंने कहा कि जो फोटोग्राफ्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए उनकी हम उसकी उच्च स्तरीय जांच कर रहे हैं। हमने कनिष्ठ कर्मचारियों को निर्देश दिए कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया की जांच की जाए और अगर कोई विभागीय गलती पाई जाती है तो सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।