Monday, September 23, 2019
'लाइक अ बर्ड ऑन द वायर',एक अधूरी प्रेम कहानी: आईएएस छबि भारद्वाज का उपन्यास

'लाइक अ बर्ड ऑन द वायर',एक अधूरी प्रेम कहानी: आईएएस छबि भारद्वाज का उपन्यास

मीडियावाला.इन। 2008 बैच की आईएएस छवि भारद्वाज की छबि मेहनत और निडरता की मिसाल कायम करने वाली अधिकारी की हैं। उन्हें एक सशक्त और साहसी महिला अफसर के रूप में जाना जाता है।  वे मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम कमिश्नर के पद पर कार्यरत रहीं हैं .वर्तमान में वे जबलपुर कलेक्टर हैं । छवि भारद्वाज के पति  नंद्कुमारम भी आई ए एस अधिकारी हैं।इन दिनों छबि  अपने उपन्यास को लेकर चर्चा में है .'लाइक अ बर्ड ऑन द वायर' नाम से यह उपन्यास हाल ही में प्रकाशित हुआ है।उपन्यास का विषय काल्पनिक है ,पर आई ए एस के जीवन को प्रशासनिक दबावों के अलावा राजनैतिक दबावों को भी झेलना होता है जिसका प्रभाव उनके अनुभवों के आधार पर ही उपन्यास की विषय वस्तु में शामिल हुआ है . उपन्यास की कहानी कुछ इस प्रकार है -

नीथरा कौल। अकेली, सुंदर, तेज और कुशल आईएएस। जो सिर्फ सही काम करने में विश्वास रखती है। लेकिन, उसके जीवन में सब कुछ सही नहीं है। उसका दिल टूटा है, काम में मिसफिट है और निराश है, इसकी वजह है उनकी अधूरी प्रेम कहानी।
दूसरी तरफ है, अविनाश राठौड़ भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस) में नीथरा के बैचमेट। नीथरा उसे बहुत प्यार करती थी। महत्वाकांक्षी अविनाश की जिंदगी नीथरा से उलट है। मसूरी में करियर की शुरूआती ट्रेनिंग के दौरान दोनों नजदीक आते हैं और प्रेम पनपता है। लेकिन यह कहानी शादी में तब्दील नहीं हो पाती दोनों अपनी नौकरी में व्यस्त हो जाते हैं।

लेकिन किस्मत एक बार फिर दोनों को साथ ला खड़ा करती है लेकिन अब हालात बदले हुए हैं। नीथरा तो अब भी अकेली है लेकिन अविनाश की जिंदगी में अब उसकी पत्नी और एक बच्चा भी है। दोनों फिर अपने आप को संबंधों के भंवर में फंसा पाते हैं। क्या नीथरा को उसका प्यार मिलेगा? इसे एक किताब के रूप में लिखा है, 2008 बैच की आईएएस और जबलपुर कलेक्टर छवि भारद्वाज ने।लाइक अ बर्ड ऑन द वायर' नाम से यह उपन्यास हाल ही में प्रकाशित हुआ है। माना जा रहा है कि मप्र में पहली बार किसी आईएएस अफसर ने आईएएस अफसर की ही प्रेम कहानी पर कोई किताब लिखी है। इस किताब में नीथरा और अविनाश के अलावा कुछ अन्य आईएएस अफसर और उनकी पत्नी के भी पात्र हैं। 1988 में महाराष्ट्र बैच के आईएएस उपमन्यू चटर्जी ने 'इंग्लिश अगस्त' नाम से एक उपन्यास लिखा था, बाद में इस पर फिल्म भी बनी थी।

भले ही यह उपन्यास हो, लेकिन इस बहाने किताब में आईएएस अफसरों का जीवन, उसमें आने वाली कठिनाईयों और काम के दौरान उन पर आने वाले राजनीतिक दबाव की झलक भी इस किताब में मिलती है। इसके अलावा आईएएस के अधीनस्थ उनके बारे में किस तरह से बातें करते हैं, इसका उल्लेख भी किताब में है।कुछ घटनाएं लिखते-लिखते किताब बन गई : छवि

जबलपुर कलेक्टर छवि भारद्वाज ने बताया कि कुछ साल पहले छुट्टियों के दौरान मेरे मन में कुछ घटनाएं आई थीं तो मैंने उसे लिख लिया था। कोई कहानी मेरे दिमाग में नहीं थी या योजना बनाकर इस किताब का नहीं लिखा। कहानी पूरी करते-करते यह उपन्यास बन गई। मैंने यह कहानी 2013 में डिंडोरी में कलेक्टर रहते हुए पूरी कर ली थी, लेकिन अब जाकर इसे किताब की शक्ल मिली। उन्होंने कहा कि यह किताब किसी सत्य घटना या व्यक्ति पर आधारित नहीं है। हालांकि किताब के कुछ हिस्से ऐसे हो सकते हैं, जो एक प्रशासक के तौर पर सामने आई स्थिति से बने मानस से मिलते-जुलते हों।

पढ़ने के बाद सवाल कौंधेगा, 'क्या यह फिक्शन है'

ऑनलाइन एशियन लिटररी कम्युनिटी की वेबसाइट न्यू एशियन राइटिंग ने किताब की समीक्षा लिखी है। समीक्षा में कहा गया है, 'किताब पढ़ने के बाद कई दिनों तक आपके मन में यह सवाल कौंधेगा कि क्या यह वाकई फिक्शन है?' यदि ऐसा है तो यह बहुत अच्छा काम है.

नईदुनिया से साभार

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