Saturday, December 15, 2018
अब आदर्श आचार विचार का मामला है

अब आदर्श आचार विचार का मामला है

अभी तक जो हुआ सो हुआ। सरकार को जो करना था सो किया। पर अब टाइम ओवर हो गया। उम्मीद तो बहुत थी कि 12 अक्टूबर तक का समय मिल जाएगा तो जितने हाथ पाँव मारने हैं मार लेंगे पर मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अफ़सर रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत के सामने किसी की नहीं चली। सो 5 अक्टूबर की जगह बड़ी मुश्किल से 6 अक्टूबर हो पाई और आदर्श आचार-विचार रखने के फ़रमान जारी हो गए। अब मध्यप्रदेश में शिवराज और कमलनाथ के बीच ज़ोर आज़माइश की उल्टी गिनती शुरू हो गई।                                                      

आदर्श आचार के आइने में पहली परीक्षा कांग्रेस की है। इस बार एक छाते के नीचे कांग्रेस के बड़े-बड़े धुरंधरों ने पूरी बरसात निकाल दी। फिर भी गुटबाज़ी की एक भी बूँद किसी के कुर्ते पर टपकी नज़र नहीं आई।यहाँ तक कि राहुल गांधी के भोपाल में रोड शो के पहले दिग्गज कांग्रेसी दिग्विजय सिंह का कटआउट नहीं लगा लेकिन चौक-चौराहे की यह चर्चा भी कांग्रेसियों की ज़ुबान पर नहीं आई और न ही कांग्रेस नेताओं के दिलों में दरार कोई देख पाया। दिग्विजय सिंह ने दरियादिली दिखाई और कह दिया कि कटआउट लगाने के लिए उन्होंने ही मना किया था। कमलनाथ ने बड़प्पन दिखाया और इस बड़ी ग़लती के लिए माफ़ी माँग ली। अब लगा कि नहीं कि कांग्रेस में बदलाव है। कांग्रेस ने सही स्लोगन दिया है अब वक़्त है बदलाव का। इस पर कांग्रेस नेता इस बार खरे उतरते नज़र आ रहे हैं। पर परीक्षा इस बात की है कि कांग्रेस ने प्रत्याशियों की पहली सूची जल्दी जारी करने का दावा किया था लेकिन उस पर खरी नहीं उतरी। अभी भी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक की चर्चा चल रही है। यानि कि फिर वही ढर्रा। न सर्वे काम आए, न अनुशासन और न एकता। सितंबर में प्रत्याशियों की जिस पहली सूची जारी होने का दावा किया जा रहा था, वह आचार संहिता लगने के बाद ही जारी होगी। अब ऐसा न हो कि सूची जारी होने के बाद आदर्श एकता बिखरती दिखे, क्योंकि गुटबाज़ी से दूर रहने के सब्र की भी कोई सीमा होती है। वक़्त है बदलाव का स्लोगन और कितना असर दिखाता है, यह देखने के लिए 52 दिन का समय शेष है। प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने की पहली परीक्षा में कमलनाथ की कांग्रेस संतोषजनक परिणाम हासिल नहीं कर पाई।  अब कमल के नाथ के सामने कमल वाली भाजपा ताल ठोकने को तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में चुनौती देकर गए हैं कि जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज़्यादा खिलेगा। अब 11 दिसंबर को मतगणना के बाद नाथ का चेहरा कमल की तरह खिलता है या फिर प्रदेश में चौथी बार कमल खिलता है, यह देखने वाली बात है। अब आदर्श आचार-विचार के साथ मध्यप्रदेश में महाकौशल में कमलनाथ, विंध्य में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, ग्वालियर-चंबल और मालवा में ज्योतिरादित्य सिंधिया. बुंदेलखंड में मिली-जुली और पूरे प्रदेश में दिग्विजय की परीक्षा का समय आ गया है। सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, सत्यव्रत चतुर्वेदी सहित कांग्रेस के अन्य कर्णधारों के आचार-विचार जनता को कितना प्रभावित करते हैं? 2018 में सबके कांग्रेस प्रेम और जनता से प्रेम का असर मैदान में दिखेगा। निष्ठा, समर्पण, ईमानदारी और वफ़ादारी के साथ ही अन्य सभी अलंकरण भी कांग्रेस नेताओं के साथ दाँव पर लगे हैं। दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है।                      

