Monday, October 22, 2018
भागीरथपुरा के नाले में बहाया गया था गुजरात से आया केमिकल

भागीरथपुरा के नाले में बहाया गया था गुजरात से आया केमिकल

मीडियावाला.इन। इंदौर,  भागीरथपुरा नाले में जहरीला केमिकल फेंकने वाले गिरोह के ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ठेकेदार और टैंकर मालिक की तलाश की जा रही है। आरोपित ने गुजरात की बड़ी फैक्टरियों से केमिकल लाना कबूला है। वह वर्षों से नाले, नदी और तलाबों में केमिकल फेंक रहा था।

शिप्रा पुलिस के मुताबिक, 3 अक्टूबर को भागीरथपुरा नाले में मिले जहरीले केमिकल के कारण सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे। आंखों में जलन, घबराहट और उल्टियां होने से कई लोगों को विभिन्ना अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा। मंगलवार को सूचना मिली कि एक टैंकर श्याणा-पटवा के बीच खान नदी में खाली किया जा रहा है। टीआई अजय वर्मा ने दबिश देकर चालक पवन पिता गंगाराम निवासी लोंदिया शाजापुर को टैंकर (जीजे-06वीवी 8199) सहित पकड़ लिया। पूछताछ में पवन ने कबूला कि वह गीताश्री गार्डन, नागदा से लेकर टैंकर आया था। टैंकर नागदा के ठेकेदार मनोहर पोरवाल ने मंगवाया था। वह गुजरात की बड़ी फैक्टरियों से अपशिष्ट खाली करने का ठेका लेता है।


वह केमिकल अंकलेश्वर में खाली करवाता था। कुछ दिन पूर्व गुजरात से केमिकल खाली करवाने के लिए मंगवाया गया था। मनोहर ने टैंकर गार्डन में रखवा दिया। देर रात भागीरथपुरा नाले में खाली किया तो पानी में धुआं उठने लगा। ड्राइवर घबरा गया और टैंकर लेकर फरार हो गया। पुलिस से बचने के लिए टैंकर को इंगोरिया में एक ढाबे के पीछे छुपा दिया। मंगलवार को बचा हुआ केमिकल खाली करने आया था। पुलिस के मुताबिक मामले में मनोहर पोरवाल और टैंकर मालिक योगेश चंद्रावत को भी आरोपित बनाया गया है। तीनों के खिलाफ धारा 269,277 और 284 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

इधर, प्रशासन की प्रारंभिक जांच में संदेह, बहाया था एचसीएल एसिड

भागीरथपुरा के नाले में डाले गए केमिकल के हाइड्रोक्लोरिक (एचसीएल) एसिड होने की आशंका में नागदा की एक विदेशी कंपनी से लेकर उसकी इंदौर की वितरक पार्वती इंटरप्राइजेस जांच के घेरे में आ गई है। जांच होने तक कंपनी की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। साथ ही जिला प्रशासन ने वितरक के तीन महीने के दस्तावेज मांगे हैं। पार्वती इंटरप्राइजेस नागदा स्थित जर्मनी की कंपनी के बायप्रोडक्ट एचसीएल की वितरक है।

बताया जाता है कि यहां हर दिन 400 टन एचसीएल पैदा हो रहा है। जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की टीम सांवेर रोड व अन्य क्षेत्रों के ऐसे कारखानों की जांच भी कर रही है। अपर कलेक्टर निधि निवेदिता ने बताया कि संदेह के आधार पर पार्वती इंटरप्राइजेस की खरीदी-बिक्री की जांच की जा रही है। उधर, पार्वती इंटरप्राइजेस के डायरेक्टर अश्विनी कुमार माहेश्वरी का कहना है कि प्रशासन को जांच में सहयोग कर रहे हैं।

एसिड का डिस्पोजल बड़ी समस्या 

- निगेटिव प्रोडक्ट होने के कारण एचसीएल एसिड का डिस्पोजल उत्पादक कारखानों के लिए बड़ी समस्या होता है। इसीलिए इसका डिस्पोजल करने के लिए कंपनियां अपने डिस्ट्रिब्यूटर को एचसीएल के अलावा अलग से ट्रांसपोर्टेशन का पैसा भी देती हैं।

- एचसीएल एसिड का सर्वाधिक उपयोग टॉयलेट क्लीनर के रूप में होता है। इसके अलावा जानवरों के शव प्रिजर्व करने में प्रयोगशालाओं में भी उपयोग होता है।

- कारखानों में जितना एचसीएल पैदा होता है उतनी मात्रा में इसका उपयोग नहीं हो पाता। यही कारण है कि कारखाने बला टालने के लिए इसे डिस्पोजल करने वाले एजेंटों को सौंप देते हैं। वे इसका उपयोग कहां करते हैं इसकी निगरानी करने का सिस्टम नहीं है।

 

नईदुनिया से साभार 

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