उज्जैन काल भैरव मंदिर में 500 रुपये में शुरू हुई VIP दर्शन व्यवस्था

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उज्जैन काल भैरव मंदिर में 500 रुपये में शुरू हुई VIP दर्शन व्यवस्था

 मध्यप्रदेश धार्मिक नगरी उज्जैन के सुप्रसिद्ध श्री कालभैरव मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। विश्वभर में बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग लगाने की अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में अब ₹500 का सशुल्क (VIP) टिकट काउंटर शुरू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब श्रद्धालु बिना लंबी कतारों में लगे सीधे गर्भगृह के सामने पहुंचकर बाबा कालभैरव के दर्शन कर सकेंगे और मदिरा का भोग लगा सकेंगे

500 रुपये बाबा कालभैरव के VIP दर्शन

मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 500 रुपए की अधिकृत रसीद दी जाएगी। इसके बाद उन्हें सामान्य कतार से अलग गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु अपने साथ लाई मदिरा पुजारी को सौंपेंगे और उनके सामने ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। यह शुल्क महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है।

कालभैरव मंदिर में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं पर्व और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रोटोकॉल दर्शन की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है।

महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू हुई व्यवस्था

महाकाल मंदिर में पहले से ही विभिन्न दर्शन और आरती व्यवस्थाएं सशुल्क संचालित हैं। भस्म आरती में प्रवेश के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए शुल्क लिया जाता है। वहीं संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी 250 रुपए में उपलब्ध है। इसी तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा लागू की गई है, हालांकि शुल्क दोगुना रखा गया है।

प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सीमित संख्या में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर आगे इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को और सुचारू बनाने पर निर्णय लिया जाएगा।फिलहाल वीआइपी प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था लागू की है। यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि बाहरी तत्वों के चुंगल में फंसकर ये श्रद्धालु वैसे ही रुपए देकर गर्भगृह तक पहुंच रहे थे, तो यह राशि इस तरह से अब मंदिर की आय का स्रोत बनेगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है।