अब बात करें भाजपा की और उनके जननायक शिवराज की। तो तेरह साल से मुख्यमंत्री शिवराज का कोई सानी नहीं है। अब प्रदेश की सवा सात करोड़ जनता के इस पुजारी का वश चले तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जनता को ही बिठा दे। और दिल खोलकर और हाथ पसारकर कह दे कि जो फ़ैसले लेने हों सो ले लो। हमारी हर साँस तुम्हारे लिए है। चाहे जितना क़र्ज़ लेना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे। तुम्हें घी में डुबकी लगवाने की ख़ातिर हम क़र्ज़ की नदियाँ बहा देंगे। लेकिन जन्म से लेकर मरने तक पूरा इंतज़ाम करने से मुँह नहीं मोड़ेंगे। बस तुम्हारी ज़िम्मेदारी इतनी है कि 2018 में प्रदेश में दो सौ पार करा दो और अपने मोदी जी की ख़ातिर 2019 में 29 में से 29 सीटें मामा की झोली में डाल दइयों। हम जियेंगे भी तुम्हारी ख़ातिर और अगर मरना पड़ा तो मरेंगे भी तुम्हारे लिए। प्रदेश की जनता हमारी भगवान और हम उसके पुजारी। वे भइया आकर हमें घोषणा मशीन बोल गए। हाँ हम घोषणा मशीन है...जनता की भलाई के लिए जो घोषणा करनी पड़ेगी करेंगे। पर एक घोषणा जननायक के गले पड़ गई। वह है एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट में जाँच के बाद ही गिरफ़्तारी की घोषणा। अब आदर्श आचार-विचार में यह दूर-दूर तक पूरी होती नहीं दिख रही। अब सरकार 11 अक्टूबर को हाईकोर्ट में अगली तारीख़ पर क्या मुँह दिखाएगी। कि यह कहेगी कि साहब आदर्श आचार-विचार ने हमारे हाथ बाँध दिए। अब चौथी बार जनता के पुजारी बने तो शपथ के बाद पहली फ़ाइल जाँच के बाद गिरफ़्तारी की निपटाएँगे साहब। वैसे मोदी जी ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम कर जनता को बड़ी सौग़ात दे ही दई। मध्यप्रदेश सरकार पर 2000 करोड़ का बोझ आएगा। कोई बात नहीं, ज़रूरत पड़ी तो थोड़ा क़र्ज़ और ले लेंगे। अब जनता के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा। ख़ैर अब मध्यप्रदेश के मंदिर में सवा सात करोड़ जनता रूपी भगवान की पूजा करने का हक़ शिवराज पुजारी को चौथी बार मिलने के फ़ैसले की घड़ी आ गई है। पूजा से भगवान ख़ुश हैं या ख़फ़ा, 11 दिसंबर को पता लगेगा। पर मामला आसान नहीं है। वरना इस बार जननायक को ऐसे समझौते न करने पड़ते। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल ग़ौर को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया था 75 पार के नाम पर। अब मोदी के मंच पर उनके साथ ही माला में गुँथना पड़ा। उमा भारती को विधानसभा चुनाव में प्रदेश के विकास की नींव रखने का क्रेडिट देना पड़ा। वही उमा जिन्हें कभी मध्यप्रदेश में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती थी और कहा जाता था कि वे उत्तर प्रदेश से सांसद हैं, आज वे मंच से शिव की ख़ातिर वोट माँग रही है। यानि अब जन नायक नहीं बल्कि भाजपा का हर नायक कमर कस कर मैदान में है। साधु-संत, पुजारियों और आशा-उषा कार्यकर्ताओं  पर डंडे चलवाए तो एक दिन बाद पुजारियों को सौग़ात भी दे दी। पर अब भी बहुतों को देना बाक़ी था कि आचार संहिता आ गई। अब घोषणा नहीं पर उम्मीदवारों की सूची जारी करने का समय है सो वह भी करेंगे। उपलब्धियाँ गिनाएँगे, जनता को जगाएँगे और जीते तो चौथी बार सरकार बनाएँगे।                          

सपाक्स, आम आदमी पार्टी और अजाक्स क्या कमाल दिखा पाते हैं, यह भी दिलचस्प है। पुराने समीकरण बिगड़ेंगे, नए समीकरण बनेंगे जिस तरह कांग्रेस की एकता और भाजपा में उमा-ग़ौर की आवाभगत। इस विधानसभा चुनाव में आदर्श आचार-विचारों ने आकार लिया। अब आदर्श आचार संहिता के साए में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ़ होगा।

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कौशल किशोर चतुर्वेदी

श्री कौशल किशोर चतुर्वेदी भोपाल में जाने-माने पत्रकार हैं। वे वर्तमान में न्यूज़ 360 चैनल के एडिटर हैं।