Tuesday, August 20, 2019
'इंदिरा का खून, प्रियंका इज़ कमिंग सून': इलाहाबाद में लगे नारे

'इंदिरा का खून, प्रियंका इज़ कमिंग सून': इलाहाबाद में लगे नारे

मीडियावाला.इन।

क्या कांग्रेस का नया चेहरा साबित हो सकती हैं प्रियंका

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है और अब यह चर्चा है कि उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा सोनिया गांधी की जगह रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी। कई लोग यह समझते हैं कि प्रियंका गांधी का राजनीति में आना खासकर, कांग्रेस की राजनीति में आना कांग्रेस के लिए एक बड़ा आधार हो सकता है। लोगों को लगता है कि प्रियंका राहुल की तुलना में लोगों को ज्यादा पसंद आ सकती हैं।

प्रियंका ज़्यादा मुखर हैं

प्रियंका ने अभी इस बात की कोई घोषणा नहीं की है कि वे 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी या नहीं और अगर लड़ेगी तो रायबरेली से लड़ेंगी या नहीं। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बारे में सोच समझ कर फैसला देंगे। कई लोगों को यह लगता है कि प्रियंका वाड्रा अपने भाई राहुल गांधी की तुलना में ज्यादा करिश्मा दिखा सकती हैं। वे ज्यादा मुखर हैं और खुलकर अपनी बात कहती हैं। वे ज्यादा स्पष्ट विचारों वाली नेता साबित हो सकती हैं। 

इंदिरा गाँधी की झलक 

कई लोगों को प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की झलक नजर आती है और जो लोग इंदिरा गांधी को पसंद करते हैं उन्हें प्रियंका का नेता बनाना पसंद आएगा। अगर कांग्रेस मौका दे तो प्रियंका इंदिरा गांधी की जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती हैं। प्रियंका से अपेक्षा करने का एक कारन यह बताया जाता है कि राहुल गांधी ने अपने करीब डेढ़ दशक के राजनीतिक जीवन में कोई बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल नहीं की है। राहुल गांधी जी के बयान और गतिविधियों से कांग्रेस में तत्काल प्राणफूंकना मुश्किल है। 

आक्रामक तेवर

अगर प्रियंका गांधी वाड्रा को मौका मिला तो यह बात स्पष्ट होगी कि गांधी परिवार और कांग्रेस में बेटा और बेटी दोनों बराबर हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक स्तर नीचे आ गई थी कांग्रेस की स्थिति खराब होने में उसके नेताओं की निष्क्रियता भी एक प्रमुख कारण है। कांग्रेस की इस आक्रामकता की कमी को प्रियंका दूर कर सकती हैं। वे ज्यादा आक्रामक होकर कोई भी बात कह सकती हैं। प्रियंका गांधी ऐसे कई मौके पर आए जब उन्होंने यह बात भी साबित की है कि वे स्पष्ट निर्णय करने में कभी देर नहीं लगाती हैं। 

पर्दे के पीछे सक्रिय

प्रियंका गांधी वाड्रा भले ही खुलकर अभी राजनीति में नहीं आई हो, लेकिन पर्दे के पीछे से राजनीतिक गतिविधियों पर लगातार निगाहें बनाकर रखती हैं। इसी मार्च में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में प्रियंका ने पूरे दिन पर्दे के पीछे रहकर कार्यक्रमों का जायजा लिया। उन्होंने राहुल गांधी, मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के भाषणों को सुना और तमाम अन्य वक्ताओं के भाषणों पर भी चर्चा करती रहीं। अधिवेशन शुरू होने के दो-तीन दिन पहले से ही वे इंदिरा गांधी स्टेडियम की तमाम तैयारियों को देखती रही थी। हर छोटी बड़ी बात पर उन्होंने ध्यान दिया था।

रायबरेली या फूलपुर 

यह बात और है कि प्रियंका खुद इस बारे में करीब 6 महीने पहले कह चुकी हैं कि वे रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन जिस तरह से उनकी सक्रियता देखने को मिल रही है उससे यह स्पष्ट है कि वे राजनीति में आ सकती हैं। अभी इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन यह तय है कि उनकी राजनीति में सक्रियता कई लोगों को प्रभावित कर सकती है। इलाहाबाद के जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रियंका गांधी को रायबरेली से के बाजार फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाने का फैसला लिया था क्योंकि फूलपुर सीट कभी नेहरू जी की सीट हुआ करती थी, लेकिन प्रियंका वाड्रा ने अपने आप को केवल अमेठी और रायबरेली तक सीमित कर लिया है। 

नया चेहरा 

उत्तरप्रदेश के पिछले उपचुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का जो गठबंधन हुआ था, उसमें भी प्रियंका की प्रमुख भूमिका बताई जाती है। प्रियंका वहां सोनिया गांधी के दूत की तरह सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संपर्क में थीं। प्रियंका कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल थी। राजनीति में आने के पहले इंदिरा गाँधी को गूंगी गुड़िया माना जाता था, सोनिया गाँधी के बारे में भी ऐसी ही धारणा थी। प्रियंका राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हों तो वे कांग्रेस का नया चेहरा साबित हो सकती हैं।
डॉ प्रकाश हिन्दुस्तानी  

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।